आरोपी शंकर बिंद से उसकी बहस हो गई थी, जिसने राहुल के वहाँ होने पर आपत्ति जताई। हमलावर ने कथित तौर पर राहुल पर हमला करने से पहले जातिसूचक गालियाँ दीं।

उत्तर प्रदेश के औराई में एक दलित युवक नहर के पास हुई बहस के दौरान किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिससे उसकी एक आँख की रोशनी चली गई। पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी दी।
द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 20 वर्षीय राहुल को गंभीर चोटों के चलते रविवार को ज़िला अस्पताल से वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफ़र किया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के अनुसार, यह घटना शुक्रवार दोपहर की है, जब राहुल शौच के लिए नहर के पास गया था। इसी दौरान उसकी आरोपी शंकर बिंद से बहस हो गई, जिसने राहुल के वहाँ मौजूद होने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि हमलावर ने राहुल पर हमला करने से पहले जातिसूचक गालियाँ दीं।
एसपी मांगलिक ने कहा, “जब राहुल ने भागने की कोशिश की, तो आरोपी ने कथित तौर पर मोटरसाइकिल की चाबी उसकी बाईं आँख में घुसा दी और उसे जान से मारने की धमकी दी।”
राहुल दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों के मौके पर इकट्ठा होते ही हमलावर फरार हो गया।
सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और राहुल को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बाद में ज़िला अस्पताल ले जाया गया। एसपी ने पुष्टि की कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है।
गौरतलब है कि दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा और क्रूरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले में नए साल की शुरुआत से ठीक पहले एक दलित परिवार पर बेरहमी से हमला किया गया था और उन्हें बलात्कार की धमकी दी गई थी। आरोपियों ने “चमड़ी उतारकर जूते बनाने” जैसी धमकियाँ भी दी थीं।
हालाँकि, एक सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद अंततः एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पीड़ितों का आरोप था कि पुलिस ने उच्च जाति के आरोपियों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने घर की महिलाओं के साथ बलात्कार करने की धमकी दी थी।
द मूकनायक से बातचीत में अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले शिकायतकर्ता बीरेंद्र दास ने प्रशासनिक उदासीनता पर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता पुलिस क्या कर रही है। हम बस न्याय चाहते हैं। उन्होंने मेरी बेटी, पत्नी और बेटे को बुरी तरह पीटा है।”
उनके 15 वर्षीय बेटे अयान दास को आरोपियों ने घर से बाहर खींचकर लात-घूँसों से पीटा, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और भारी रक्तस्राव हुआ।
इसी तरह, बीते वर्ष नवंबर में झांसी में भी एक दलित युवक पर कुछ लोगों ने हमला किया था। आरोपियों ने उसे सिगरेट देने के बहाने बुलाया और वहाँ पहुँचने के बाद चप्पलों, मुक्कों, लातों और डंडों से पीटा। उस पर पिस्तौल तानी गई, कपड़े उतरवाए गए और उसे एक व्यक्ति के पैर छूने के लिए मजबूर किया गया। पूरे हमले का वीडियो भी बनाया गया। यह घटना 22 नवंबर को प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई थी।
द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि वह राजगढ़ में गोस्वामी रेस्टोरेंट के पास खड़ा था, तभी निशांत सक्सेना, सुकृत और कनिष्क उसके पास आए। उसने कहा,
“उन्होंने मुझसे सिगरेट पीने के लिए साथ चलने को कहा। हम चारों एक ही स्कूटर पर गए।”
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में ही तमिलनाडु के विल्लुपुरम ज़िले में कथित जातिगत भेदभाव का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था, जहाँ 18 वर्षीय दलित छात्र ने जातिसूचक गालियों और मारपीट से अपमानित होने के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 10 दिनों तक आईसीयू में संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस हृदयविदारक घटना में 18 वर्षीय दलित छात्र एस. गजनी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वह वडाकुचिपालयम का निवासी था और गवर्नमेंट अरिग्नार अन्ना आर्ट्स कॉलेज में इतिहास विषय का प्रथम वर्ष का छात्र था।
