ट्रेन लेट होने पर क्या रेलवे हर मुसाफिर को छह गुना पेनाल्टी देगा ?

Written by Nadim S. Akhter | Published on: June 6, 2018
ट्रेनें लेट चलाने से लेकर रेल में घटिया खान-पान और गंदगी के लिए मशहूर भारतीय रेल अब मुसाफिरों के लिए मुसीबत की एक नई सौगात लाया है. जिनको नहीं पता है, उनको बता दें कि भारतीय रेल में अब तयशुदा वजन से ज्यादा सामान ले जाने पर छह गुना पेनाल्टी देनी होगी यानी आपके सामान के एक्सट्रा वजन का मालभाड़ा किराया अगर 500 रुपये बैठता है तो आपको 3000 हजार रुपये की पेनल्टी देनी होगी. एकदमी पर्ची कटवा के चकाचक.



साथ ही रेलवे ये भी देखेगा कि आपका बक्सा या अटैची उसके बनाए नियम जितने लंबे-चौड़े और ऊंचे (100 cm x 60 cm x 25 cm) हैं कि नहीं. अगर माप में अंतर आया तो फिर उसको अलग से लगेज वैन में बुक कराइए. साथ लेकर अपनी पैसेंजर बॉगी में नहीं चढ़ सकते. मतलब भारतीय रेल को हवाई जहाज से कम मत समझिए अब !!

वैसे नियमों के मुताबिक स्लीपर क्लास में आप 40 किलो और एसी फर्स्ट में 70 किलो तक का सामान ले जा सकते हैं. अब तक होता क्या था कि पब्लिक रेलवे को घर ही समझती थी. एक सीट बुक कराकर 100 किलो का सामान-बोरे लो़ड कर देती थी. आरपीएफ वाले आते थे और अगर टोक देते थे तो ले-देकर मामला सलटा लेते थे. तब रेलवे वाले भी बेपरवाह थे. लेकिन अब रेलवे के अफसर बहुत कड़ाई से इसका पालन कराने में जुट गए हैं. रेल को सुधारना जो है !!

इस खबर को पढ़कर मेरे खून का तापनान दोगुना हो गया. फिर कहता हूं कि अगर राजशाही होती और अगर मैं राजा होता तो जिसने भी इस नियम को कड़ाई से लागू करने की हिमाकत की है, उसका सिर कलम करवा देता. अबे घोंचू !!  टाइम पर ट्रेन तो चला नहीं पाए, घटिया खाना खाकर और बिन पानी के पैसेंजर सफर में suffer कर रहा है, स्लीपर का टॉयलेट इतना गंदा और बदबूदार होता है कि अगर मंत्री जी को वहां दो मिनट खड़ा कर दें तो -खुशबू- से वे बिना एनीसथीसिया के बेहोश हो जाएं, वो भारतीय रेल अब ये देखेगी कि आदमी कितना वजनदार सामान लेकर चल रहा है !! और अगर तुम्हारे घूसखोर महाभ्रष्ट अफसर पब्लिक को पकड़ लेगी तो छह गुना पेनाल्टी चार्ज करेगी. वाह !!

तो फिर ठीक है. तुम छह गुना पेनाल्टी लोगे ना !! दूंगा.  पहले ये बताओ कि अगर तुम मेरी ट्रेन लेट करोगे तो क्या रेलवे हर मुसाफिर को छह गुना पेनाल्टी देगा ??!! चल छह गुना मत देना, चार गुना ही दे देना. ये भी ज्यादा लग रहा है तुमको तो चल दो गुना पेनाल्टी ही हर मुसाफिर को दे देना. दे सकोगे  ??!! और अगर नहीं दिए तो पब्लिक इतने लात मारेगी कि पेनाल्टी का नाम ही भूल जाओगे.

बेशर्मों !! पहले तो मनमर्जी किराया बढ़ा कर उसे आसमान तक पहुंचा दिया. फिर टिकट कैन्सिलेशन में इतना पैसा काटने लगे कि आदमी सोचने लगा कि 150 रुपये के टिकट में जब ये 100 रु कैन्सिलेशन चार्ज काट लेगा और 80 रुपया वहां जाने का पेट्रोल फुंक जाएगा तो साला क्या जाना और क्या टिकट कैंसल कराना. रहने दो, देशहित में रेलवे को दान दिया. इस लेवल पर तुम पब्लिक को लूटने पर आ चुके हो. उसके बाद भी देश की 70 फीसद से ज्यादा ट्रेनें भयंकर लेट चल रही हैं. तो पब्लिक के टाइम की कीमत नहीं हैं ?? सिर्फ तुम्हारे वजन तौलने के नियम हैं कि छह गुना पेनाल्टी वसूल लोगे?? बाप के बाप का राज समझ लिया है ??!!

