नई दिल्ली। ईवीएम की विश्वसनीयता का सवाल अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है, यूपी विधानसभा चुनाव के बाद पहले बसपा फिर आम आदमी पार्टी ने मुद्दे को उठाया था। कल सोमवार को यह मुद्दा तब और आगे बढ़ता दिखा जब कांग्रेस पार्टी ने भी ईवीएम की जगह वैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग की। ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सियासी सवालों को तूल पकड़ता देख चुनाव आयोग बैकफुट पर आ गया है। चुनाव आयोग ने अब इस पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है।

आयोग ने 16 विपक्षी दलों की ईवीएम की खामियों को दूर करने या फिर आगे के चुनावों को बैलेट पेपर के जरिए ही कराने की मांग के मद्देनजर यह बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर बैलेट पेपर की पुरानी प्रणाली पर लौटने की मांग की थी। विपक्षी दलों ने ईवीएम विवाद पर एकजुट होकर काम करने की रणनीति बनाई है।
इसी रणनीति के तहत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में शिकायत की तो बुधवार को राष्ट्रपति से ईवीएम मुद्दे पर मिलने का समय मांगा है। राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में 16 पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल की चुनाव आयोग से हुई मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी शिकायतों पर आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा करने की बात कही है। उनका कहना था कि सभी पार्टियों की बैठक में ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवालों पर चर्चा की जाएगी।
विपक्षी दलों ने आयोग को ज्ञापन सौंप कहा कि हाल के चुनावों में ईवीएम को लेकर लोगों का भरोसा टूट गया है क्योंकि बटन दबाने पर एक पार्टी विशेष के पक्ष में ही वोट गिरने की घटनाएं सामने आयी हैं। इसीलिए चुनाव में लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए आयोग ईवीएम की खामियों को दूर करने और पेपर ट्रेल मशीन की व्यवस्था होने तक चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए जाने चाहिए। विपक्षी पार्टियों ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को बैलेट पेपर से कराने का भी आयोग को सुझाव दिया है।
चुनाव आयोग से मुलाकात करने से पूर्व संसद भवन में सुबह गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में इन सभी विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा के साथ ईवीएम विवाद को सबसे पहले तूल देने वाली बसपा के सतीश मिश्र, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय, सपा के नीरज शेखर, जदयू के अनवर अली के अलावा माकपा, भाकपा, द्रमुक, एनसीपी, राजद आदि के भी नेताओं ने शिरकत की।
(संपादन- भवेंद्र प्रकाश)
Courtesy: National Dastak

आयोग ने 16 विपक्षी दलों की ईवीएम की खामियों को दूर करने या फिर आगे के चुनावों को बैलेट पेपर के जरिए ही कराने की मांग के मद्देनजर यह बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर बैलेट पेपर की पुरानी प्रणाली पर लौटने की मांग की थी। विपक्षी दलों ने ईवीएम विवाद पर एकजुट होकर काम करने की रणनीति बनाई है।
इसी रणनीति के तहत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में शिकायत की तो बुधवार को राष्ट्रपति से ईवीएम मुद्दे पर मिलने का समय मांगा है। राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में 16 पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल की चुनाव आयोग से हुई मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि उनकी शिकायतों पर आयोग ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा करने की बात कही है। उनका कहना था कि सभी पार्टियों की बैठक में ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवालों पर चर्चा की जाएगी।
विपक्षी दलों ने आयोग को ज्ञापन सौंप कहा कि हाल के चुनावों में ईवीएम को लेकर लोगों का भरोसा टूट गया है क्योंकि बटन दबाने पर एक पार्टी विशेष के पक्ष में ही वोट गिरने की घटनाएं सामने आयी हैं। इसीलिए चुनाव में लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए आयोग ईवीएम की खामियों को दूर करने और पेपर ट्रेल मशीन की व्यवस्था होने तक चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए जाने चाहिए। विपक्षी पार्टियों ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को बैलेट पेपर से कराने का भी आयोग को सुझाव दिया है।
चुनाव आयोग से मुलाकात करने से पूर्व संसद भवन में सुबह गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में इन सभी विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा के साथ ईवीएम विवाद को सबसे पहले तूल देने वाली बसपा के सतीश मिश्र, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय, सपा के नीरज शेखर, जदयू के अनवर अली के अलावा माकपा, भाकपा, द्रमुक, एनसीपी, राजद आदि के भी नेताओं ने शिरकत की।
(संपादन- भवेंद्र प्रकाश)
Courtesy: National Dastak