कांग्रेस ने प्रशासन की ‘निष्पक्षता’ पर सवाल उठाए। बीजेपी ने विपक्ष से कहा कि ‘शिष्टाचार भेंट में कुछ भी गलत नहीं’।

साभार : पीटीआई
इंदौर में गुरुवार को उस समय राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात शहर के RSS कार्यालय में एक बैठक में शामिल हुए। यह घटना भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से करीब आठ लोगों की मौत और अधिकारियों के जांच के दायरे में आने के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक की पुष्टि कई सूत्रों ने की है। मेयर ने भी बैठक में शामिल होने की बात आंशिक रूप से स्वीकार की, लेकिन इसके महत्व को कम करके बताया। भार्गव ने अख़बार से कहा, “एक स्वयंसेवक के तौर पर मैं अक्सर RSS कार्यालय जाता हूं। इसका मौजूदा संकट से कोई लेना-देना नहीं है।” वहीं कलेक्टर वर्मा ने इस बैठक पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।
सुदर्शन रोड स्थित RSS की मालवा क्षेत्रीय इकाई के मुख्यालय में बंद दरवाज़ों के पीछे हुई इस बैठक से परिचित लोगों के अनुसार, यह बैठक RSS मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने बुलाई थी। सूत्रों ने बताया कि चर्चा का केंद्र संकट प्रबंधन में हुई विफलताएं थीं।
BJP ने कहा ‘रूटीन दौरा’
BJP ने आरोपों को खारिज करते हुए इस बैठक को दोनों अधिकारियों का ‘रूटीन दौरा’ बताया। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने RSS कार्यालय के बाहर खड़े मेयर का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा, “जब इंदौर के नलों से ज़हर बह रहा है, जब निर्दोष नागरिकों की मौत से घरों में मातम पसरा है, जब सरकार फेल हो चुकी है—तो क्या कलेक्टर को फील्ड में, अस्पतालों में और प्रभावित परिवारों के बीच नहीं होना चाहिए, या फिर RSS कार्यालय के अंदर?”
पटवारी ने कहा कि इंदौर के कलेक्टर और मेयर का RSS कार्यालय में “देर रात जाना” किसी भी तरह से ‘रूटीन दौरा’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने इसे “प्रशासनिक निष्पक्षता की साख पर चोट” बताया।
इन आरोपों को खारिज करते हुए BJP प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा, “यह एक शिष्टाचार भेंट थी और इसमें कुछ भी गलत नहीं था। क्या अधिकारी लोगों से नहीं मिल सकते? कांग्रेस को बैठक को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाना बंद करना चाहिए।”
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में चर्चा दूषित पानी संकट की वजहों, समन्वय की कमियों, देरी से प्रतिक्रिया तंत्र और संचार विफलताओं से आगे बढ़कर, इस पूरे मामले को लेकर बनी नकारात्मक सार्वजनिक धारणा पर केंद्रित हो गई।
एक BJP पदाधिकारी ने कहा, “RSS को बताया गया कि प्रदूषण क्यों हुआ, फाइलें समय पर आगे क्यों नहीं बढ़ीं और स्थिति को कैसे संभाला गया। यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी। इसे RSS के प्रति जवाबदेही बताना गलत है।”
एक अन्य अधिकारी के अनुसार, “इस बात पर सहमति बनी कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। ब्यूरोक्रेसी और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी, उसे सुधारने के तरीकों और अधिकारियों के नागरिकों से संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई।”
इस बैठक के बाद संस्थागत प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हो गई है। जिला कलेक्टर, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी होने के नाते, राज्य सरकार के माध्यम से संचालित एक स्पष्ट कमांड चेन के तहत काम करते हैं, जबकि मेयर नगर निगम अधिनियमों के अंतर्गत कार्य करते हैं।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के ताज़ा हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक कम से कम 446 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 396 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 50 अभी भी अस्पताल में इलाजरत हैं। अधिकारियों ने बताया कि 10 मरीज फिलहाल ICU में हैं और प्रभावित इलाके के लिए विशेष रूप से दो एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
हालांकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि मृतकों की संख्या आठ है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि इंदौर जिला प्रशासन ने इस मामले में 18 पीड़ित परिवारों को 2-2 लाख रुपये के चेक वितरित किए हैं।
