जातिवादी हमला, 5 हजार का जुर्माना: ASA ने भूख हड़ताल के जरिए हैदराबाद यूनिवर्सिटी के ‘दिखावे’ का विरोध किया

Written by sabrang india | Published on: May 6, 2026
समाजशास्त्र में एमए कर रहे छात्र अनुज पर एक साथी छात्र ने शारीरिक हमला किया और जातिसूचक गालियां दीं।



यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (UoH) प्रशासन पर कैंपस में एक दलित पोस्टग्रेजुएट छात्र के साथ हुए जातिगत भेदभाव के मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए, अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) ने भूख हड़ताल की घोषणा की है। यह हड़ताल मंगलवार, 5 मई को दोपहर 3 बजे प्रशासनिक भवन में शुरू हुई।

सियासत की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 11 दिसंबर, 2025 को हुई थी, जिसमें समाजशास्त्र (Sociology) में एमए कर रहे छात्र अनुज पर एक साथी छात्र ने शारीरिक हमला किया और उसे जातिसूचक गालियां दीं।

एक बयान में ASA ने कहा कि अनुज द्वारा घटना के अगले ही दिन यूनिवर्सिटी अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, प्रशासन को इस मामले को स्वीकार करने में कई महीने लग गए। एसोसिएशन ने कहा कि यह देरी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसके तहत शिकायतों का निवारण तीन महीने के भीतर किया जाना अनिवार्य है।

ASA ने कहा कि जब आखिरकार इस मामले में कार्रवाई हुई, तो वह केवल खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं थी। एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिस ने आरोपी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया और उससे निजी तौर पर माफी मांगने को कहा। ASA ने इस बात की ओर इशारा किया कि यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी के उस पुराने रिकॉर्ड के बिल्कुल विपरीत है, जिसके तहत वह दलित छात्रों पर हॉस्टल के छोटे-मोटे नियमों के उल्लंघन— जैसे हॉस्टल परिसर में बाइक धोने— के लिए 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाती रही है।

शिकायत को और भी गंभीर बनाते हुए यह भी बताया गया कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी आरोपी ने कथित तौर पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उसने अन्य छात्रों से यूनिवर्सिटी के सभी स्थानों पर अनुज का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील की थी।

अनुज ने कहा, “मेरा अपमान किया गया, मुझे पीटा गया और मुझ पर जातिसूचक गालियां बरसाई गईं। शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उसने एक वीडियो जारी करके सभी से मेरा बहिष्कार करने को कहा। क्या मैं इस जगह का हकदार नहीं हूं?”

ASA ने प्रशासन पर इस घटना की जांच के लिए गठित ‘फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ की रिपोर्ट को दबाने का भी आरोप लगाया है और मांग की है कि उस रिपोर्ट के साथ-साथ SC/ST संपर्क अधिकारी (liaison officer) की जांच रिपोर्ट को भी तत्काल सार्वजनिक किया जाए।

ज्ञात हो कि शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। बीते दिनों केरल के एक संस्थान के दलित छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे जातिसूचक गालियों, धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया था।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान नितिन राज आरएल के रूप में हुई। वह तिरुवनंतपुरम के पुथुकुलंगारा, उझामलक्कल का निवासी था और कन्नूर के अंजरकंडी स्थित कॉलेज में BDS प्रथम वर्ष का छात्र था।

पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल की दोपहर राज मेडिकल कॉलेज ब्लॉक के पास एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की और डेंटल एनाटॉमी विभाग के प्रमुख एम.के. राम और एसोसिएट प्रोफेसर के.टी. संगीता नांबियार को निलंबित कर दिया।

राज के परिवार का दावा था कि 22 वर्षीय छात्र को उसकी जातिगत पहचान, रंग-रूप और आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, राज की बहन निकिता ने बताया कि एक बार क्लास में एक फैकल्टी सदस्य ने अन्य छात्रों के सामने उसे “सड़ा हुआ कुत्ता” कहकर अपमानित किया था।

उन्होंने कहा, “वह हमें नियमित रूप से इस तरह के भेदभाव और उत्पीड़न के बारे में बताता था। एक बार उसे स्टाफ रूम में बुलाकर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।”

निकिता के अनुसार, राज ने कॉलेज के प्रिंसिपल से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आगे कहा, “जब उत्पीड़न असहनीय हो गया, तो उसने विरोध किया, जिसके बाद उसे और अधिक गालियां दी जाने लगीं।”

राज के पिता राजन ने पत्रकारों को बताया कि फैकल्टी सदस्यों ने कथित तौर पर उनके बेटे के शैक्षणिक भविष्य को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “उसने बिना किसी सहारे के कड़ी मेहनत करके मेरिट के आधार पर डेंटल कॉलेज में दाखिला पाया था। लेकिन फैकल्टी सदस्यों ने उसकी जाति और रंग-रूप को लेकर उसे प्रताड़ित किया और शैक्षणिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।”

उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मामला चक्कराक्कल पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया।

नितिन की मौत के बाद एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई, जिसे कथित तौर पर उसी का बताया गया। इसमें वह फैकल्टी सदस्यों द्वारा किए गए उत्पीड़न और अपमान का जिक्र करता हुआ सुनाई देता है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप में वह कहता है, “मैंने जितनी हो सकी, उतनी बेइज्जती सहन की। उन्होंने मेरी मां और उनकी सर्जरी का भी मजाक उड़ाया। मेरी आंसर शीट छात्रों के बीच घुमाई गई और मेरी गलतियों को सबके सामने दिखाया गया।”

पुलिस ने पुष्टि की कि राज ने अपने दोस्तों को एक ऑडियो मैसेज भेजा था, जिसमें उसने फैकल्टी पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

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