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द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 20 वर्षीय राहुल को गंभीर चोटों के चलते रविवार को ज़िला अस्पताल से वाराणसी स्थित बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफ़र किया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के अनुसार, यह घटना शुक्रवार दोपहर की है, जब राहुल शौच के लिए नहर के पास गया था। इसी दौरान उसकी आरोपी शंकर बिंद से बहस हो गई, जिसने राहुल के वहाँ मौजूद होने पर आपत्ति जताई। आरोप है कि हमलावर ने राहुल पर हमला करने से पहले जातिसूचक गालियाँ दीं।
एसपी मांगलिक ने कहा, “जब राहुल ने भागने की कोशिश की, तो आरोपी ने कथित तौर पर मोटरसाइकिल की चाबी उसकी बाईं आँख में घुसा दी और उसे जान से मारने की धमकी दी।”
राहुल दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों के मौके पर इकट्ठा होते ही हमलावर फरार हो गया।
सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और राहुल को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बाद में ज़िला अस्पताल ले जाया गया। एसपी ने पुष्टि की कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है।
गौरतलब है कि दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा और क्रूरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले में नए साल की शुरुआत से ठीक पहले एक दलित परिवार पर बेरहमी से हमला किया गया था और उन्हें बलात्कार की धमकी दी गई थी। आरोपियों ने “चमड़ी उतारकर जूते बनाने” जैसी धमकियाँ भी दी थीं।
हालाँकि, एक सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद अंततः एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पीड़ितों का आरोप था कि पुलिस ने उच्च जाति के आरोपियों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने घर की महिलाओं के साथ बलात्कार करने की धमकी दी थी।
द मूकनायक से बातचीत में अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले शिकायतकर्ता बीरेंद्र दास ने प्रशासनिक उदासीनता पर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं पता पुलिस क्या कर रही है। हम बस न्याय चाहते हैं। उन्होंने मेरी बेटी, पत्नी और बेटे को बुरी तरह पीटा है।”
उनके 15 वर्षीय बेटे अयान दास को आरोपियों ने घर से बाहर खींचकर लात-घूँसों से पीटा, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और भारी रक्तस्राव हुआ।
इसी तरह, बीते वर्ष नवंबर में झांसी में भी एक दलित युवक पर कुछ लोगों ने हमला किया था। आरोपियों ने उसे सिगरेट देने के बहाने बुलाया और वहाँ पहुँचने के बाद चप्पलों, मुक्कों, लातों और डंडों से पीटा। उस पर पिस्तौल तानी गई, कपड़े उतरवाए गए और उसे एक व्यक्ति के पैर छूने के लिए मजबूर किया गया। पूरे हमले का वीडियो भी बनाया गया। यह घटना 22 नवंबर को प्रेम नगर थाना क्षेत्र के एक गाँव में हुई थी।
द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि वह राजगढ़ में गोस्वामी रेस्टोरेंट के पास खड़ा था, तभी निशांत सक्सेना, सुकृत और कनिष्क उसके पास आए। उसने कहा,
“उन्होंने मुझसे सिगरेट पीने के लिए साथ चलने को कहा। हम चारों एक ही स्कूटर पर गए।”
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में ही तमिलनाडु के विल्लुपुरम ज़िले में कथित जातिगत भेदभाव का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था, जहाँ 18 वर्षीय दलित छात्र ने जातिसूचक गालियों और मारपीट से अपमानित होने के बाद आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 10 दिनों तक आईसीयू में संघर्ष करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, इस हृदयविदारक घटना में 18 वर्षीय दलित छात्र एस. गजनी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। वह वडाकुचिपालयम का निवासी था और गवर्नमेंट अरिग्नार अन्ना आर्ट्स कॉलेज में इतिहास विषय का प्रथम वर्ष का छात्र था।
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