चुनाव आयोग के मुताबिक कुल 2.89 करोड़ (2,88,74,067) मतदाताओं के नाम कटे हैं। इनमें 1,34,13,844 पुरुष और 1,54,55,288 महिला मतदाता शामिल हैं।

फाइल फोटो
उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) के दौरान पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 2.89 करोड़ (2,88,74,067) मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। द क्विंट की पड़ताल में सामने आया है कि इन हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है।
उत्तर प्रदेश में SIR के पहले चरण में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 1,34,13,844 पुरुष और 1,54,55,288 महिला मतदाताओं के नाम बाहर किए गए। यानी पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं का डिलीशन करीब 15 प्रतिशत, यानी लगभग 20 लाख अधिक रहा है। यदि इन मतदाताओं की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जाती, तो ये सभी नाम उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से भी हटा दिए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के किन इलाकों में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के नाम कटे
ग्रामीण और सेमी-अर्बन जिले: महिला डिलीशन का ‘हॉटस्पॉट’
रिपोर्ट में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 357 सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के अधिक नाम कटे हैं।
शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर डिलीशन का पैटर्न एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आता है। ग्रामीण इलाकों में जहां बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में इसके उलट पुरुष मतदाताओं के नाम ज्यादा काटे गए हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार, आजमगढ़, जौनपुर, सीतापुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर, खीरी, गाजीपुर, हरदोई, इलाहाबाद, गोंडा, बहराइच और प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के ऐसे प्रमुख जिले हैं, जहां शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण आबादी अधिक है।
यदि SIR के तहत पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम कटने की स्थिति की पड़ताल की जाए, तो ऐसे टॉप 10 जिलों में आजमगढ़, हरदोई, जौनपुर, कुशीनगर और गाजीपुर सबसे ऊपर नजर आते हैं।
कई सीटों पर डिलीशन का अंतर 14,000 से भी ज्यादा
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) विधानसभा सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम हटाए जाने का अंतर काफी अधिक दिखाई देता है। इन इलाकों में कई जगहों पर महिला मतदाताओं के डिलीशन की संख्या पुरुषों से 10,000 से 14,000 तक ज्यादा दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा अंतर वाली ग्रामीण सीटें:
● हरदोई: बिलग्राम–मल्लावां में पुरुषों की तुलना में 14,700 और सवायजपुर में 14,629 अधिक महिलाओं के नाम काटे गए।
● भदोही: औराई (SC) सीट पर 14,449 और भदोही (GEN) सीट पर 13,645 अधिक महिलाओं के नाम काटे गए।
● जौनपुर: शाहगंज सीट पर यह अंतर 14,102 रहा।
अन्य ग्रामीण सीटों में आजमगढ़ की निजामाबाद सीट पर 12,072 और अंबेडकर नगर की जलालपुर सीट पर 12,257 अधिक महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में उलटा पैटर्न
शहरी क्षेत्रों में यह पैटर्न पूरी तरह उलटा दिखाई देता है। यहां महिलाओं की तुलना में पुरुष मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं—
● नोएडा: यहां सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया, जहां महिलाओं की तुलना में 28,405 अधिक पुरुषों के नाम काटे गए।
● प्रयागराज (इलाहाबाद): इलाहाबाद उत्तर में 18,795 और इलाहाबाद दक्षिण में 11,054 अधिक पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए।
● लखनऊ: राजधानी की शहरी सीटों—लखनऊ उत्तर (15,259), लखनऊ कैंट (13,143) और लखनऊ पूर्व (12,686)—में पुरुषों के वोट अधिक कटे।
● गाजियाबाद: लोनी में 13,972 और गाजियाबाद सदर में 11,158 पुरुष मतदाताओं के नाम अधिक डिलीट हुए।
यूपी की आरक्षित सीटों पर सबसे ज्यादा कौन से नाम कटे?
प्रदेश की आरक्षित सीटों पर नाम कटने का पैटर्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आधार पर अलग-अलग नजर आता है।
ग्रामीण SC सीटों पर महिलाओं का अत्यधिक डिलीशन
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्रों में स्थित अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम कहीं अधिक संख्या में हटाए गए हैं। कई सीटों पर यह अंतर 10,000 से भी ज्यादा दर्ज किया गया है।
● भदोही: औराई (SC) सीट पर 14,449 अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
● कौशाम्बी: मंझनपुर (SC) सीट पर यह अंतर 12,290 रहा।
● मऊ: मुहम्मदाबाद–गोहना (SC) सीट पर 12,157 अधिक महिलाओं के वोट कटे।
● अंबेडकर नगर: आलापुर (SC) सीट पर 11,247 अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
● देवरिया: सलेमपुर (SC) सीट पर 11,191 अधिक महिला मतदाताओं के डिलीशन दर्ज किए गए।
हरदोई जिले की SC आरक्षित सीटों पर महिला मतदाताओं के नाम हटने के आंकड़े बेहद ऊंचे हैं। यहां की लगभग सभी सुरक्षित सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम कहीं अधिक काटे गए हैं। उदाहरण के तौर पर, गोपामऊ (SC) में 10,964, बालामऊ (SC) में 10,340 और सांडी (SC) में 10,130 अधिक महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए।
जहां ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षित सीटों पर महिला मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं, वहीं शहरी प्रभाव वाली SC आरक्षित सीटों पर इसके उलट पुरुष मतदाताओं के नाम ज्यादा काटे जाने का पैटर्न सामने आता है।
उदाहरण के तौर पर, आगरा कैंट (SC) सीट पर महिलाओं की तुलना में 8,562 अधिक पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि आगरा ग्रामीण (SC) सीट पर पुरुषों की तुलना में 1,629 अधिक महिला मतदाताओं के नाम काटे गए। यह अंतर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के स्पष्ट फर्क को दर्शाता है।
