BJP नेता ने कार्यकर्ताओं को समझाया- पुलवामा हमले के बाद उमड़ी राष्ट्रवाद की लहर, इसे वोट में बदलो

Written by sabrang india | Published on: February 21, 2019
गांधीनगर: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद देशभर में शोक का माहौल है। इसके उलट भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व से लेकर पूरा अमला चुनाव प्रचार में लगा हुआ है। हमले के बाद से सोशल मीडिया पर ट्रोल्स की बाढ़ सी आ गई है। इस हमले को लेकर सरकार पर सवाल उठाने पर ट्रोल्स भद्दी गालियां देने से लेकर राष्ट्रवाद और देशद्रोही का सर्टिफिकेट बांटने में लगे हैं। इस बीच गुजरात से भाजपा नेता का बयान सामने आया है जिसमें वे जवानों की मौत से पैदा हुए जनाक्रोश को वोटों में तब्दील करने की बात कर रहे हैं। 

गुजरात में भाजपा के प्रवक्ता भरत पांड्या ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ जवानों पर हमले के बाद इस वक्त देश में जो राष्ट्रवाद की लहर उठी है, उसे वोटों में परिवर्तित किया जाए। वडोदरा में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान पांड्या ने कार्यकर्ताओं से ये कहा।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, पांड्या ने बीते सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में हमला हुआ। आपने दृश्य देखे होंगे। सभी मतभेदों को एक तरफ रखते हुए, लोग राष्ट्रवाद की भावना को लेकर एकसाथ आए हैं। लोगों ने रैलियों और आंदोलन के माध्यम से देश के लिए अपना प्यार दिखाया है। जब मनमोहन सरकार के दौरान मुंबई में आतंकी हमले हुए थे, तब कैसा माहौल था? संसद में किस तरह के मुद्दे उठाए जा रहे थे?’

उन्होंने आगे कहा, ‘चर्चा इस बारे में थी कि क्या स्थानीय लोगों, जो आतंकवादियों का समर्थन कर रहे थे, की जांच की जा रही थी और उन्हें सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था…लेकिन आज स्थिति बहुत अलग है।’

पंड्या का कहना है कि पुलवामा हमले के मद्देनजर पहले ही कई कार्रवाई की जा चुकी है। देश के नागरिक देर रात तक जागकर देखते हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। आज देश की यह भावना है। पूरा देश राष्ट्रवाद की भावना के साथ एकता में खड़ा हुआ है और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस एकता को एक एकजुट वोट में परिवर्तित करें।

भाजपा प्रवक्ता ने कार्यकर्ताओं को चेताया कि कोई भी ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना है, जिससे पार्टी का नाम बदनाम हो। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाए, जो दवा की तरह काम करें।

 

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