बीएचयू छात्रा के साथ यौन हिंसा के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन, ABVP पर हमले का आरोप

Written by sabrang india | Published on: November 6, 2023
बीएचयू के सिंहद्वार पर जनवादी छात्र संगठन के प्रतिनिधि एक नवंबर को आईआईटी की छात्रा के साथ हुई यौन हिंसा के विरोध में धरने पर बैठे थे। इस घटना ने देश को अंदर से झकझोर दिया था। इस मुद्दे को लेकर बीएचयू समेत देश भर में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 



वाराणसी में पिछले तीन दिनों से काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सिंह द्वार पर धरने पर बैठी छात्राओं और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच रविवार को जमकर नोकझोंक हुई। आंदोलनकारी छात्राएं आईआईटी-बीएचयू की द्वितीय वर्ष की छात्रा से हुई छेड़खानी मामले को लेकर आंदोलन कर रही थीं। रविवार को उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षा मंत्री और बीएचयू प्रशासन का पुतला दहन करने की योजना बनाई थी।

बीएचयू गेट पर दोपहर में आइसा के बैनर तले आंदोलन-प्रदर्शन चलाया जा रहा था। छात्रा के साथ छेड़खानी मामले को लेकर रविवार को विरोध के दौरान बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते उन्होंने पुतला दहन करने की योजना बनाई थी। पुतला दहन की सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। तभी बीएचयू के प्रॉक्टोरियल बोर्ड की महिला टीम ने छात्राओं से पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला छीन लिया और उसे जलने से रोक दिया। पुतले की छीना-झपटी के दौरान दौरान छात्राओं और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच जमकर नोक-झोंक हुई। तीखी झड़प होने से विश्वविद्यालय के सिंहद्वार पर अफरा-तफरी मच गई। लंका चौराहे पर गाड़ियों की कतार लग गई।

आइसा से जुड़ी छात्राओं के समर्थन में बड़ी संख्या में  छात्र और कार्यकर्ता पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन व सरकार विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। काफी  देर तक हंगामे कि स्थिति रही। बाद में नारेबाजी करने वाले आइसा के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।


 
आंदोलन में शामिल छात्रा इप्शिता ने आरोप लगाया कि "आंदोलनकारी छात्राएं जिस समय पुलिस से अपने गिरफ्तार साथी के बारे में बात कर रही थीं, तभी नारेबाजी करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग पहुंचे और पुलिस की शह पर हमला बोल दिया। आंदोलनकारी छात्राएं अपना बचाव करने लगी और ABVP वाले खुलेआम मारपीट और गुंडई करते रहे। पुलिस प्रशासन ABVP के लोगों को रोकने की जगह आंदोलनकारियों को ही खदेड़ने में जुट गया। लंका थाना पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय आंदोलन का  दमन करने में जुट गई है।"

इस बीच छात्रों ने आरोप लगाया कि पीएचडी स्कॉलर आयुर्वेद संकाय रोशन पांडेय को प्रदर्शन के दौरान पुलिस जबरन उठा ले गयी है। पुलिस और एलआईयू के लोग कुछ बताने से इनकार कर रहे हैं। आईआईटी रेप पीड़िता के अपराधी 3 दिन से खुलेआम घूम रहे हैं। दोषियों को पकड़ने के बजाय न्याय की माँग करने वाले को ही पुलिस पकड़ रही है।


सोशल मीडिया पर जारी पोस्टर

बीएचयू के सिंहद्वार पर जनवादी छात्र संगठन के प्रतिनिधि एक नवंबर को आईआईटी की छात्रा के साथ हुई यौन हिंसा के विरोध में धरने पर बैठे थे। इस घटना ने देश को अंदर से झकझोर दिया था। इस मुद्दे को लेकर बीएचयू समेत देश भर में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। छात्राएं अपराधियों की  गिरफ्तारी शीघ्र करने के साथ ही आईआईटी में दीवार खड़ा करने का विरोध कर रही थीं।

आंदोलनकारी छात्रा सिद्धि ने कहा, " महिलाओं के साथ हिंसा, रेप, छेड़खानी का विरोध करने पर अभाविप, लंका थाना पुलिस और बीएचयू प्रशासन मिलकर अमन पसंद लोगों का दमन कर रहे हैं। लगता है कि ये सभी अपराधियों के साथ खड़े हैं? हम बनारस के अमनपसंद लोगों से अपील कर रहे हैं कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आगे आएं। यौन हिंसा के मामले को दबाने में जुटे लोगों के खिलाफ प्रतिरोध दर्ज कराएं।"



चोट के निशान दिखाती छात्राएं


सोशल मीडिया पर जारी पोस्टर

प्रदर्शनकारी छात्रों की बीएचयू के विद्यार्थियों और नागरिकों से अपील: 

साथियों,
जैसा कि आप सबको ज्ञात है कि विगत 3 दिन पहले IIT BHU की एक छात्रा के साथ दर्दनाक यौन हिंसा हुई थी। इस घटना ने देश के सभी लोगों को अंदर से झकझोर दिया था। इसके बाद बीएचयू समेत देश भर में इसके खिलाफ आंदोलन व विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बीएचयू में भी हम सभी पीड़िता के साथ न्याय, अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी व कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा के लिए लंका गेट, बीएचयू पर 3 दिन से आंदोलनरत हैं। 

