बॉम्बे हाई कोर्ट ने संग्राम पाटिल मामले में राज्य की सुनवाई टालने की अपील खारिज की, अगली सुनवाई 4 फरवरी को

Written by sabrang india | Published on: January 29, 2026
कोर्ट ने यह देखते हुए सुनवाई टालने से इनकार कर दिया कि लुक आउट सर्कुलर के कारण यात्रा पर प्रतिबंध जारी है और राज्य की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।



बॉम्बे हाई कोर्ट ने संग्राम पाटिल बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा मांगी गई सुनवाई टालने की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए और देरी करना उचित नहीं होगा। सुनवाई टालने का अनुरोध पब्लिक प्रॉसिक्यूटर श्रीमती मनकुंवर देशमुख ने किया था, जिन्होंने अपने परिवार में होने वाली शादी की रस्म का निजी कारण बताते हुए 4 फरवरी को तय सुनवाई को 9 फरवरी तक स्थगित करने की मांग की थी।

जब कोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष जानना चाहा, तो याचिकाकर्ता—यूके में रहने वाले डॉक्टर और यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटिल—की ओर से पेश वकील डॉ. उज्ज्वलकुमार चव्हाण ने इस अनुरोध का कड़ा विरोध किया। वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को भारत में लुक आउट सर्कुलर (LOC) के कारण अवैध रूप से रोका जा रहा है, जो अब भी लागू है, जबकि इसकी वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान 4 फरवरी की तारीख एडवोकेट जनरल श्री साठे की उपलब्धता और सहमति के बाद तय की गई थी, इसके बावजूद राज्य आज तक अपना जवाब दाखिल करने में विफल रहा है।

देरी के गंभीर परिणामों पर ज़ोर देते हुए डॉ. चव्हाण ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एनेस्थेटिक्स में एमडी हैं और यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत हैं। मामले के लंबे समय तक लंबित रहने से उनका पेशेवर करियर और आजीविका खतरे में पड़ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि समय पर सुनवाई के बिना याचिकाकर्ता की यात्रा को रोकना, प्रभावी रूप से कानूनी प्रक्रिया को ही सज़ा में बदल देता है, जो आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है। इन दलीलों के आधार पर उन्होंने कोर्ट से किसी भी और स्थगन को स्वीकार न करने का आग्रह किया।

याचिकाकर्ता की आपत्तियों को स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य की स्थगन याचिका खारिज कर दी और निर्देश दिया कि मामला तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़े।

यह मामला मुंबई के एन.एम. जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में पाटिल के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जो भाजपा के मीडिया सेल प्रमुख निखिल भामरे द्वारा दायर शिकायत पर आधारित है। 18 दिसंबर 2025 को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि पाटिल ने सोशल मीडिया पर “आपत्तिजनक” सामग्री साझा की या फैलाई, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ “गलत सूचना” थी। यह सामग्री कथित तौर पर “शहर विकास अघाड़ी” नामक एक फेसबुक पेज पर होस्ट की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) लगाई है, जो समूहों के बीच दुश्मनी भड़काने के इरादे से गलत जानकारी फैलाने से संबंधित है। यह अपराध गैर-जमानती है।

भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक पाटिल 10 जनवरी को लंदन से मुंबई आए थे। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद 19 जनवरी को इमिग्रेशन अधिकारियों ने लुक आउट सर्कुलर का हवाला देते हुए उन्हें यूके लौटने वाली फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया। अंततः 21 जनवरी को उन्हें पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने की अनुमति दी गई, लेकिन यात्रा प्रतिबंधों के कारण वे अब भी भारत में ही हैं।

22 जनवरी को जस्टिस अश्विन भोबे की अध्यक्षता वाली बॉम्बे हाई कोर्ट ने पाटिल की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें एफआईआर और लुक आउट सर्कुलर—दोनों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

पाटिल ने सीनियर एडवोकेट सुदीप पासबोला के माध्यम से हाई कोर्ट में एफआईआर और लुक आउट सर्कुलर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने अंतरिम राहत की भी प्रार्थना की है और कोर्ट से आग्रह किया है कि अगले आदेश तक जांच पर रोक लगाई जाए तथा अभियोजन पक्ष को किसी भी प्रकार का ज़बरदस्ती वाला कदम उठाने से रोका जाए, जिसमें चार्जशीट दाखिल करना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, पाटिल ने यूनाइटेड किंगडम वापस जाने की अनुमति भी मांगी है, जहां वे कार्यरत हैं।

इस मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित है, और हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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