मध्य प्रदेश: सीमेंट फैक्ट्री के लिए चूना पत्थर सैंपलिंग का विरोध, आदिवासियों का प्रदर्शन; पुलिस पर पथराव, जबरन औद्योगिक परियोजनाएं थोपने के आरोप

Written by sabrang india | Published on: February 20, 2026
धार जिले में सीमेंट फैक्ट्री के लिए खदान सैंपलिंग को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। इसका विरोध करते हुए गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और पुलिस पर पथराव किया गया।


साभार : द मूकनायक

यह विवाद कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खेलाड़ी (Kheladi) गांव से शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि यहां एक सीमेंट उत्पादक कंपनी की टीम चूना पत्थर की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सैंपलिंग कर रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्य प्रभावित समुदाय की पूर्व सहमति के बिना और दबाव बनाकर किया जा रहा था।

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले में गुरुवार को उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीणों ने प्रस्तावित सीमेंट संयंत्र के लिए की जा रही चूना पत्थर खदान की सैंपलिंग का उग्र विरोध किया। यह घटना आदिवासी इलाकों में भूमि अधिकार, पर्यावरणीय क्षति और कथित रूप से थोपे जा रहे औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर व्याप्त गहरे असंतोष को उजागर करती है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खेलाड़ी (Kheladi) गांव से शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि यहां एक सीमेंट उत्पादक कंपनी की टीम चूना पत्थर की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सैंपलिंग कर रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्य प्रभावित समुदाय की पूर्व सहमति के बिना और दबाव बनाकर किया जा रहा था।

खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने कंपनी की मशीनों तथा प्रशासनिक वाहनों को नुकसान पहुंचाया। हालात काबू में करने के लिए जब पुलिस बल और अधिकारी वहां पहुंचे, तो उन पर भी पथराव किए जाने की सूचना है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उपकरणों को क्षतिग्रस्त होते, कुछ वाहनों को पलटते और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।

कुक्षी के एसडीएम प्रमोद गुर्जर ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि ग्रामीण सैंपलिंग प्रक्रिया का कड़ा विरोध कर रहे थे, जो बाद में हिंसक हो गया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस घटना के संबंध में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की गई है या नहीं।

यह मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विरोध केवल खेलाड़ी गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि धार जिले और अलीराजपुर जिले के अंतर्गत आने वाले गंधवानी और जोबट जैसे विधानसभा क्षेत्रों में भी व्यापक असंतोष है। उनके अनुसार, वहां भी दबाव में चूना पत्थर के लिए ड्रिलिंग की जा रही है।

उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई को वन अधिकार अधिनियम और पेसा जैसे संवैधानिक प्रावधानों के तहत संरक्षित आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना की कड़ी निंदा करते हुए लिखा, “आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर प्रभावशाली लोगों के दबाव में अन्याय को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़ी है और यह लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ी जाएगी। साथ ही उन्होंने यह सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की कि आखिर इन अभियानों की अनुमति किस स्तर पर और किसके द्वारा दी गई।

दूसरी ओर, पर्यावरणविदों और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं ने आगाह किया है कि ऐसी खनन परियोजनाओं से उपजाऊ कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा है। उनका कहना है कि इससे न केवल स्थानीय समुदायों के विस्थापन की आशंका बढ़ेगी, बल्कि पहले से संवेदनशील इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

यह घटना मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और मूल निवासियों के अधिकारों के बीच जारी टकराव को एक बार फिर सामने लाती है। एक ओर जहां मामले की जांच जारी है, वहीं इस घटनाक्रम ने आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय समुदाय की स्पष्ट सहमति सुनिश्चित करने और सुरक्षा संबंधी कानूनों का कड़ाई से पालन करने की मांग को फिर से तेज कर दिया है।

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