माई-बाप सरकार को हवाई जहाज के एलीट यात्रियों की बहुत फिक्र है. सो वहां नियम बना दिया कि फ्लाइट लेट होगी तो एयरलाइंस को जुर्माना देना होगा. टिकट कैंसिल करावोगे तो कैेंसिलेशन चार्ज ज्यादा नहीं कटेगा. अबे मूर्खों !! इस देश का आम आदमी रेल से सफर करता है कि हवाई जहाज से ?? अगर इतनी ही पब्लिक की फिक्र है तो ये नियम तुमको भारतीय रेल के लिए बनाना चाहिए था कि खाए-पिए-अघाए हवाई जहाज के चंद एलीट्स के लिए ??!! धिक्कार है तुम्हारी सोच पर.

अब सामान भारी होने पे आपकी जेब कैसे छह गुनी हल्की होगी, उसका विस्तार समझिए. इस रेल में दो तरह के गिद्ध और चील घूमते-बिसरते हैं. एक टीटीई और दूसरा आरपीएफ-जीआरपी. अब इनको महकमे ने ये याद दिलाया है कि छह गुनी पेनाल्टी लेनी है मतलब कि रिश्वत की रकम चार गुनी-तीन गुनी कर दो. अपने हिस्से का रखो और बाकी चढ़ावा ऊपर भेज दो. यानी अगर रेलवे के टीटीई और आरपीएफ ने देशभक्ति से ओतप्रोत होकर आपको रंगे हाथों पकड़ लिया कि बेटा !! स्लीपर में चलते हो और 80 किलो वजनदार बनते हो. तो आपका हलाल होना तय है. वो बोलेंगे कि जुर्माना तो 3000 हजार (मान लीजिए) बनता है. चल पैसे निकाल. देश के साथ धोखा करता है! भारतीय रेल की तौहीन करता है ! देशद्रोही ! तब अपनी सारी गलती मानकर आपकी घिग्घी बंध जाएगी. आप रिरियाएंगे कि माई-बाप !! 3000 हजार तो नहीं हैं, कहां से दें. तब वो कुटिल मुस्कान के साथ आरपीएफ वाला बोलेगा कि ठीक है चल. तुझ पे दया करता हूं. दो हजार निकाल. लेकिन पर्ची नहीं मिलेगी और आगे भी कोई नहीं टोकेगा, इसकी गारंटी देता हूं. गंतब्य स्टेशन के प्लेटफॉर्म से भी सही-सलामत बाहर निकलवा दूंगा, इसका ठेका लेता हूं. बोल- मंजूर है. आप कहेंगे कि दो हजार भी ज्यादा हैं तो वह 1500 रुपये में सौदा तय कर देगा, जो भारतीय रेल के खाते में नहीं, उसकी जेब में जाएगा. और आप धन्य महसूस करेंगे कि आज बच गए. 1500 रुपये आपने बचा लिए. कितने बुद्धिमान हैं आप !! वाह !! और ये ड्रामा रोज ना जाने कितने लाख मासूम रेल यात्रियों के साथ होगा, जिनको ना तो पढ़ना-लिखना आता है और ना नियम-कायदों की जानकारी और समझ है.

मतलब सरकार ने इंस्पेक्टर राज और गुंडाराज को सीधे हरी झंडी दे दी है. अगर रोजाना रेल यात्रियों से जुर्माने के नाम पर 100 करोड़ वसूले जाएंगे तो इसमें से 90 करोड़ रुपये घूस के रूप में रेल के अफसरों तक पहुंचेंगे. बाकी सिर्फ 10 करोड़ रुपये की पर्ची कटेगी, जो भारतीय रेल के खाते में जाएगा और फिर सरकार अगले बजट में सीना चौड़ा करके ये कहेगी कि देखो !! हमने रेल सुधार दिया. इतने करोड़ तो सिर्फ यात्रियों से ज्यादा माल ले जाने का जुर्माना वसूला है. भारतीय रेल की आय भी बढ़ी और अब रेल के डिब्बों में जगह भी बढ़ गई. कोई बड़ा बक्सा-संदूक और ज्यादा सामान लेकर अब नहीं चलता. जबकि स्थिति ये होगी कि हालात जमीन पर पहले से बदतर होंगे. अब रेलयात्री टिकट के साथ घूस की रकम भी कैलकुलेट करके चलेगा कि 50 किलो ज्यादा सामान लेकर चल रहे हैं तो 500 रुपया घूस के पैसे. चलो बोगी में लाद दो. आरपीएफ वाला और टीटीई आएगा तो समझ-बूझ लेंगे. यही होगा ना !!! बोलिए ??!!

बस मुझे एक ही बात का इंतजार है. ज्यादा सामान ले जाने वाले यात्रियों से छह गुना जुर्माना वसूलने का हुक्म सुनाने वाला रेलवे कब ये ऐलान करेगा कि अगर ट्रेन लेट हुई और उसमें साफ-सफाई नहीं हुई तो वह प्रत्येक यात्री को दोगुना मुआवजा देगा. अगर इतना भी नहीं कर पाएगा तो कम से कम टिकट का आधा पैसा तो यात्री को लौटा ही देगा. बोलो बेटा रेलवे !! कर पाओगे ये !!! या सिर्फ कागजी शेर हो और सिर्फ गरीबों पर ही तलवार चलाना आता है तुमको ???!!!

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