हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र पर कथित हमला, ASA ने कार्रवाई न करने का आरोप लगाया

Written by sabrang india | Published on: February 24, 2026
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के एक दलित छात्र ने जाति के आधार पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाया है, जिसके बाद अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) ने विरोध प्रदर्शन किया। एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई नहीं की।


साभार : टीएनएम

हैदराबाद यूनिवर्सिटी (UoH) में छात्र संगठन अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) ने सोमवार, 23 फरवरी को एक दलित छात्र पर कथित जाति-आधारित हमले के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ASA के साथ-साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) और फ्रेटरनिटी मूवमेंट जैसे अन्य छात्र संगठनों द्वारा आयोजित किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उच्च शिक्षण संस्थानों में UGC के एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों को लागू करने पर नए सिरे से ध्यान दिया जा रहा है।

दूसरे वर्ष के एमए समाजशास्त्र के छात्र अनुज कुमार पर कथित तौर पर दूसरे वर्ष के एमए इतिहास के छात्र सूर्यवर्धन सिंह बबलू ने हमला किया। बताया गया है कि यह घटना एक व्यक्तिगत विवाद के बाद हुई, जो मारपीट में बदल गई। ASA के सदस्यों ने द न्यूज मिनट को बताया कि घटना के दौरान ऑल इंडियन अदर बैकवर्ड कास्ट्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) के पूर्व अध्यक्ष सूर्यवर्धन ने कथित रूप से अनुज के खिलाफ जातिसूचक गालियां दीं और उसके रूममेट को भी धमकाया।

ASA ने AIOBCSA की चुप्पी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संगठन “इस मामले पर मौन है और अनुज की शिकायत की सच्चाई को खुले तौर पर नकार रहा है।”

ASA ने यह भी आरोप लगाया कि आरक्षण एवं समन्वय प्रकोष्ठ के संयुक्त रजिस्ट्रार पी. थुकाराम ने शिकायत पर कार्रवाई में देरी की, जबकि मुख्य प्रॉक्टर संजय सुबोध पर लापरवाही का आरोप लगाया गया। संगठन ने मांग की है कि एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल निष्पक्ष जांच करे, सूर्यवर्धन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और कार्रवाई न करने के आरोप में संबंधित अधिकारियों को हटाया जाए।

आरोपों का जवाब देते हुए AIOBCSA ने ASA पर अपने संगठन के भीतर ऐसे मामलों को संभालने में “चुनिंदा नैतिकता” अपनाने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा, “हम इस मामले पर एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कमेटी और प्रॉक्टोरियल कमेटी के आधिकारिक मिनट्स और अंतिम निर्णय आने के बाद ही अपना रुख स्पष्ट करेंगे।”

अनुज और सूर्यवर्धन दोनों ने विश्वविद्यालय के एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल में एक-दूसरे के खिलाफ जाति-आधारित हिंसा और रैगिंग के आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई है। अनुज ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) से भी संपर्क किया है। आयोग ने शिकायत को राचकोंडा पुलिस कमिश्नरेट को भेजते हुए 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामले से जुड़े एक विश्वविद्यालय अधिकारी ने द न्यूज मिनट को बताया कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और छात्र कल्याण डीन (DSW), मुख्य प्रॉक्टर और मुख्य वार्डन को सिफारिशें भेज दी गई हैं। अधिकारी ने कहा, “दो दिन तक सुनवाई हुई और अनुज की शिकायतें सुनी गईं। कार्यवाही का विवरण तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है। सूर्यवर्धन ने भी अनुज के खिलाफ रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतें एक सप्ताह पहले अग्रेषित की गई थीं और जांच जारी है।”

हाल ही में केंद्र सरकार ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2012 में संशोधन किया था, जिसमें कैंपस में जाति, लिंग और दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव को रोकने के नए प्रावधान शामिल थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इनके कार्यान्वयन पर रोक लगाते हुए कहा है कि ये नियम “अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना है।”

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