राजस्थान: SDM ऑफिस में कवर के लिए गए दलित पत्रकार पर नुकीले हथियार से हमला, जातिसूचक गालियां देने का आरोप

Written by sabrang india | Published on: August 21, 2026
एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है, वहीं आरोपी पक्ष ने भी क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई है।


साभार : द मूकनायक

गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे दलित पत्रकार लक्ष्मीलाल उर्फ लखन सालवी पर बुधवार, 19 अगस्त को कथित तौर पर जातिसूचक गालियां देते हुए नुकीले हथियार से जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों में स्थानीय पत्रकार गोपाल लोढ़ा और उनके भाई कैलाश लोढ़ा शामिल थे। हमले में घायल पत्रकार को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। आरोप है कि इलाज के दौरान भी दोनों ने उन पर दोबारा हमला किया।

मामले में गोगुंदा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत FIR संख्या 0364 दर्ज की गई है।

द मूकनायक ने लखन सालवी से बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। लखन ने बताया कि 19 अगस्त को उन्हें जसवंतगढ़ के नारायण पालीवाल का फोन आया और बताया गया कि जसवंतगढ़ के लोग अपनी समस्या लेकर एसडीएम गोगुंदा को ज्ञापन देने आए हैं। कवरेज के लिए लखन एसडीएम कार्यालय पहुंचे। एसडीएम के चैंबर में ज्ञापन का फोटो और वीडियो लेने के बाद वे नीचे आए। तहसीलदार कार्यालय के सामने ग्रामीणों का बाइट ले रहे थे, तभी कथित पत्रकार गोपाल लोढ़ा उनके कैमरे के सामने अपना मोबाइल लाकर बाधा डालने लगे।

लखन ने आरोप लगाया कि उनके टोकने पर गोपाल ने जातिसूचक गालियां देनी शुरू कर दीं और उनके साथ मारपीट करने लगे। लखन वहां से बचकर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें वहां से हटाकर तहसील कार्यालय के बरामदे में पहुंचाया। हालांकि, आरोप है कि गोपाल वहां भी नहीं रुके और नुकीले हथियार से लखन के सिर और मुंह पर वार किए।

लखन का आरोप है कि हमलावर ने उनके गुप्तांग पर भी हमला करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उसका हाथ पकड़ लिया। इसके अलावा, उनकी आंखों पर भी हमला करने का प्रयास किया गया। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर लखन को हमलावरों से छुड़ाया। हमले में उनके सिर से खून बहने लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, लोग उन्हें सामने स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए। वहां डॉक्टर और स्टाफ इलाज कर रहे थे, तभी पीछे से गोपाल लोढ़ा और उनके भाई कैलाश लोढ़ा पहुंचे और दोबारा हमला कर दिया। दोनों वहां से भाग निकले।

लखन सालवी ने बताया कि पिछले कुछ समय से गोपाल लोढ़ा उनके प्रति कथित तौर पर बेवजह द्वेष रखते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रेस कवरेज के दौरान भी गोपाल ने उनके काम में बाधा डालने की कोशिश की। लखन के मुताबिक, मौके पर मौजूद सभी कैमरामैन इस घटना के गवाह हैं।

लखन ने बताया कि जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया तो गोपाल कथित तौर पर उग्र हो गए और मारपीट करने लगे। उनका आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान भी गोपाल ने उन पर हमला किया।

लखन ने कहा, “गोपाल लोढ़ा आए दिन मुझे जातिगत गालियां देता है। 19 अगस्त को उसने न केवल जातिगत गालियां दीं, बल्कि नुकीले हथियार से जानलेवा हमला भी किया। इसमें कैलाश लोढ़ा ने भी सहयोग किया।”

घटना की शिकायत के बाद 19 अगस्त की शाम गोगुंदा थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके साथ ही पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया।

एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (2015 में संशोधित) की धारा 3(1)(i), 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2) और 3(2)(va) के तहत दर्ज की गई है।

लखन सालवी ने गुरुवार को डिप्टी ऑफिस जाकर अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने बताया कि उनकी रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गोपाल लोढ़ा पक्ष ने क्रॉस एफआईआर भी दर्ज करवाई है।

लखन सालवी लंबे समय से गोगुंदा क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे हैं। उनका आरोप है कि गोपाल लोढ़ा उन्हें नियमित रूप से जातिसूचक गालियां देते रहे हैं। घटना के दौरान मौके पर कई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव कर लखन को बचाया।

दलित पत्रकारों पर हमले और जातिगत हिंसा की घटनाओं के बीच यह मामला भी गंभीर आरोपों से जुड़ा है। मामले में पुलिस से निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की जा रही है। घटना की जांच पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित कर रहे हैं।

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