ओडिशा में दलित व्यक्ति को 3 दिन तक कमरे में बंद रखा, डंडे से पीटा और खाना नहीं दिया

Written by sabrang india | Published on: July 14, 2026
ओडिशा के गंजाम जिले में एक दलित व्यक्ति ने आरोप लगाया कि गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने से इनकार करने पर उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया, डंडों से पीटा गया और लगभग तीन दिनों तक खाना-पानी नहीं दिया गया। उसने आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और न्याय की मांग की।


फोटो साभार : इंडिया टुडे 

ओडिशा के गंजाम जिले में एक दलित व्यक्ति को कथित तौर पर कुछ लोगों ने गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया। जब उसने इससे इनकार किया, तो उसे बार-बार डंडों से पीटा गया, लगभग तीन दिनों तक एक बंद कमरे में कैद रखा गया और खाना-पानी भी नहीं दिया गया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को इस घटना का एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति बंद कमरे में दलित युवक को बार-बार डंडे से पीटता हुआ दिखाई दे रहा है। दलित व्यक्ति के हमलावर से रुकने की गुहार लगाने के बावजूद पिटाई जारी रहती है, जबकि कमरे में कुछ अन्य लोग भी मौजूद दिखाई देते हैं। हालांकि, इंडिया टुडे टीवी ने स्पष्ट किया है कि वह इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।

पीड़ित की शिकायत के अनुसार, उसे लगभग तीन दिनों तक गैर-कानूनी तरीके से बंदी बनाकर रखा गया और प्रताड़ित किया गया। उसने आरोप लगाया कि उस पर गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने का दबाव डाला गया और मना करने पर उसे निशाना बनाया गया।

वीडियो में कमरे के अंदर चार लोग दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से एक व्यक्ति गुहार लगा रहे दलित युवक को लगातार डंडे से पीट रहा है।

वायरल वीडियो के साथ-साथ पीड़ित ने इस घटना के संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत भी दी है। शिकायत में उसने दावा किया कि उसकी जान को खतरा है और उसने सुरक्षा तथा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उसने बताया कि उसने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, ओडिशा के पुलिस महानिदेशक और गंजाम जिला प्रशासन को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

ज्ञात हो कि दलितों के साथ भेदभाव और अत्याचार की यह कोई अकेली घटना नहीं है। बीते सप्ताह ही ओडिशा के बरगढ़ जिले में एक आंगनवाड़ी केंद्र को कथित तौर पर तब बंद कर दिया गया था, जब ग्रामीणों ने दलित कर्मचारी के बनाए भोजन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाति-आधारित भेदभाव के इस मामले की जांच की मांग उठी।

राज्य में जाति-आधारित भेदभाव के कई आरोप हाल के दिनों में सामने आए हैं। इस बार मामला बरगढ़ जिले का था, जबकि बोलांगीर में भी ऐसा ही एक विवाद राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ था।

ओडिशा टीवी (OTV) के अनुसार, यह घटना झारबंध ब्लॉक के दीवानपाली आंगनवाड़ी केंद्र की है, जहां ग्रामीणों ने कथित तौर पर दलित रसोइए के बनाए भोजन को लेने से इनकार कर दिया और केंद्र पर ताला लगा दिया।

शिकायत के अनुसार, दलित समुदाय की महिला पद्मिनी जगत को लगभग दो महीने पहले आंगनवाड़ी में रसोइया नियुक्त किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीण माता-पिता से कह रहे हैं कि वे अपने बच्चों को केंद्र न भेजें और न ही उनके बनाए भोजन, अंडे और पोषण सप्लीमेंट का सेवन करें, क्योंकि वह दलित हैं।

पद्मिनी ने यह भी दावा किया कि उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा था और उनके पिता अबाधुता जगत पर भी ऐसा ही दबाव डाला गया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बुधवार को ग्रामीणों के एक समूह ने आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा दिया, जिससे उसका कामकाज बाधित हो गया। नतीजतन, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं केंद्र से मिलने वाले अतिरिक्त पोषण और अन्य आवश्यक सेवाओं से वंचित रह गईं।

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