पॉक्सो मामले में केंद्रीय मंत्री बी. संजय कुमार के बेटे को तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार किया

Written by sabrang india | Published on: May 18, 2026
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे साई भागीरथ को तेलंगाना पुलिस ने शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। साई भागीरथ के खिलाफ 17 वर्षीय लड़की के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।



फोटो साभार : द वायर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी साई भागीरथ को शनिवार, 16 मई की शाम हैदराबाद पुलिस ने हिरासत में लिया।

यह मामला अब हाई-प्रोफाइल बन गया है, क्योंकि भागीरथ पर ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम’ (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ज्ञात हो कि इससे पहले शुक्रवार, 15 मई को तेलंगाना हाईकोर्ट ने भागीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री कुमार ने इसके तुरंत बाद एक बयान जारी कर दावा किया कि उनके बेटे ने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में “आत्मसमर्पण” कर दिया है, जहां यह मामला दर्ज किया गया था।

अपने बयान की शुरुआत “सत्यमेव जयते” शब्दों से करते हुए उन्होंने कहा, “कानून के प्रति सम्मान दिखाते हुए और मामले में और देरी से बचने के लिए मैंने अपने बेटे को जांच का सामना करने के लिए भेजा है। मैंने ऐसा तब किया, जब इस बात की पूरी संभावना थी कि अदालत सोमवार (18 मई) को (भागीरथ की) जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुना देगी।”

हालांकि, मंत्री के दावे के उलट साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर एम. रमेश रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि भागीरथ को नारसिंगी स्थित स्टेट पुलिस अकादमी के पास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के आवास पर ले जाते समय पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

वहीं, केंद्रीय मंत्री कुमार ने अपने बयान में आगे कहा कि उन्होंने अपना वादा निभाया है और अपने बेटे के मामले में भी कानून के सामने किसी आम नागरिक की तरह ही व्यवहार किया है।

कुमार ने कहा, “हम सभी को कानून का पालन करना चाहिए। मेरा बेटा लगातार मुझसे कह रहा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है। दरअसल, जैसे ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई, मैं उसे तुरंत पुलिस के सामने पेश करना चाहता था। हमने वकीलों से सलाह ली और उनके सामने सभी सबूत रखे। सबूतों की जांच के बाद वकीलों ने कहा कि यह मामला कानूनी जांच में ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगा और मेरे बेटे को जमानत मिल सकती है। इसी कारण प्रक्रिया में कुछ देरी हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “आज भी वकीलों का मानना था कि उसे जमानत मिल जाएगी, लेकिन मुझे लगा कि जांच में और देरी करना उचित नहीं होगा। इसलिए मैं अपने बेटे को लेकर आया और वकीलों की मौजूदगी में उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मुझे कानून पर पूरा विश्वास है।”

ज्ञात हो कि गुरुवार (14 मई) को करीमनगर में भागीरथ के चाचा डॉ. वामशीचंद को नोटिस मिलने के बाद, शनिवार को भागीरथ ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की पेशकश की थी। पुलिस ने उन्हें शुक्रवार दोपहर 2 बजे पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, खबरों के अनुसार, उन्होंने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन को ईमेल और पत्र भेजकर मामले से जुड़े सबूत जुटाने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय मांगा था।

हालांकि, पुलिस ने न तो ईमेल मिलने की बात मानी और न ही चिट्ठी मिलने की।

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy की तीखी टिप्पणियों के बाद सामने आया। उन्होंने शुक्रवार को एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री कुमार पर निशाना साधा था।

उन्होंने कहा था कि मंत्री का अपने बेटे को छिपाना नैतिक रूप से गलत है। रेड्डी ने कहा था कि जब भागीरथ पर आपराधिक आरोप लगे, तो उसका भाग जाना सही नहीं था।

सीएम रेड्डी के अनुसार, “अगर संजय अपने बेटे को बचाना जारी रखते हैं, तो वे कानून की गलत तरफ हैं। अपने पद की गरिमा बढ़ाने के लिए आप उन्हें तुरंत सरेंडर करवाएं। अगर वह जांच का सामना करता है, तो लोग आपकी सराहना करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने चेतावनी भी दी थी कि अगर देरी हुई, तो पुलिस अपने तरीके से कार्रवाई करेगी। रेड्डी ने पीड़ित लड़की के साथ खड़े रहने का भी वादा किया था।