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उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) के दौरान पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 2.89 करोड़ (2,88,74,067) मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। द क्विंट की पड़ताल में सामने आया है कि इन हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है।
उत्तर प्रदेश में SIR के पहले चरण में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 1,34,13,844 पुरुष और 1,54,55,288 महिला मतदाताओं के नाम बाहर किए गए। यानी पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं का डिलीशन करीब 15 प्रतिशत, यानी लगभग 20 लाख अधिक रहा है। यदि इन मतदाताओं की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई जाती, तो ये सभी नाम उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से भी हटा दिए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के किन इलाकों में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के नाम कटे
ग्रामीण और सेमी-अर्बन जिले: महिला डिलीशन का ‘हॉटस्पॉट’
रिपोर्ट में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 357 सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के अधिक नाम कटे हैं।
शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर डिलीशन का पैटर्न एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आता है। ग्रामीण इलाकों में जहां बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में इसके उलट पुरुष मतदाताओं के नाम ज्यादा काटे गए हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार, आजमगढ़, जौनपुर, सीतापुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर, खीरी, गाजीपुर, हरदोई, इलाहाबाद, गोंडा, बहराइच और प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के ऐसे प्रमुख जिले हैं, जहां शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण आबादी अधिक है।
यदि SIR के तहत पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम कटने की स्थिति की पड़ताल की जाए, तो ऐसे टॉप 10 जिलों में आजमगढ़, हरदोई, जौनपुर, कुशीनगर और गाजीपुर सबसे ऊपर नजर आते हैं।
कई सीटों पर डिलीशन का अंतर 14,000 से भी ज्यादा
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) विधानसभा सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम हटाए जाने का अंतर काफी अधिक दिखाई देता है। इन इलाकों में कई जगहों पर महिला मतदाताओं के डिलीशन की संख्या पुरुषों से 10,000 से 14,000 तक ज्यादा दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा अंतर वाली ग्रामीण सीटें:
● हरदोई: बिलग्राम–मल्लावां में पुरुषों की तुलना में 14,700 और सवायजपुर में 14,629 अधिक महिलाओं के नाम काटे गए।
● भदोही: औराई (SC) सीट पर 14,449 और भदोही (GEN) सीट पर 13,645 अधिक महिलाओं के नाम काटे गए।
● जौनपुर: शाहगंज सीट पर यह अंतर 14,102 रहा।
अन्य ग्रामीण सीटों में आजमगढ़ की निजामाबाद सीट पर 12,072 और अंबेडकर नगर की जलालपुर सीट पर 12,257 अधिक महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में उलटा पैटर्न
शहरी क्षेत्रों में यह पैटर्न पूरी तरह उलटा दिखाई देता है। यहां महिलाओं की तुलना में पुरुष मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं—
● नोएडा: यहां सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया, जहां महिलाओं की तुलना में 28,405 अधिक पुरुषों के नाम काटे गए।
● प्रयागराज (इलाहाबाद): इलाहाबाद उत्तर में 18,795 और इलाहाबाद दक्षिण में 11,054 अधिक पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए।
● लखनऊ: राजधानी की शहरी सीटों—लखनऊ उत्तर (15,259), लखनऊ कैंट (13,143) और लखनऊ पूर्व (12,686)—में पुरुषों के वोट अधिक कटे।
● गाजियाबाद: लोनी में 13,972 और गाजियाबाद सदर में 11,158 पुरुष मतदाताओं के नाम अधिक डिलीट हुए।
यूपी की आरक्षित सीटों पर सबसे ज्यादा कौन से नाम कटे?
प्रदेश की आरक्षित सीटों पर नाम कटने का पैटर्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आधार पर अलग-अलग नजर आता है।
ग्रामीण SC सीटों पर महिलाओं का अत्यधिक डिलीशन
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्रों में स्थित अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम कहीं अधिक संख्या में हटाए गए हैं। कई सीटों पर यह अंतर 10,000 से भी ज्यादा दर्ज किया गया है।
● भदोही: औराई (SC) सीट पर 14,449 अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
● कौशाम्बी: मंझनपुर (SC) सीट पर यह अंतर 12,290 रहा।
● मऊ: मुहम्मदाबाद–गोहना (SC) सीट पर 12,157 अधिक महिलाओं के वोट कटे।
● अंबेडकर नगर: आलापुर (SC) सीट पर 11,247 अधिक महिलाओं के नाम हटाए गए।
● देवरिया: सलेमपुर (SC) सीट पर 11,191 अधिक महिला मतदाताओं के डिलीशन दर्ज किए गए।
हरदोई जिले की SC आरक्षित सीटों पर महिला मतदाताओं के नाम हटने के आंकड़े बेहद ऊंचे हैं। यहां की लगभग सभी सुरक्षित सीटों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम कहीं अधिक काटे गए हैं। उदाहरण के तौर पर, गोपामऊ (SC) में 10,964, बालामऊ (SC) में 10,340 और सांडी (SC) में 10,130 अधिक महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए।
जहां ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षित सीटों पर महिला मतदाताओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं, वहीं शहरी प्रभाव वाली SC आरक्षित सीटों पर इसके उलट पुरुष मतदाताओं के नाम ज्यादा काटे जाने का पैटर्न सामने आता है।
उदाहरण के तौर पर, आगरा कैंट (SC) सीट पर महिलाओं की तुलना में 8,562 अधिक पुरुष मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि आगरा ग्रामीण (SC) सीट पर पुरुषों की तुलना में 1,629 अधिक महिला मतदाताओं के नाम काटे गए। यह अंतर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच के स्पष्ट फर्क को दर्शाता है।
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