‘खून से तिलक करो, गोलियों से आरती’: डोडा में छात्रों को ‘कट्टरवादी शिक्षा’ देने के आरोप में शिक्षक निलंबित 

Written by sabrang india | Published on: November 8, 2025
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में डोडा ज़िले का एक सरकारी शिक्षक सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को ‘खून से तिलक करो, गोलियों से आरती करो’ का नारा लगवाते हुए सुना जा सकता है। शिक्षक को बाद में निलंबित कर दिया गया है। 


प्रतीकात्मक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार (6 नवंबर) को एक सरकारी शिक्षक को स्कूल के बच्चों को कथित रूप से कट्टरवादी विचारधारा सिखाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। 

यह कार्रवाई स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजा शकील की शिकायत के बाद की गई। उन्होंने डोडा के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को बताया था कि सरकारी मिड्ल स्कूल (जीएमएस) सिचल में छात्रों को कथित रूप से ‘कट्टरवादी और हिंसक’ विचार सिखाए जा रहे हैं। 

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, शकील द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में आरोपी शिक्षक, जिनकी पहचान चंदर कुमार के रूप में हुई है, नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में छात्रों का स्वागत करते हुए स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा को अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कुमार को इस 20 सेकेंड के वीडियो में कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘आज 6 नवंबर है और सरकारी मिड्ल स्कूल सिचल में नई कक्षाएं शुरू हो गई हैं। बच्चे स्कूल लौट आए हैं और सुबह की प्रार्थना सभा चल रही है। मैं छात्रों का स्वागत करता हूं। जय हिंद, जय भारत।’

वीडियो में दिखाई देता है कि स्कूल के लॉन में तीन दर्जन से अधिक छोटे बच्चे-लड़के और लड़कियां-सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान कतार में खड़े होकर एक विवादास्पद गीत गा रहे हैं। कुमार द्वारा स्वयं रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में बच्चों को ‘खून से तिलक करो, गोलियों से आरती करो’ जैसे नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। 

वीडियो को लेकर लोगों में नाराजगी

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई। डोडा के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) से शिकायत की गई कि शिक्षक छात्रों को ‘उग्रवादी और हिंसक विचारधारा’ सिखा रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। 

शकील ने अपनी शिकायत में कहा, “ऐसा आचरण न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था के संवैधानिक और नैतिक मूल्यों का गंभीर उल्लंघन भी है। इस तरह की शिक्षाएं शांति और ज्ञान के बजाय हिंसा और नफरत को बढ़ावा देती हैं, जिससे मासूम छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।”

शिकायत में कहा गया है, “सरकारी स्कूलों के बच्चे सही मार्गदर्शन के हकदार हैं, न कि इस तरह की विचारधारा के प्रभाव में आने के।” साथ ही, शिक्षक के खिलाफ “शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई” की मांग की गई है। 

गुरुवार को सीईओ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले के चिल्ली, जक्यास और चांटी स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक तीन-सदस्यीय समिति गठित की। इस समिति को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की गहन जांच कर विशिष्ट टिप्पणियों और सिफारिशों के साथ दो दिनों के भीतर कार्यालय को एक तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपे।

आदेश में कहा गया है, “जीएमएस सिचल के शिक्षक चंद्र कुमार का वेतन जांच पूरी होने तक रोक दिया जाता है। यह कदम अनुशासन बनाए रखने और छात्रों के हित में उठाया गया है।”

स्कूल की सभा में राष्ट्रगीत गाने का निर्देश

गौरतलब है कि यह निलंबन आदेश उस समय जारी किया गया, जब जम्मू-कश्मीर के धार्मिक नेताओं ने प्रशासन के हालिया निर्देश पर आपत्ति जताई थी। इस निर्देश के तहत केंद्र शासित प्रदेश के सभी स्कूलों को सुबह की प्रार्थना सभाओं में राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य किया गया था। 

बुधवार को एक बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर में धार्मिक संगठनों के सबसे बड़े समूह, मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से ‘इस बाध्यकारी निर्देश को तुरंत वापस लेने’ का आग्रह किया। 

एमएमयू ने एक बयान में कहा, ‘वंदे मातरम गाना या सुनाना गैर-इस्लामी है, क्योंकि इसमें भक्ति के ऐसे भाव हैं जो अल्लाह की पूर्ण एकता (तौहीद) में इस्लामी मूल विश्वास के विपरीत हैं। इस्लाम ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति नहीं देता जिसमें सृष्टिकर्ता के अलावा किसी और के प्रति या किसी चीज के प्रति श्रद्धा या सम्मान शामिल हो।’

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