सरकार पर कार्रवाई न करने के आरोपों का खंडन करते हुए रेड्डी ने पलटवार में कहा कि क्या बेटे की कथित गलती के लिए सरकार को उसके पिता को गिरफ्तार कर लेना चाहिए था? उन्होंने कहा कि यह मामला बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को बेहद सावधानी और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने पड़े।

मामले की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए रेड्डी ने कहा कि इसकी शुरुआत पिछले वर्ष 31 दिसंबर से पहले हुई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस को लड़की की उम्र से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जुटाने पड़े, क्योंकि ऐसे दावे सामने आए थे कि लड़की बालिग है और उसके पास दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र मौजूद हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, जिस अस्पताल में लड़की की मां भर्ती थीं, वहां से जन्म संबंधी रिकॉर्ड हासिल करने में करीब 24 घंटे लगे। इसके अलावा, आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की गई।

सीएम रेड्डी ने किसी के भी खिलाफ बदले की भावना से काम करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “क्या मैं केसीआर (पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव) से बदला ले रहा हूं, जिन्होंने मुझे जेल में डाला था?”

सीएम रेड्डी ने यह भी बताया कि पीड़ित लड़की की मां से शिकायत 8 मई को मिली थी। पुलिस ने उसी दिन लड़की का बयान दर्ज कर लिया था, लेकिन FIR अगले दिन दर्ज की गई। इसमें कहीं भी कोई देरी नहीं हुई।

हालांकि, इससे दो घंटे पहले भागीरथ ने करीमनगर में पीड़ित परिवार पर “हनी ट्रैप” का आरोप लगाते हुए एक अलग शिकायत दर्ज कराई थी। ये दोनों मामले प्रधानमंत्री Narendra Modi के BJP की रैली के लिए हैदराबाद पहुंचने से पहले ही दर्ज कर लिए गए थे।

रेड्डी ने कहा, “लेकिन जैसे ही पुलिस स्टेशन में लड़की का बयान दर्ज हुआ, भागीरथ वहां से फरार हो गया। अगर पुलिस बिना बयान दर्ज किए सीधे संजय के घर पहुंचती, तो हम पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया जाता। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद पुलिस ने भागीरथ को विधिवत नोटिस भेजा, लेकिन वह पेश नहीं हुआ।”

पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की सुरक्षा के लिए करीब 9,000 वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि पूरी पुलिस व्यवस्था प्रधानमंत्री के दौरे की सुरक्षा व्यवस्था में लगी हुई थी, क्योंकि हैदराबाद को देश में आतंकवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील शहर माना जाता है।

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा समाप्त होने के बाद सोमवार को हमने इस मामले पर विशेष ध्यान देना शुरू किया और जांच के लिए एक महिला IPS अधिकारी को नियुक्त किया। भागीरथ का पता लगाने के लिए पांच विशेष टीमें गठित की गईं। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए कि वह देश छोड़कर भाग न सके।”

शनिवार को पुलिस ने केंद्रीय मंत्री कुमार के बंजारा हिल्स और करीमनगर स्थित आवासों पर तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान मंत्री की मां को सीने में दर्द की शिकायत के बाद हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें स्टेंट लगाने की आवश्यकता बताई।

इसी बीच, हैदराबाद की एक सिविल कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री कुमार की ओर से दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 न्यूज़ चैनलों और मीडिया प्लेटफॉर्मों के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि ये चैनल उनके खिलाफ सुनियोजित बदनामी अभियान चला रहे हैं। अदालत ने ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टीवी चैनलों, वेबसाइटों और अन्य मीडिया माध्यमों को निर्देश दिया कि वे मंत्री से संबंधित सभी कथित मानहानिकारक वीडियो, क्लिप, इंटरव्यू, प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग, बयान, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सामग्री को तत्काल हटाएं।

मंत्री के कार्यालय से जारी एक बयान में चेतावनी दी गई कि यह एक “जॉन डो आदेश” (John Doe Order) है, जो फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, व्हॉट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लागू होता है। इन प्लेटफॉर्मों को शनिवार को हैदराबाद के सिटी सिविल कोर्ट में वेकेशन सिविल जज-सह-XXVI अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दायर मानहानि याचिका (OS No. 208/2026) में विशेष रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया था।

इस “गैग ऑर्डर” में शामिल 23 पक्षों में गूगल, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक., एक्स कॉर्प और लोकप्रिय तेलुगू समाचार चैनल शामिल थे।

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