संस्कृति
November 12, 2018
नई दिल्ली। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलने से शुरू किया नए नामकरण का सिलसिला फैजाबाद तक जा पहुंचा है। इस बीच गुजरात की भाजपा सरकार अहमदाबाद का नाम बदलने की तैयारी कर रही है। भाजपा के नामकरण के एजेंडे में पिछड़ते विकास को लेकर विभिन्न सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न राज्यों में भाजपा की सरकारों द्वारा नाम बदलने की कवायद पर जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब ने टिप्पणी की है। हबीब ने...
November 5, 2018
रोजी रोटी हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा
कोई भी हो, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलायेगा।
ऐसा मैं नहीं कह रहा। यह तो स्पष्ट विचारों के धनी सीधे कथन वाले बाबा नागार्जुन दशकों पहले कह गए थे जो आज भी प्रासंगिक है। बिखरे बाल, बेतरतीब दाढ़ी, गहरी नीली आँखों, चेहरे पर झुर्रियां बस यही चेहरा बन जाता है आखों के सामने जब कोई बाबा नागार्जुन का नाम लेता है। आज उसी जन कवि बाबा नागार्जुन की...
October 23, 2018
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आस्था के नाम पर लोगों ने एक भी महिला को प्रवेश नहीं करने दिया. राज्य में जगह-जगह भगवान अयप्पा के ब्रह्मचर्य को बचाए रखने के लिए पुरजोर कोशिश की और पूरे छह दिन महिलाओं को मंदिर में घुसने से रोकने में कामयाब रहे. सबरीमाला मंदिर में ‘दर्शन’ के आखिरी दिन सोमवार को ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की एक और महिला ने मंदिर में प्रवेश का...
September 28, 2018
आगामी 29 और 30 सितंबर को भिलाई में मूलनिवासी कला साहित्य एवं फिल्म फेस्टिवल 2018 का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में देश भर से तमाम कला साहित्य और फिल्म जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर उपस्थित होंगे। कई महत्वपूर्ण विषयों पर शोध पत्र पेश किए जाएंगे। मूलनिवासी नायको की जिंदगियों के बारे में आख्यान प्रस्तुत होगा।
इस फेस्टिवल का मकसद मूल निवासियों के कला, साहित्य, की विरासत से नई पीढ़ी से...
September 22, 2018
सपने
हर किसी को नहीं आते
बेजान बारूद के कणों में
सोई आग के सपने नहीं आते
बदी के लिए उठी हुई
हथेली को पसीने नहीं आते
शेल्फ़ों में पड़े
इतिहास के ग्रंथो को सपने नहीं आते
सपनों के लिए लाज़मी है
झेलनेवाले दिलों का होना
नींद की नज़र होनी लाज़मी है
सपने इसलिए हर किसी को नहीं आते
मेरा शहर
मेरा शहर एक लंबी बहस की तरह है
सड़कें-बेतुकी दलीलों-सी
और गलियां इस तरह
जैसे एक बात...
September 22, 2018
जो पुल बनाएंगे
वे अनिवार्यत:
पीछे रह जाएंगे।
सेनाएँ हो जाएंगी पार
मारे जाएंगे रावण
जयी होंगे राम,
जो निर्माता रहे
इतिहास में
बन्दर कहलाएंगे
September 1, 2018
ताकि लोकतंत्र के प्रेशर कूकर में विस्फोट न हो.
लाहौर,12 फ़रवरी 1983, विरोध रैली में कविता सुनते हुए हबीब जालिब. चित्र का श्रेय: मैमूना शिराज़ी के ट्विटर पोस्ट से.
भारत में आज जिस प्रकार से संविधान के सिपाहियों पर शिकंजे लगाए जा रहे हैं, और देश भर के बुद्धिजीवियों, लेखकों, कवियों, वकीलों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर बेबुनियाद इलज़ाम लगा कर गिरफ़्तार किया जा रहा है. ऐसे में हबीब जालिब जैसे...
July 6, 2018
पिछले दो हफ्तों में तीन बड़ी घटनाएं हुई है जिनपर जैसी चर्चा होनी चाहिए वैसे नहीं दिखाई दी क्योंकि गत चार वर्षो में हमारे देश के मीडिया ने मुद्दों से ध्यान भटकाने की ‘कला’ में जो महारत हासिल की है वो दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा होगी.
पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में भी मार्शल लॉ, या राजसत्ता के समय मीडिया ने विरोध दर्ज किया और सत्ता पर सवाल खड़े किये लेकिन भारत में...
June 29, 2018
कबीर और कबीर जैसों को इस बर्बर और असभ्य देश ने कभी बर्दाश्त नहीं किया। उनके जीते जी और उनके जाने के बाद भी लगातार उनकी आग पर मिट्टी डाली गई है।
कबीर की परम्परा भी बनी तो उसमें बीमारी लग गयी, पहली पीढ़ी के गुरुओं से ही यह बीमारी चल पड़ी।
अब इतिहास का मुआयना करने पर साफ जाहिर होता है कि आत्मा, परमात्मा और पुनर्जन्म को स्पष्ट तौर पर नकारे बिना कोई कुछ भी कर ले - वह भारत मे फैली ऐतिहासिक कोढ़...
June 29, 2018
पाहन पूजे हरि मिलैं, तो मैं पूजौं पहार। वा ते तो चाकी भली, पीसी खाय संसार।।
उन्होंने मूर्तिपूजा का विरोध करते हुए कहा था कि पत्थर से बने बूत पूजने से यदि ईश्वर मिल जाता है तो मैं पहाड़ पूजने लगूं क्योंकि उससे बने चाकी से समस्त दुनिया गेंहू अथवा अन्य चीजों को पिस कर अपना पेट भरता है. आप हिन्दू धर्म व इस्लाम के आलोचक थे. उन्होंने यज्ञोपवीत और ख़तना को बेमतलब क़रार दिया और इन जैसी धार्मिक...