इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी के आदेश का अनुपालन न किए जाने पर बरेली के डीएम और एसएसपी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने जनवरी में स्पष्ट कर दिया था कि निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

Photo Credit: Getty Images
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार, 17 अक्टूबर को बरेली के डीएम और एसएसपी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जनवरी में दिए गए उसके आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति लेना आवश्यक नहीं है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश अदालत ने तारिक खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में रमजान महीने के मद्देनज़र अपने निजी परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति मांगी गई थी।
कोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर कि इस प्रकार की याचिका दाखिल करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, याचिकाकर्ता ने बताया कि पिछले महीने पुलिस ने उसी परिसर में कथित रूप से नमाज पढ़ने के आरोप में 12 व्यक्तियों को हिरासत में लिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा निजी परिसर में नमाज की अनुमति से जुड़े आवेदन को खारिज करने के निर्णय को चुनौती दी है।
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी किया जाए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस एस.ए. सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने कहा, “राज्य के अधिवक्ता से अनुरोध है कि वे इस मामले में निर्देश प्राप्त करें… अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रहेगी।”
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित है।
27 जनवरी को दिए गए अपने आदेश में हाईकोर्ट उस याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें निजी संपत्ति के अंदर धार्मिक सभा आयोजित करने की अनुमति की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें अनुमति प्रदान नहीं की गई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता को अपने निजी परिसर में सुविधानुसार प्रार्थना सभा आयोजित करने का पूरा अधिकार है और इसके लिए राज्य सरकार से किसी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि यह सभा सार्वजनिक सड़क या सार्वजनिक संपत्ति तक विस्तृत होती है, तो ऐसी स्थिति में पुलिस को सूचित करना और विधि के अनुसार आवश्यक अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे किस प्रकार उपलब्ध कराया जाए, यह राज्य के विवेक पर निर्भर करेगा। साथ ही अदालत ने कहा, “राज्य का यह कर्तव्य है कि वह हर परिस्थिति में याचिकाकर्ता की संपत्ति, अधिकारों और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह व्यवस्था किस तरीके से की जाए, इसका निर्णय पूरी तरह पुलिस के विवेक पर होगा।”
मालूम हो कि जनवरी में बरेली पुलिस ने जानकारी दी थी कि मोहम्मदगंज गांव स्थित एक निजी परिसर में कुछ लोग सामूहिक नमाज अदा कर रहे थे, जिसके बाद 12 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। अधिवक्ता गौतम के अनुसार, उन लोगों के खिलाफ शांति भंग की आशंका के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई थी।
हालांकि, मकान मालकिन ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उनका घर खाली पड़ा था और उन्होंने स्वयं स्थानीय लोगों को अपने घर में नमाज अदा करने की अनुमति दी थी।
Related

Photo Credit: Getty Images
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार, 17 अक्टूबर को बरेली के डीएम और एसएसपी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जनवरी में दिए गए उसके आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति लेना आवश्यक नहीं है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश अदालत ने तारिक खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में रमजान महीने के मद्देनज़र अपने निजी परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति मांगी गई थी।
कोर्ट द्वारा यह पूछे जाने पर कि इस प्रकार की याचिका दाखिल करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, याचिकाकर्ता ने बताया कि पिछले महीने पुलिस ने उसी परिसर में कथित रूप से नमाज पढ़ने के आरोप में 12 व्यक्तियों को हिरासत में लिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा निजी परिसर में नमाज की अनुमति से जुड़े आवेदन को खारिज करने के निर्णय को चुनौती दी है।
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी किया जाए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस एस.ए. सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने कहा, “राज्य के अधिवक्ता से अनुरोध है कि वे इस मामले में निर्देश प्राप्त करें… अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रहेगी।”
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित है।
27 जनवरी को दिए गए अपने आदेश में हाईकोर्ट उस याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें निजी संपत्ति के अंदर धार्मिक सभा आयोजित करने की अनुमति की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें अनुमति प्रदान नहीं की गई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता को अपने निजी परिसर में सुविधानुसार प्रार्थना सभा आयोजित करने का पूरा अधिकार है और इसके लिए राज्य सरकार से किसी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि यह सभा सार्वजनिक सड़क या सार्वजनिक संपत्ति तक विस्तृत होती है, तो ऐसी स्थिति में पुलिस को सूचित करना और विधि के अनुसार आवश्यक अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पड़ती है, तो उसे किस प्रकार उपलब्ध कराया जाए, यह राज्य के विवेक पर निर्भर करेगा। साथ ही अदालत ने कहा, “राज्य का यह कर्तव्य है कि वह हर परिस्थिति में याचिकाकर्ता की संपत्ति, अधिकारों और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह व्यवस्था किस तरीके से की जाए, इसका निर्णय पूरी तरह पुलिस के विवेक पर होगा।”
मालूम हो कि जनवरी में बरेली पुलिस ने जानकारी दी थी कि मोहम्मदगंज गांव स्थित एक निजी परिसर में कुछ लोग सामूहिक नमाज अदा कर रहे थे, जिसके बाद 12 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। अधिवक्ता गौतम के अनुसार, उन लोगों के खिलाफ शांति भंग की आशंका के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई थी।
हालांकि, मकान मालकिन ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उनका घर खाली पड़ा था और उन्होंने स्वयं स्थानीय लोगों को अपने घर में नमाज अदा करने की अनुमति दी थी।
Related
भाईचारे की मिसाल : मुस्लिम युवक इमरान ने मंदिर के लिए दी जमीन
6 राज्यों में 12 बंगाली प्रवासी मजदूरों की हत्या, अपराध सूची में महाराष्ट्र सबसे ऊपर