नर्मदा बचाओ आंदोलन: मेधा पाटकर का नौंवे दिन अनशन जारी, कल से सेहत बिगड़ी

Written by sabrang india | Published on: September 2, 2019
छोटा बड़दा (बड़वानी)। 32000 परिवार, उनका गाँव, घर और जीवन डूब रहा है। मेधा पाटकर नौवें दिन भी उपवास पर हैं। उनकी और साथियों की तबियत बिगड़ने लगी है। नर्मदा किनारे लोग रात-दिन बैठे हुए हैं। लेकिन, वे अपने आंदोलन से हटने को तैयार नहीं हैं। नर्मदा घाटी और देशभर से मिल रहे समर्थन से उनकी आत्मिक और नैतिक ताकत बढ़ती जा रही है।  



आंदोलन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 32 हजार परिवारों का पुनर्वास किए बिना जलस्तकर 134.500 मीटर तक बढ़ाने पर आई डूब से गांवों के आंतरिक रास्ते कट गए हैं। नए नए गांवों में घरों-खेतों में पानी भरना जारी है। लेकिन, दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बांध के बढ़ते जलस्तर का गुणगान किया जा रहा है जो अत्यंढ़त असंवेदशील और असभ्य् व्यवहार है। इससे नर्मदा घाटी ही नहीं देश भर के लोकतंत्र में आस्था रखने वाले संवेदनशील नागरिक गुस्से में हैं।

एनवीडीए आयुक्त द्वारा आंदोलन के 33 मुद्दों का लिखित जवाब आया है जिस पर आंदोलन अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा। आंदोलन की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के 8 फरवरी 2017 के आदेश तथा जीआरए के आदेशों के मुताबिक नुकसान भरपाई, पुनर्वास की स्थिति तथा अनन्य मुददों का निपटारा करने के लिए प्रशासन और आंदोलन के बीच तालमेल के सा‍थ समयबद्ध कार्यक्रम तय हो। हालांकि जिला कलेक्टर और अधिकारी आंदोलनकारियों से आकर बात तो लगातार कर रहे हैं लेकिन शिकायत निवारण पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 

आंदोलन की तरफ से कहा गया है कि इस दरमियान देश और दुनियाभर के 22 देशों से आंदोलन के समर्थन खबरें मिली हैं। देश के सैकड़ों शहरों में ज्ञापन दिए गए और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सत्यादग्रह स्थल पर भी देशभर के साथियों का तांता लगा हुआ है। मैगसेसे पुरस्का्र से सम्मानित संदीप पाण्डेय ने सत्याग्रहियों को संबोधित करते हुए कश्मीर में हो रहे मानवाधिकर हनन को नर्मदा के अन्याय से जोड़ा। वरिष्ठ् सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार चिन्ममय मिश्रा और मुंबई के घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। पुणे क्षेत्र के मानव कांबले, मारुति भापकर तथाब उनके साथी शामिल हुए। नर्मदा बचाओ आंदोलन के महाराष्ट्र क्षेत्र के आदिवासी प्रतिनिधियों सहित चेतन भाऊ, विजय भाऊ, योगिनी ताई, लतिका ताई शामिल हुए। सोश्यलिस्ट पार्टी के रामस्वरुप मंत्री, किसान संघर्ष समिति के लीलाधर चौधरी, अखिल भारतीय किसान सभा मध्यसप्रदेश के राम नारायण, एवएसएसटीओबीसी एकता मंच, बड़वानी से सुमेरसिंह बड़ौले तथा बिरसा ग्रुप, जयस संगठन, एनएसओएसवायएफ के साथियों ने सत्या,ग्रह स्थरल पहुँच कर अपना समर्थन व्त्यप्र  किया। इनके अलावा एनएपीएम की वरिष्ठ साथी सुनिति ताई तथा सुहास ताई एवं सेंचुरी सत्यापग्रह के साथी पिछले सप्ताह से ही सत्याग्रह में शामिल हैं।

मोटर साइकिल रैली और प्रदर्शन
नर्मदा चुनौती सत्यासग्रह के समर्थन में जन जागरण हेतु रविवार को नर्मदा घाटी के गांवों में मोटर साइकिल रैली निकाली गई। करीब 200 मोटर साइकिलों का कारवां सुबह खलघाट से प्रारंभ हुआ जो धरमपुरी, टवलाई, बाकानेर और मनावर में नुक्कसड़ सभा करते हुए सत्यालग्रह स्थहल पहुँचा। रैली में शामिल प्रभावितों ने डूब प्रभावित गांवों और कस्बों में जाकर वर्तमान परिस्थिति का आंकलन कर हुए डूब प्रभावितों का दुख दर्द साझा किया।

इससे पहले नर्मदा घाटी के युवा कार्यकर्ताओं ने एनवीडीए के कार्यालय में जाकर शांतिपूर्ण, संयमित किंतु स्पष्ट रुप से अपनी मांग रखी। प्रभावितों द्वारा भारत के प्रधान न्यारयाधीश को पत्र लिखकर बिना पुनर्वास डूब से उनकी रक्षा की मांग की गई है।

गृहमंत्री के बयान का स्वागत
प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन द्वारा आंदोलन की मांगों के समर्थन में दिए गए बयान का आंदोलन द्वारा स्वागत किया गया। साथ ही मांग की है कि प्रदेश सरकार जलाशय का स्तर कम कर 122 मीटर करने तथा क्रमबद्ध सारे प्रभावितों के पुनर्वास की ठोस योजना प्रस्तुत करे।

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