'क्या हम हिंदू नहीं हैं?': राजस्थान में दलित पुजारी पर एक साल में दो बार कथित हमला, मोहन भागवत से मांगी थी मदद

Written by sabrang india | Published on: July 21, 2026
बलाई ने 'द वायर' को बताया, "मैंने राम मंदिर के लिए 5,100 रुपये दान किए थे, बचपन में मैं RSS की शाखाओं में जाता था और RSS के शताब्दी समारोह के दौरान मेरे परिवार ने स्वयंसेवकों पर फूल बरसाए थे।"



इस साल मई में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के 40 वर्षीय दलित विष्णु बलाई ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने भागवत से मदद मांगी, क्योंकि उनका आरोप था कि दलित-विरोधी लोगों और RSS से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें उनके गांव के एक मंदिर में पुजारी के रूप में काम करने से रोकने की कोशिश की थी।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, बलाई ने भागवत को लिखे पत्र में कहा, "आप पूरे हिंदू समाज और आपसी भाईचारे की बात करते हैं। आप जाति-भेदभाव के खिलाफ हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 'एक कुआं, एक श्मशान, एक मंदिर' का अभियान चला रहा है। फिर भी, संघ के स्वयंसेवकों ने मुझसे—एक दलित पुजारी से—मेरा मंदिर छीन लिया है।"

उन्होंने आगे कहा, "और अब वे मुझे और मेरे परिवार को झूठे मामलों में फंसाना चाहते हैं, हमें जेल भेजना चाहते हैं और यहां तक कि हमारी हत्या भी करना चाहते हैं। आपके स्वयंसेवक ठीक उसके उलट व्यवहार कर रहे हैं, जो आप कहते हैं।"

'तुम नीची जाति के आदमी हो, हम तुम्हें गंदा पेशाब पिलाएंगे'

16 जुलाई को खाखुल देव मंदिर के पास बलाई पर कथित तौर पर दूसरी बार हमला किया गया, जब वह पूजा की तैयारी कर रहे थे।

बलाई की पत्नी सीता देवी की शिकायत पर 16 जुलाई को आसिंद पुलिस थाने में दर्ज FIR में कहा गया है, "...वे हथियार, लोहे की रॉड, लोहे के पाइप और डंडे लेकर आए और अवैध रूप से खाखुल देव मंदिर में घुस गए। उन्होंने मेरे पति से कहा, 'तुम नीची जाति के आदमी हो, हम तुम्हें गंदा पेशाब पिलाएंगे और मंदिर से बाहर फेंक देंगे।'" बलाई का कहना है कि उन्हें पहले आसिंद के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और फिर भीलवाड़ा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उन्हें एक दिन भर्ती रखा गया और 17 जुलाई को छुट्टी दे दी गई।

बलाई ने द वायर से बात करते हुए आरोप लगाया, "मेरे साथ मारपीट की गई और मेरे शरीर तथा कान पर चोटें आईं। यह दूसरी बार था जब मुझ पर हमला हुआ। इससे पहले, पिछले साल 14 अगस्त को भी मुझ पर हमला हुआ था और मैंने FIR दर्ज कराई थी। मेरा परिवार पिछले 400 वर्षों से खाखुल देव मंदिर में पुजारी की जिम्मेदारी निभा रहा है। लेकिन हमारे गांव के कुछ लोग, जिन्हें आसिंद के विधायक जब्बार सिंह सांखला का संरक्षण प्राप्त है और जो RSS से जुड़े हैं, वे मुझे मंदिर के पुजारी के पद से हटाना चाहते हैं।"

16 जुलाई को आसिंद पुलिस थाने में दर्ज FIR में छह आरोपियों के नाम रामप्रसाद वैष्णव, गोविंद वैष्णव, भगवान लाल वैष्णव, रतन लाल वैष्णव, सम्मू जाट और नोरत वैष्णव हैं।

उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) (गैर-कानूनी जमावड़ा), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

'वे दलित को पुजारी के तौर पर नहीं चाहते'

बलाई ने आगे कहा कि इस मामले में यह उनकी दूसरी FIR है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में बलाई द्वारा दर्ज कराई गई FIR के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। बलाई ने द वायर को बताया, "वे नहीं चाहते कि कोई दलित पुजारी बने। मंदिर में भक्तों से काफी चढ़ावा आता है। आरोपियों ने मंदिर के फंड पर कब्जा करने के लिए एक ट्रस्ट बनाने और मुझे पुजारी के पद से हटाने की कोशिश की। मैंने पहले मोहन भागवत से मदद मांगी थी। मैंने राम मंदिर के लिए 5,100 रुपये दान किए थे। मैं बचपन में RSS की शाखाओं में जाता था और RSS के शताब्दी समारोह के दौरान मेरे परिवार ने स्वयंसेवकों पर फूल बरसाए थे। क्या मैं हिंदू नहीं हूं? क्या मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मैं दलित हूं? क्या यही वह हिंदू एकता है, जिसकी बात RSS करता है?"

