हक़ और आजादी
April 2, 2021
निजीकरण के बहाने देश के सरकारी सेक्टर को बेचना संविधान के आर्टिकल 14, 15, 16, 19, 21, 38, 39, 300 और 335 के विरुद्ध है। यह कहना है संविधान बचाओ समिति के संयोजक व एडवोकेट राजकुमार का। राजकुमार इस बाबत आम लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि निजीकरण, संविधान के साथ मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। यही नहीं, यह फैसला आर्थिक विषमता को और बढ़ाएगा। खास है कि संविधान बचाओ समिति आरक्षण आदि कई...
April 1, 2021
एक अधिकारी ने कहा है कि यह मामला शीर्ष अदालत के समक्ष सब-ज्यूडिश है और अदालत इस तरह के आदेश देने से पहले अस्वीकृति पर्ची जारी नहीं कर सकती है
केंद्र द्वारा असम सरकार को नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के लिए अस्वीकृति पर्ची जारी करने की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिए जाने के कुछ दिनों बाद एक अधिकारी ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बिना पर्ची जारी करना संभव नहीं...
March 31, 2021
दिल्ली सॉलिडेरिटी समूह, सेवा केरला और केरल के कॉमरेड एक बार फिर चर्चाओं में हैं। सामाजिक तौर से सजग इन नागरिकों ने न सिर्फ, घरेलू हिंसा व पति के दमन से त्रस्त महिला व उसके बच्चे को कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान कराया है बल्कि महिला को जुल्मी पति के चंगुल से मुक्ति दिलाते हुए, उसकी बहन को लीगल सुपुर्दगी दिलाने का भी काम किया है। खास यह है कि महिला पर घरेलू हिंसा व पति का दमन इस कदर बढ़ चला था कि महिला...
March 30, 2021
'एमएसपी था एमएसपी हैं एमएसपी रहेगा', के शोर-शराबे के बीच उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में गन्ना किसानों के साथ 'एमएसपी' के नाम पर धोखे का बड़ा खेल उजागर हुआ है। महंगाई से बढ़ती लागत के बीच उत्तर प्रदेश में चार साल से गन्ने के दाम नहीं बढ़े हैं वहीं ताजा खुलासा गन्ना किसानों को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा तय एमएसपी (एफआरपी) के भी नहीं मिल पाने का है। बात करें तो प्रदेश की तकरीबन आधी चीनी मिलों...
March 29, 2021
वनाधिकार कानून के 15 साल बाद भी वन गुर्जरों के हिस्से में सिवाय अफसोस के क्यों कुछ नहीं आया है?
मशहूर शायर दुष्यंत कुमार का शेर 'कहां तो तय था चरागां हर घर के लिए, कहां चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए' वन गुर्जर समुदाय की स्थिति बयां करने को सटीक है। आजादी के 74 साल बाद भी वन गुर्जर समुदाय अपने हिस्से की आजादी से महरूम हैं। वनाधिकार कानून से टोंगिया, आदिवासियों व अन्य वन...
March 28, 2021
मोदी सरकार के नए खेती कानून किसान नहीं, बल्कि उन पूंजीपतियों के लाभ के लिए बनाए गए हैं जिनका आजादी के आंदोलन तक में कोई योगदान नहीं था। दूसरी ओर, इन (कानूनों) का प्रभाव इतना व्यापक है कि इनसे किसान ही नहीं, देश के 98 प्रतिशत मध्यम व निम्न आय वर्ग भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा। यही नहीं, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में इसका असर और भी ज्यादा भयावह होगा। दरअसल पहाड़ में पहले ही खेती-किसानी की बुरी...
March 25, 2021
नई दिल्ली। सेना में महिलाओं के परमानेंट कमीशन को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे लेकर आर्मी के मानक बेतुके और मनमाने हैं। यही नहीं 650 शॉर्ट सर्विस कमिशन की महिला अधिकारियों की अर्जी पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने भारतीय समाज को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि भारत के समाज का ढांचा ऐसा है, जो पुरुषों के द्वारा और पुरुषों के लिए बना है।
इसके साथ ही...
March 25, 2021
आदिवासी समुदाय का कहना है कि वे राज्य के वन विभाग द्वारा ज़बरदस्ती ज़मीन ख़ाली करवाए जाने और प्रताड़ना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं।
कर्नाटक में नागरहोल टाइगर रिज़र्व के खिलाफ़ 6000 से ज़्यादा जेनु कुरुबा आदिवासी कठोर प्रदर्शन कर रहे हैं। फॉरेस्ट रेंजर के ऑफ़िस के सामने अनिश्चितकाल तक चलने वाला यह विरोध प्रदर्शन 17 मार्च को शुरू हुआ है।
समुदाय का आरोप है कि राज्य सरकार, वन विभाग और WCS (...
March 23, 2021
अंग्रेज अधिकारी की हत्या और असेंबली में बम फेंकने के आरोप में राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को 24 मार्च 1931 को फांसी का एलान हुआ था। हालांकि जेल अधिकारियों ने एक रोज पहले आज ही के दिन रातोंरात उन्हें सूली पर चढ़ा दिया।
आज ही के दिन यानी 23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को ब्रिटिश हुकूमत के दौरान फांसी की सजा सुनाई गई थी। तीनों ने लाला लाजपत राय का मौत का...
March 23, 2021
वाराणसी के किसान, कार्यकर्ता, किसानों का समर्थन करने के लिए एकजुट हुए। इसमें मुख्य रूप से महिलाओं की भागीदारी रही
अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन (AIPWA) ने कहा कि 22 मार्च, 2021 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में किसान मजदूर महापंचायत के लिए इकट्ठे हुए। इसमें लगभग 200 लोगों की भागीदारी रही जिसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी दिखाई।
किसानों के समर्थन में पहुंचे...