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साभार : पीटीआई
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द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक की पुष्टि कई सूत्रों ने की है। मेयर ने भी बैठक में शामिल होने की बात आंशिक रूप से स्वीकार की, लेकिन इसके महत्व को कम करके बताया। भार्गव ने अख़बार से कहा, “एक स्वयंसेवक के तौर पर मैं अक्सर RSS कार्यालय जाता हूं। इसका मौजूदा संकट से कोई लेना-देना नहीं है।” वहीं कलेक्टर वर्मा ने इस बैठक पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।
सुदर्शन रोड स्थित RSS की मालवा क्षेत्रीय इकाई के मुख्यालय में बंद दरवाज़ों के पीछे हुई इस बैठक से परिचित लोगों के अनुसार, यह बैठक RSS मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने बुलाई थी। सूत्रों ने बताया कि चर्चा का केंद्र संकट प्रबंधन में हुई विफलताएं थीं।
BJP ने कहा ‘रूटीन दौरा’
BJP ने आरोपों को खारिज करते हुए इस बैठक को दोनों अधिकारियों का ‘रूटीन दौरा’ बताया। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने RSS कार्यालय के बाहर खड़े मेयर का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा, “जब इंदौर के नलों से ज़हर बह रहा है, जब निर्दोष नागरिकों की मौत से घरों में मातम पसरा है, जब सरकार फेल हो चुकी है—तो क्या कलेक्टर को फील्ड में, अस्पतालों में और प्रभावित परिवारों के बीच नहीं होना चाहिए, या फिर RSS कार्यालय के अंदर?”
पटवारी ने कहा कि इंदौर के कलेक्टर और मेयर का RSS कार्यालय में “देर रात जाना” किसी भी तरह से ‘रूटीन दौरा’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने इसे “प्रशासनिक निष्पक्षता की साख पर चोट” बताया।
इन आरोपों को खारिज करते हुए BJP प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा, “यह एक शिष्टाचार भेंट थी और इसमें कुछ भी गलत नहीं था। क्या अधिकारी लोगों से नहीं मिल सकते? कांग्रेस को बैठक को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाना बंद करना चाहिए।”
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में चर्चा दूषित पानी संकट की वजहों, समन्वय की कमियों, देरी से प्रतिक्रिया तंत्र और संचार विफलताओं से आगे बढ़कर, इस पूरे मामले को लेकर बनी नकारात्मक सार्वजनिक धारणा पर केंद्रित हो गई।
एक BJP पदाधिकारी ने कहा, “RSS को बताया गया कि प्रदूषण क्यों हुआ, फाइलें समय पर आगे क्यों नहीं बढ़ीं और स्थिति को कैसे संभाला गया। यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी। इसे RSS के प्रति जवाबदेही बताना गलत है।”
एक अन्य अधिकारी के अनुसार, “इस बात पर सहमति बनी कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। ब्यूरोक्रेसी और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी, उसे सुधारने के तरीकों और अधिकारियों के नागरिकों से संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई।”
इस बैठक के बाद संस्थागत प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हो गई है। जिला कलेक्टर, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी होने के नाते, राज्य सरकार के माध्यम से संचालित एक स्पष्ट कमांड चेन के तहत काम करते हैं, जबकि मेयर नगर निगम अधिनियमों के अंतर्गत कार्य करते हैं।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी के ताज़ा हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक कम से कम 446 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 396 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 50 अभी भी अस्पताल में इलाजरत हैं। अधिकारियों ने बताया कि 10 मरीज फिलहाल ICU में हैं और प्रभावित इलाके के लिए विशेष रूप से दो एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
हालांकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि मृतकों की संख्या आठ है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि इंदौर जिला प्रशासन ने इस मामले में 18 पीड़ित परिवारों को 2-2 लाख रुपये के चेक वितरित किए हैं।
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