यूपी: लखीमपुर खीरी में 2 दलित बहनों को अगवा कर फांसी पर लटकाया, 6 आरोपी गिरफ्तार

Written by Sabrangindia Staff | Published on: September 15, 2022
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी क्षेत्र से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिले के निघासन में बुधवार शाम एक खेत में दो सगी बहनों के शव पेड़ पर फंदे से लटकते पाए गए। दोनों लड़कियां दलित समुदाय की थीं। 


Image: themooknayak

दलित अत्याचार का यह पहला मामला नहीं है। दलितों पर सदियों से अत्याचार होता आया है लेकिन आजाद भारत की 75वीं सालगिरह को अमृत महोत्सव के तौर पर मनाए जाने के बाद भी दलितों की सामाजिक स्थिति में बहुत बदलाव आय़ा हो, ऐसा प्रतीत नहीं होता। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निघासन मामले में मुख्य आरोपी समेत 6 लोगों को गिरफ्तार में लिया गया है। ये सभी आपस में दोस्त हैं। इन पर पॉक्सो एक्ट के तहत रेप और हत्या की धाराएं लगाई गई हैं। एक आरोपी को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया है। उसके पैर में गोली लगी है।

इस मामले में लखीमपुर खीरी के एसपी ने कहा कि लड़कियों के साथ रेप के बाद उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पूरे मामले में नामजद अभियुक्त समेत 6 को गिरफ्तार किया गया है। जब लड़कियों ने आरोपियों पर शादी का दबाव बनाया तो उनकी हत्या की गई। एसपी ने बताया कि नामजद आरोपी छोटू ने अन्य आरोपियों से लड़कियों की मुलाकात कराई थी। बाकी चीजें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ही साफ हो पाएंगी।

जैसे ही ये घटना सामने आई स्थानीय ग्रामीणों ने निघासन चौराहे पर रास्ता जाम कर प्रदर्शन किया। लड़कियों की मां ने पड़ोस के गांव के रहने वाले तीन युवकों पर उसकी बेटियों को अगवा कर उनकी हत्या करने का आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बुधवार की शाम निघासन कोतवाली क्षेत्र के एक गांव से कुछ दूरी पर गन्ने के खेत में पेड़ पर फंदे से लटकते दो लड़कियों के शव मिले। दोनों लड़कियां दलित समुदाय की हैं। एसपी संजीव सुमन और एडिश्नल एसपी अरुण कुमार सिंह बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और नाराज ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा दिया।

सूत्रों ने बताया कि मृत लड़कियों की मां का आरोप है कि पड़ोस के गांव के रहने वाले तीन युवकों ने उसकी बेटियों को उनकी झोपड़ी के पास से अगवा करने के बाद उनकी हत्या कर दी। उन्होंने बताया कि शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं और मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही पता लग सकेगा। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

विपक्ष का सरकार पर निशाना
इस बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने इस घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए ट्वीट किया, 'निघासन पुलिस थाना क्षेत्र में दो दलित बहनों को अगवा करने के बाद उनकी हत्या और उसके बाद पुलिस पर पिता का ये आरोप बेहद गंभीर है कि बिना पंचनामा और सहमति के उनका पोस्टमॉर्टम किया गया। लखीमपुर में किसानों के बाद अब दलितों की हत्या ‘हाथरस की बेटी’ हत्याकांड की जघन्य पुनरावृत्ति है।'



कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा, 'लखीमपुर में दो बहनों की हत्या की घटना दिल दहलाने वाली है। परिजनों का कहना है कि उन लड़कियों का दिनदहाड़े अपहरण किया गया था। रोज अखबारों व टीवी में झूठे विज्ञापन देने से कानून व्यवस्था अच्छी नहीं हो जाती। आखिर उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध क्यों बढ़ते जा रहे हैं? कब जागेगी सरकार?'

यूपी में बेखौफ हैं अपराधी- मायावती
पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस घटना पर ट्वीट किया है। उन्होंने एक के बाद एक अपने दो पोस्ट में लिखा, “लखीमपुर खीरी में मां के सामने दो दलित बेटियों का अपहरण व दुष्कर्म के बाद उनके शव पेड़ से लटकाने की हृदय विदारक घटना सर्वत्र चर्चाओं में है, क्योंकि ऐसी दुःखद व शर्मनाक घटनाओं की जितनी भी निन्दा की जाए वह कम। यूपी में अपराधी बेखौफ हैं क्योंकि सरकार की प्राथमिकताएं गलत।”

मायावती ने कहा, “यह घटना यूपी में कानून-व्यवस्था व महिला सुरक्षा आदि के मामले में सरकार के दावों की जबर्दस्त पोल खोलती है। हाथरस सहित ऐसे जघन्य अपराधों के मामलों में ज्यादातर लीपापोती होने से ही अपराधी बेखौफ हैं। यूपी सरकार अपनी नीति, कार्यप्रणाली व प्राथमिकताओं में आवश्यक सुधार करे।”



दोषियों को कड़ी सजा देंगे- उप मुख्यमंत्री
इस बीच उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मीडिया से कहा, “जुनैद, सोहेल, हाफिजुल, करीमुद्दीन और आरिफ शामिल थे। लड़कियों की गला दबाकर हत्या की गई और फिर उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। सरकार ऐसा कदम उठाएगी कि उनकी आने वाली पीढ़ियों की आत्मा भी कांप उठेगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिया जाएगा; फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कार्यवाही की जाएगी।”

दलितों के खिलाफ अपराध में यूपी अव्वल
सरकार भले ही विज्ञापन देकर अपराध रोकने का दावा करे लेकिन उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ अपराध रुकने के बजाय बढ़ रहे हैं। नेशलन क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का डाटा बताता है कि यूपी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ अपराधों की उच्चतम दर है। 2019 में, यूपी ने 45,961 के कुल राष्ट्रीय आंकड़े में से 11,829 मामले दर्ज किए, इस प्रकार भारत में अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ सभी अपराधों के 25 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार है।
 
चौंकाने वाली बात यह है कि कोविड जैसी घातक वैश्विक महामारी भी संख्या को कम नहीं कर सकी, क्योंकि एनसीआरबी के 2020 के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराधों के 50,291 मामलों में से 12,714 उत्तर प्रदेश से दर्ज किए गए थे। यह एक बार फिर भारत भर में अनुसूचित जाति के खिलाफ सभी अपराधों के एक चौथाई से अधिक के लिए जिम्मेदार है।
 
क्राइम इन इंडिया 2021 शीर्षक वाली नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, जबकि अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अपराधों के मामलों का राष्ट्रीय आंकड़ा 50,900 है, उत्तर प्रदेश से रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या 13,146 है। फिर, देश में अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ सभी अपराधों में उत्तर प्रदेश का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।


निघासन हत्याकांड से पहले यूपी हाथरस की घटना को लेकर चर्चा में आया था। उस दौरान आरोपी सवर्ण हिंदू समुदाय से थे, शायद यही कारण रहा की वहां मामला कवर करने जा रहे पत्रकारों को भी रोक दिया गया था और इस मामले पर बोलने वालों पर यूएपीए के तहत कार्रवाई की गई थी।

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