EVM मामलाः सुप्रीमकोर्ट ने BSP की याचिका पर मोदी सरकार और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

Published on: April 13, 2017
लखनऊ। पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों के ऐलान के तुरंत बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में ईवीएम से छेड़छाड़ होने का मामला उठाया था, जिसके बाद से ही लगभग सभी पार्टियों ने इस बात का समर्थन किया था। मायावती इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी गईं थीं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

Election Commission of India

बीएसपी ने कोर्ट के सामने यूपी और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है। पार्टी ने कोर्ट से मांग की कि भविष्य में सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जायें। बीएसपी ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड में हुए चुनाव को रद्द कर दिया जाए और बैलेट पेपर पर फिर से चुनाव हो।
 
बसपा-सपा और अवतार रहमान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और निर्वाचन आयोग से आठ मई तक जवाब देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि एक देश को छोड़कर कोई दूसरा देश ईवीएम का इस्तेमाल नहीं करता तो कोर्ट ने पूछा कि क्या ये आपकी सरकार नहीं थी जिसने ईवीएम शुरू किया था?

आपको बता दें कि पिछले 27 मार्च को वकील मनोहरलाल शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ता वकील मनोहर लाल शर्मा ने याचिका दायर कर मांग की है कि ईवीएम मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि इन मशीनों में गड़बड़ी होती है। उनका कहना है कि हर साल निर्वाचन आयोग में कई शिकायतें दर्ज की जाती हैं लेकिन उन पर कोई कदम नहीं उठाया जाता है और कहा जाता है कि ईवीएम में कोई समस्या नहीं है। हर वर्ष तीन से चार सौ ईवीएम खराब हो जाती हैं। याचिका में कहा गया है कि हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कई राजनीतिक दलों ने छेड़छाड़ के आरोप लगाये हैं।
 
खासतौर पर यूपी और उत्तराखंड चुनाव में ईवीएम में छेड़छाड़ की बहुत सी शिकायतें राजनीतिक दलों ने की हैं। ऐसे में इन ईवीएम मशीनों की जांच अमेरिका के कंप्यूटर विशेषज्ञों से कराई जाए। याचिका में ये भी कहा गया कि ईवीएम के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ संभव है। इसलिए पश्चिम के कई देशों में ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर दिया गया।

(संपादन- भवेंद्र प्रकाश)

Courtesy: National Dastak
 

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