सरकार, जिला और बीएचयू प्रशासन की असंवेदनशील रवैए से तंग आकर आज दोपहर 12 बजे हम सभी आंदोलन को आगे बढ़ते हुए प्रशासन और सरकार का पुतला फूंक रहे थे। तभी पुलिस प्रशासन ने मारपीट करते हुए हमसे पुतला छीन लिया और हमारे एक साथी रोशन को अगवा करके अज्ञात जगह पर ले गए हैं। साथी रोशन की कोई जानकारी पुलिस वाले नहीं दे रहे हैं। इसी बीच जब हम सब रोशन की रिहाई की मांग कर रहे थे तब जिला व बीएचयू प्रशासन के सामने ABVP ने हम सभी पर हमला किया और हातापाई भी हुई। पुलिस प्रशासन ने उनको रोकने की जगह हमें ही भागा रही है। अपराधियों को गिरफ्तार करने की जगह आंदोलन करने वाले साथियों को गिरफ्तार कर रही है।

महिलाओं के साथ हिंसा, रेप, छेड़खानी का विरोध करने पर ABVP, पुलिस और बीएचयू प्रशासन हमें न्यायपसंद लोगो को रोक रही है। क्या ABVP, पुलिस और बीएचयू प्रशासन रेपिस्टों और अपराधियों के साथ खड़ी है?

देश भर , बनारस और बीएचयू के विद्यार्थियों, नागरिकों और न्याय पसंद लोगो अपील है आप सभी सरकार और पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों से संपर्क कर इसी मामले तत्काल संज्ञान लेने का दवाब बनाएं। 

बनारस और बीएचयू के छात्रों, नागरिकों से अपील है कि वो लंका गेट, बीएचयू पर इकट्ठा हों, जिला प्रशासन से अपील करें कि अपराधियों की जगह हमें प्रताड़ित करना बंद करें।
 
संयुक्त बैठक में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर

5 नवंबर 2023 को बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) प्रशासन की संयुक्त बैठक हुई। इस दौरान पूरे बीएचयू परिसर की व्यापक सुरक्षा की चिंता पर विस्तार से चर्चा की। तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में दोनों प्रशासन पूरे परिसर में शांतिपूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए संसाधन व सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर सहमत हुए। बैठक में कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन, निदेशक, आईआईटी-बीएचयू, प्रो. प्रमोद कुमार जैन, और अन्य शीर्ष पदाधिकारी शामिल हुए।

संस्थानों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की और समाधान निकाला:

1. दोनों प्रशासन कैंपस में सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहे हैं। परिसर में अत्याधुनिक सीसीटीवी निगरानी सुविधा का शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड से उचित मदद ली जा रही है। वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड इस संबंध में प्रारंभिक सर्वेक्षण भी कर चुका है।

2. कैम्पस स्ट्रीट लाइटिंग में तत्काल सुधार किया जा रहा है। कार्य पहले से ही प्रगति पर है, अगले दो दिनों में परिसर की प्रत्येक सड़क पर उचित रोशनी होगी।

3. कैम्पस की सुरक्षा और जांच चौकियों को मजबूत किया जा रहा है और इन्हें सख्ती से लागू किया जा रहा है। चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

4. परिसर के सभी सात गेटों पर रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए कड़ी जांच की जा रही है।

5. आईआईटी (बीएचयू) और बीएचयू दोनों में महिला शिकायत कक्ष है। दोनों संस्थाएं काम करेंगी। अपने-अपने प्रकोष्ठों को मजबूत करने में छात्रों की अधिक भागीदारी होगी। सात दिनों के भीतर GSCASH प्रावधानों की भी समीक्षा की जाएगी और देखा जाएगा कि महिला शिकायत प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली में क्या सुधार की जरूरत है।
 
6. दोनों संस्थानों के संकाय सदस्यों की एक संयुक्त समिति भी बनाई गई है। यह परिसर में छात्रों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए समन्वय और मिलकर काम करेगा। संयुक्त समिति सीधे दोनों संस्थानों के प्रमुखों को रिपोर्ट करेगी। समिति की अध्यक्षता प्रोफेसर रोयाना सिंह (एनाटॉमी विभाग, आईएमएस) द्वारा की जाएगी और सह-अध्यक्षता प्रोफेसर राजेश कुमार उपाध्याय (केमिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी-बीएचयू) करेंगे। प्रो. ललित मोहन अग्रवाल (आईएमएस, बीएचयू) और प्रोफेसर आर.के. सिंह (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी-बीएचयू) को इस संयुक्त समिति का सदस्य नामित किया गया है।
 
7. उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि चारदीवारी होने से सुरक्षा का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आईआईटी परिसर के लिए दीवार निर्माण की चुनौतियों पर भी चर्चा की। जिस पर सर्वसम्मति से वर्तमान परिस्थिति में सहमति बनी-

कई संकाय भवन और अन्य इकाइयाँ/सेवाएँ जैसे अस्पताल, सीवेज सिस्टम, बिजली/पानी आपूर्ति, डाकघर, परिसर की ओर जाने वाली सड़कें, प्रवेश द्वार आदि संयुक्त रूप से साझा किए जाते हैं, ऐसे में परिसर को चारदीवारी से अलग/विभाजित करना संभव नहीं है।  
 
8. सम्पूर्ण परिसर के सभी विद्यार्थियों एवं समुदाय से अनुरोध है कि वे अपना सहयोग प्रदान करें। अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों में नियमों, विनियमों और प्रोटोकॉल का पालन करें। अंत में यह निर्णय लिया गया कि उपरोक्त सभी बिंदुओं को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। इसके अलावा, इसकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।

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