कानून का बोलबाला

June 13, 2026
आजादी, लंबे समय तक जेल में रखे जाने और आतंकवाद-रोधी मामलों में जमानत पर लगी पाबंदियों की सीमाओं पर एक अहम फैसले में, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखने से संवैधानिक सुरक्षा के अधिकार बेमानी नहीं हो सकते। Image : thehindu.com कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज लगभग साढ़े चार साल तक जेल में रहे, जबकि उनके मामले में आरोप तय करने (framing charges)...
June 11, 2026
यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष के आरोप कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं थे और अपराध की उनकी थ्योरी गलतफहमी पर आधारित थी, कोर्ट ने EOW की FIR और ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस, दोनों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस जांच को एक स्वतंत्र समाचार संगठन के खिलाफ "बिना किसी ठोस आधार के की गई मनमानी जांच" (fishing and roving exercise) करार दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में आपराधिक जांच की...
June 11, 2026
चार वर्ष सात महीने की हिरासत और दिसंबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर किए जाने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद, वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को 10 जून 2026 को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी गई। Image: Khurram Parvez Facebook Page दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जून को कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी...
June 8, 2026
अवमानना कार्यवाही से इनकार और बिना जांच आरोपियों को राहत देकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही बनाई न्यायिक विरासत को झटका दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 26 अप्रैल, 2026 को हिंसा भड़काने वाली हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले बयान) पर सक्रिय रोक लगाने की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर अपना अंतिम फैसला सुनाया। अलग-अलग याचिकाकर्ताओं द्वारा तेरह याचिकाएं दायर की गई थीं और 2021 से उन पर सामूहिक रूप से सुनवाई चल रही...
May 28, 2026
यह फैसला KA नजीब मामले में स्थापित संवैधानिक ढांचे को बहाल करता है और चेतावनी देता है कि आतंकवाद-रोधी मामलों में जमानत संबंधी पाबंदियों को ट्रायल से पहले अनिश्चितकालीन हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। सैयद इफ्तिख़ार अंद्राबी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम के.ए. नजीब' मामले के बाद से, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आतंकवाद-विरोधी कानूनों पर सबसे...
May 28, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने ECI की SIR प्रक्रिया की शक्ति को बरकरार रखा है, और स्पष्ट रूप से कहा है कि यह विवादित प्रक्रिया न तो चुनाव कानूनों का उल्लंघन करती है और न ही नियमों का; हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मतदाताओं को बाहर किए जाने के मामलों के निपटारे के लिए उचित रास्ते और तरीके उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को भारत के चुनाव आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूचियों के...
May 27, 2026
अदालत ने माना कि मवेशियों के परिवहन और ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ के तहत दर्ज आरोप, अधिकतम “कानून-व्यवस्था” से जुड़े मामले हो सकते हैं और इन्हें ‘जम्मू-कश्मीर लोक सुरक्षा अधिनियम’ (PSA) के तहत निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। निवारक हिरासत (preventive detention) की संवैधानिक सीमाओं की पुष्टि करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसले में, जम्मू-कश्मीर और...
May 26, 2026
अदालत का कहना है कि के.ए. नजीब को न तो किसी ऐसे "गणितीय फॉर्मूले" तक सीमित किया जा सकता है, जो केवल देरी के आधार पर जमानत अनिवार्य करता हो, और न ही उसे एक ऐसे खोखले संवैधानिक सुरक्षा कवच तक, जिसे UAPA की धारा 43D(5) द्वारा पूरी तरह से निष्प्रभावी कर दिया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को एक बड़े बेंच को उन सवालों पर विचार करने के लिए मामला भेजा, जो 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम के.ए...
May 26, 2026
केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि जिन लोगों को बांग्लादेश भेजा गया है, उन्हें वापस लाया जाएगा और उनकी नागरिकता के दावों की जांच भारत में की जाएगी। सरकार ने यह भी साफ किया कि यह फैसला सिर्फ इस मामले की खास परिस्थितियों तक ही सीमित है। बांग्लादेश में बंगाली बोलने वाले लोगों को कथित तौर पर निर्वासित किए जाने को लेकर चल रहे मुकदमे में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को...
May 25, 2026
ASI के निष्कर्षों, ऐतिहासिक अभिलेखों और अयोध्या ढांचे के आधार पर, न्यायालय ने यह माना कि यह संरचना एक पहले से मौजूद मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र के ऊपर बनाई गई थी, जिसका संबंध राजा भोज से था। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धार्मिक स्थलों से जुड़े सबसे अहम फैसलों में से एक में फैसले में 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह कहा कि धार में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला...