मध्यप्रदेश : बालाघाट के आदिवासी वन क्षेत्रों में बॉक्साइट खनन का विरोध, जनसुनवाई से पहले संगठन एकजुट

Written by sabrang india | Published on: February 16, 2026
60 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित खनन से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। लोगों ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है और अदालत तक जाने की चेतावनी दी है।


साभार : द मूकनायक

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल वन क्षेत्रों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज हो रहा है। शनिवार को एसटी-एससी और ओबीसी क्रांति मोर्चा के प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों और वनवासियों से जंगल, जलस्रोतों और पर्यावरण की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते विरोध दर्ज नहीं कराया गया, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। आंदोलनकारियों के अनुसार, यह केवल खनन का मुद्दा नहीं है, बल्कि अस्तित्व, आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ा सवाल है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, विवाद लौंगुर और पचामा दादर के बीच लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन अनुमति से संबंधित है। प्रशासन ने इस विषय पर 18 फरवरी को जनसुनवाई निर्धारित की है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में खनन अनुमति के खिलाफ दर्ज कराई गई आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी कारण ग्रामीणों में असंतोष और अविश्वास बढ़ रहा है। उनका कहना है कि जनसुनवाई अक्सर महज औपचारिकता बनकर रह जाती है और वास्तविक जनमत की अनदेखी की जाती है।

विरोध में चक्काजाम कर प्रदर्शन

इससे पहले 12 फरवरी को आदिवासी समुदायों ने प्रस्तावित खनन ब्लॉक आवंटन के विरोध में चक्काजाम किया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। आंदोलन के दो दिन बाद मोर्चा ने फिर से लोगों से आगे आकर विरोध दर्ज कराने की अपील की। उनका कहना है कि यदि अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो जंगलों का बड़ा हिस्सा उद्योगों को सौंप दिया जाएगा।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह इलाका जैव विविधता, वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां खनन शुरू होने का प्रभाव केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जलस्रोतों, मिट्टी की गुणवत्ता और वन्यजीवों पर भी व्यापक असर पड़ेगा।

मोर्चा के प्रतिनिधि महेश सहारे ने आरोप लगाया कि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्यावरणीय नियमों और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। उनका कहना है कि यदि खनन को मंजूरी मिलती है, तो छत्तीसगढ़ और झारखंड की तरह यहां भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो सकती है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि सैकड़ों एकड़ जंगल नष्ट होने से आदिवासी समुदायों की आजीविका, जलस्रोतों और वनाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

महेश सहारे ने स्पष्ट किया कि संगठन इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। उनके अनुसार, यह संघर्ष केवल एक खनन परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों, वनाधिकार कानून और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों की रक्षा की लड़ाई है।

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन आदिवासी क्षेत्रों में असंतुलन पैदा कर रहा है। उनका कहना है कि खनन जैसी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले व्यापक पर्यावरणीय अध्ययन, ग्रामसभा की वास्तविक सहमति और प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक आजीविका के ठोस प्रबंध सुनिश्चित किए जाने चाहिए। फिलहाल, जनसुनवाई से पहले ही क्षेत्र में विरोध स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य स्तर पर व्यापक बहस का रूप ले सकता है।

बॉक्साइट के बारे में

बॉक्साइट एक प्रमुख खनिज अयस्क है, जिससे एल्युमिनियम धातु का उत्पादन किया जाता है। यह सामान्यतः लाल-भूरे रंग की मिट्टी जैसी चट्टान होती है, जिसमें मुख्य रूप से एल्यूमिना (एल्युमिनियम ऑक्साइड), लौह ऑक्साइड, सिलिका और अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं।

यह खनिज प्रायः उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह के निकट बनता है। इसी कारण भारत के कई वन और पहाड़ी इलाकों में इसके भंडार पाए जाते हैं।

उद्योगों में बॉक्साइट का उपयोग एल्युमिनियम उत्पादन के अलावा सीमेंट, रसायन और रिफ्रैक्टरी (ऊष्मा-प्रतिरोधी) सामग्री बनाने में भी किया जाता है। हालांकि, इसके खनन से वनों की कटाई, जलस्रोतों पर दबाव और स्थानीय पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

Related

ओडिशा में भीड़ द्वारा बुज़ुर्ग मुस्लिम के साथ मारपीट, ‘गो माता की जय’ बोलने को मजबूर किया गया

ओडिशा में दलित कुक की नियुक्ति को लेकर ग्रामीणों ने आंगनवाड़ी का बहिष्कार किया

बाकी ख़बरें