चुनावी चक्र की जांच से दूर, गुजरात की मतदाता सूची से 92.4 लाख वोटर हटाए गए

Written by sabrang india | Published on: February 25, 2026
गुजरात का इलेक्टर रिकॉर्डेड परसेंटेज (ERP) — एक ऐसा मेट्रिक जिसका उपयोग चुनाव विश्लेषक (प्सेफोलॉजिस्ट) मतदाता सूची की वास्तविकता परखने के लिए करते हैं — वर्ष 2024 में 96.7% से गिरकर 2026 में 82.6% हो गया है।


साभार : स्क्रॉल

2026 के लिए गुजरात की अंतिम मतदाता सूची का विश्लेषण गंभीर जनसांख्यिकीय कमी की ओर संकेत करता है। पिछले दस वर्षों में राज्य की वयस्क आबादी बढ़ी है, लेकिन पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 92.4 लाख योग्य वयस्क — जो संभावित मतदान आधार का 17.5% हैं — वर्तमान मतदाता सूची से गायब हैं। जहां अन्य राज्यों में चुनावी गतिविधियों के दौरान मतदाता सूची की गहन जांच होती है, वहीं गुजरात में फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया सक्रिय चुनावी चक्र की उच्च-स्तरीय जांच से दूर हुई है।

मतदाता सूची की सटीकता और व्यापकता का आकलन करने के लिए चुनाव विश्लेषक इलेक्टर रिकॉर्डेड परसेंटेज (ERP) का उपयोग करते हैं। यह सूचकांक पंजीकृत मतदाताओं की संख्या की तुलना 18 वर्ष से अधिक आयु की अनुमानित आबादी से करता है, जिससे यह पता चलता है कि कितने योग्य नागरिक मतदाता सूची में शामिल हैं। टेक्निकल ग्रुप ऑन पॉपुलेशन प्रोजेक्शन (TGPP) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में गुजरात की अनुमानित कुल आबादी 7,40,86,000 है।

18 वर्ष से कम आयु की अयोग्य आबादी (0–4, 5–9, 10–14 आयु वर्ग और 15–19 आयु वर्ग के 60% लोगों को मिलाकर) 2,08,11,000 आंकी गई है। इसे घटाने के बाद कुल योग्य मतदान आबादी 5,32,75,000 (लगभग 5.33 करोड़) बनती है। जबकि फरवरी 2026 तक निर्वाचन आयोग की अंतिम सूची में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 4,40,30,725 (4.40 करोड़) है।

इस आधार पर ERP 82.6% बैठता है। जानकारी के अनुसार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सेवानिवृत्त महानिदेशक एन.के. शर्मा और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि 2024 तक गुजरात का ERP 96.7% था। मौजूदा आंकड़ा मतदाता कवरेज में ऐसी गिरावट दर्शाता है, जो किसी बड़े भारतीय राज्य में पहले दर्ज नहीं हुई।

गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 2026 के ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच 5.60 लाख मतदाताओं के “नेट एडिशन” पर जोर दिया है — जिसमें 3.95 लाख हटाए गए नामों के मुकाबले 9.56 लाख नए नाम जोड़े जाने का दावा है। हालांकि, कार्यकर्ताओं का तर्क है कि यह “अंतिम चरण” का डेटा कुछ महीने पहले हुई कथित बड़े पैमाने की छंटनी को छिपाता है।

माहिती अधिकार गुजरात पहल (MAGP) की समन्वयक पंक्ति जोग के अनुसार, जनवरी 2025 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 5,03,15,260 थी, जो फरवरी 2026 तक घटकर 4,40,30,725 रह गई — यानी कुल 62,84,535 (62.8 लाख) की कमी।

2025 की शुरुआत की स्थिर सूची और 2026 के ड्राफ्ट प्रकाशन के बीच 68 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। CEO की रिपोर्ट में उल्लिखित 3.95 लाख नामों की कटौती, कथित रूप से पहले हुई बड़े पैमाने की “प्री-ड्राफ्ट” छंटनी का अंतिम समायोजन भर है।

इन 62.8 लाख “गायब” मतदाताओं को मुख्यतः “शिफ्टेड, डेड या एब्सेंट” (SDA) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि 2026 के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में पूर्ववर्ती चक्रों की तुलना में आवश्यक सुरक्षा उपायों का अभाव था।

पंक्ति जोग ने “ओरिजिन-टू-डेस्टिनेशन” मैपिंग की अनुपस्थिति पर चिंता जताते हुए पूछा: “क्या निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित किया कि ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ बताए गए लोग वास्तव में अयोग्य थे? 2026 के SIR में हमें ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता। 2002 के SIR में स्थानांतरण की स्थिति में मतदाताओं को मूल स्थान से नए स्थान तक मैप करने का प्रावधान था।” इस प्रक्रिया के अभाव में, यदि कोई मतदाता घर पर अनुपस्थित मिलता है, तो उसका नाम काट दिया जाता है और यह सत्यापित करने की कोई गारंटी नहीं होती कि वह नए स्थान पर पंजीकृत है।

चिंता को और बढ़ाने वाली रिपोर्टें लक्षित नाम हटाने के आरोपों से जुड़ी हैं। द वायर की पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, सूरत के सलाबतपुरा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं ने औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि स्थानीय भाजपा पार्षद विक्रम पोपट पाटिल ने जीवित मतदाताओं को “मृत” दर्शाने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया।

69 वर्षीय अब्दुल रज्जाक वजीर शाह जैसे शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दिसंबर 2025 की ड्राफ्ट सूची में उनके नाम शामिल किए गए, ताकि बाद में उन्हें “मृत” दर्शाकर हटाने के लिए आवेदन दाखिल किए जा सकें। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मतदाताओं में सबसे अधिक कमी शहरी जिलों में दर्ज की गई — सूरत (25.7%), अहमदाबाद (23.2%), वडोदरा (18.7%), भरूच (16.4%) और वलसाड (16.3%)।

जिलेवार आंकड़े दर्शाते हैं कि “SDA” के तहत हटाए गए नाम शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक थे, जहां स्वाभाविक रूप से जनसंख्या वृद्धि अपेक्षित थी। सूरत में केवल 0.44% का नेट एडिशन दर्ज हुआ (36 लाख के आधार पर 15,844 मतदाता)। अहमदाबाद में 2.20% का नेट बदलाव हुआ। सुरेंद्रनगर में -99 का नेट एडिशन दर्ज किया गया — यानी एक वर्ष की प्राकृतिक वृद्धि से अधिक नाम हटाए गए। पाटन और भरूच में भी वृद्धि दर क्रमशः 0.70% और 0.67% रही, जो लगभग ठहराव दर्शाती है।

आंकड़े संकेत देते हैं कि गुजरात की मतदाता सूची 2024 में संभावित अधिक पंजीकरण (ओवर-इन्फ्लेशन) की स्थिति से 2026 में गंभीर अंडर-कवरेज की स्थिति में पहुंच गई है। जहां SIR प्रक्रिया का उद्देश्य “फर्जी” नाम हटाना था, वहीं 82.6% ERP यह दर्शाता है कि लगभग 17.5% वयस्क आबादी सूची से बाहर रह गई है। ऐसे राज्य में, जहां फिलहाल चुनाव नहीं हो रहे हैं, लगभग 93 लाख मतदाताओं का इस प्रकार चुपचाप “गायब” होना भविष्य के जनादेश की प्रतिनिधित्व क्षमता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

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