अधिकारियों ने बताया कि मामला अभी अदालत में है, इसलिए सरकार ने खाखुल देव मंदिर के लिए एक रिसीवर नियुक्त किया है। बलाई की पत्नी द्वारा कथित मारपीट के संबंध में 16 जुलाई को FIR दर्ज कराने के बाद आरोपियों ने भी बलाई के खिलाफ जवाबी FIR दर्ज कराई और आरोप लगाया कि उन्होंने उन पर हमला किया था।

भीलवाड़ा के पुलिस अधीक्षक सागर ने द वायर को बताया, "दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है और जांच जारी है। हम CCTV फुटेज की भी जांच कर रहे हैं। आगे की जांच के बाद ही गिरफ्तारी पर कोई फैसला लिया जाएगा।"

एक्टिविस्टों ने इस घटना को लेकर राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की आलोचना की है।

एक्टिविस्ट भंवर मेघवंशी ने कहा, "अगर मामला अदालत में है और सरकार ने मंदिर के लिए रिसीवर नियुक्त किया है, तो कोई भीड़ कैसे दखल दे सकती है और एक दलित व्यक्ति पर हमला कर सकती है? ग्रामीणों को क्या अधिकार है कि वे एक दलित पुजारी पर हमला करें? हम उन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं, जिनके नाम बलाई की पत्नी द्वारा दर्ज FIR में हैं। साथ ही, आरोपियों द्वारा दर्ज कराई गई जवाबी FIR को भी रद्द किया जाना चाहिए। यह एक दलित व्यक्ति को मंदिर में पुजारी बनने से रोकने की कोशिश है।"

BJP विधायक ने आरोपों से किया इनकार

संपर्क करने पर आसिंद से BJP विधायक जब्बार सिंह सांखला ने बलाई द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया।

सांखला ने कहा, "बाराना गांव में लगभग 90% लोग RSS समर्थक हैं। बलाई का परिवार पारंपरिक रूप से खाखुल देव जी मंदिर का पुजारी रहा है। कुछ पढ़े-लिखे ग्रामीणों को लगा कि यह इतना लोकप्रिय मंदिर है, जहां हजारों क्विंटल अनाज चढ़ाया जाता है और चढ़ावे से लाखों रुपये आते हैं, लेकिन वहां कोई विकास नहीं हुआ है। यहां तक कि महिलाओं के लिए शौचालय भी नहीं बने हैं। उन्होंने बलाई से खुले में शौच रोकने और सफाई सुनिश्चित करने के लिए शौचालय बनाने को कहा, जो इस विवाद का कारण बना।"

सांखला ने आगे कहा कि ग्रामीणों ने एक समिति बनाई और तय किया कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान चढ़ावे के रूप में मिलने वाला पैसा और अनाज पुजारी का होगा, लेकिन एक अलग दानपात्र (चढ़ावा पेटी) रखा गया, जिसका पैसा मंदिर के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "जब बलाई ने नया दानपात्र लगाने या उसकी चाबी ग्रामीणों को देने से इनकार कर दिया, तो विवाद बढ़ गया। मुझ पर लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं और यह कहना बिल्कुल गलत है कि बलाई को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह पुजारी हैं। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। पुजारियों की कोई जाति नहीं होती। कानून को अपना काम करना चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए।"

'मंदिर हमें दलितों को वापस सौंप दें'

मई में भागवत को लिखे अपने पत्र में बलाई ने कहा था कि राज्य सरकार ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया और RSS प्रमुख से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गांव में RSS कार्यकर्ताओं ने दलितों के खिलाफ एक महापंचायत बुलाई थी।

बलाई ने भागवत को लिखे पत्र में कहा, "मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि 'सकल हिंदू समाज' के नाम पर मुझे डराना-धमकाना बंद करवाया जाए और स्वयंसेवकों को मुझसे, यानी एक दलित पुजारी से, मंदिर छीनने से रोका जाए। साथ ही, आप राजस्थान की BJP सरकार से कहें कि वह रिसीवर को हटाकर मंदिर हमें दलितों को वापस सौंप दे और आरोपी स्वयंसेवकों के खिलाफ पुलिस एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि हम भी सम्मान के साथ हिंदुओं की तरह जी सकें।"

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