कोर्ट के आदेश के बाद हिरासत में कथित यातना के शिकार आकाश के शव का अंतिम संस्कार किया गया

Written by sabrang india | Published on: June 18, 2026
मनामदुरई पुलिस हिरासत में कथित यातना के कारण 8 मार्च को आकाश की मौत हो गई थी।


साभार : द हिंदू

26 वर्षीय आकाश डेलिसन की 8 मार्च को अस्पताल में मौत हो गई थी। आरोप है कि उनकी मौत मनामदुरई पुलिस हिरासत में दी गई यातना के कारण हुई। उनका अंतिम संस्कार मदुरई के थाथानेरी श्मशान घाट पर जिला प्रशासन द्वारा कराया गया।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया था और मांग की थी कि कथित यातना में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच के आदेश पर प्रशासन शव को श्मशान घाट ले गया।

जब अधिकारी सरकारी राजाजी अस्पताल की मोर्चरी से शव लेने पहुंचे, तो परिवार के सदस्यों और उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

परिवार ने कहा कि वे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करेंगे और अंतिम संस्कार के लिए अधिक समय चाहते हैं। हालांकि, प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन करने पर अड़ा रहा।

आकाश डेलिसन के माता-पिता, बहन और चाचा को थाथानेरी श्मशान घाट ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, मदुरई के सरकारी राजाजी अस्पताल (GRH) की मोर्चरी में लगभग 100 दिनों तक रखे जाने के बाद 26 वर्षीय आकाश डेलिसन का अंतिम संस्कार बुधवार, 17 जून को किया गया। आकाश की मौत कथित तौर पर शिवगंगा जिले में पुलिस हिरासत में दी गई यातना के कारण हुई थी। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उनका अंतिम संस्कार थाथानेरी श्मशान घाट पर संपन्न कराया गया।

अंतिम संस्कार से पहले मदुरई के सरकारी राजाजी अस्पताल के बाहर तनाव का माहौल था, क्योंकि परिवार के सदस्य शव को राज्य द्वारा अपने कब्जे में लेने के फैसले का विरोध कर रहे थे। रिश्तेदारों का आरोप था कि जब अधिकारी अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें जबरन हिरासत में लेने की धमकी दी।

आकाश का शव तीन महीने से अधिक समय तक GRH की मोर्चरी में पड़ा रहा, क्योंकि परिवार ने उसे लेने से इनकार कर दिया था। उनका आरोप था कि हिरासत में मौत के मामले में जवाबदेही तय नहीं की गई है और वे इसमें शामिल सभी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच द्वारा सरकार को आकाश के शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने के एक दिन बाद यह अंतिम संस्कार किया गया।

जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने कहा कि किसी मृत व्यक्ति का सम्मानजनक अंतिम संस्कार या दफन होना मानवीय गरिमा का हिस्सा है और इसे अनिश्चित काल तक इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि परिजन शव लेने से इनकार कर रहे हैं।

जज ने कहा, “परिवार द्वारा शव लेने से लगातार इनकार करने का अर्थ यह नहीं हो सकता कि शव को अनिश्चित काल तक सुरक्षित रखा जाए। ऐसा करने से अंततः उसी गरिमा को ठेस पहुंचेगी जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।”

कोर्ट ने गौर किया कि पोस्टमार्टम जांच और सभी कानूनी-चिकित्सीय औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो चुकी थीं, आवश्यक नमूने सुरक्षित रख लिए गए थे और जांच स्वतंत्र रूप से चल रही थी।

कोर्ट ने कहा कि शव को अनिश्चित काल तक सुरक्षित रखने से जांच में कोई अतिरिक्त मदद नहीं मिलेगी। साथ ही अधिकारियों को अंतिम संस्कार से पहले पर्याप्त फोटोग्राफिक और वीडियोग्राफिक दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जस्टिस विक्टोरिया गौरी ने यह भी कहा कि हिरासत में मौत के आरोपों वाले मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता और संस्थागत जवाबदेही की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा अंतिम संस्कार कराए जाने से हिरासत में मौत की चल रही जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और न ही इससे जांच प्रभावित होनी चाहिए।

आकाश मनामदुरई के कृष्णराजपुरम का निवासी था और अनुसूचित जाति के पल्लार समुदाय से संबंधित था। उसे 6 मार्च को मनामदुरई पुलिस ने हत्या के प्रयास के एक मामले में गुना नामक एक अन्य व्यक्ति के साथ गिरफ्तार किया था। उन पर पी. जयकुमार और आर. अज़गर पर धारदार हथियारों से हमला करने का आरोप था।

दो दिन बाद GRH में इलाज के दौरान आकाश की मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर दावा किया था कि गिरफ्तारी से बचने की कोशिश में पुल से गिरने के कारण उसे चोटें आई थीं। हालांकि, उसके परिवार ने पुलिस हिरासत में यातना दिए जाने का आरोप लगाया और मौत के बाद उसका शव लेने से इनकार कर दिया।

मृत्यु से पहले दिए गए बयान में आकाश ने कथित तौर पर कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांधी और उसके साथ मारपीट की, जिसमें लोहे की रॉड से उसके पैरों पर वार करना भी शामिल था।

एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में किए गए पोस्टमार्टम में कथित तौर पर उसके शरीर पर दो दर्जन से अधिक चोटें पाई गईं। इनमें दाहिने पैर की टिबिया और फाइबुला हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर, मांसपेशियों और नसों को भारी नुकसान, कोहनियों और घुटनों पर घाव तथा शरीर के विभिन्न हिस्सों पर खरोंचें शामिल थीं।

फिलहाल इस मामले की जांच CB-CID कर रही है। इस सिलसिले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।

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