क्या राष्ट्रवाद में भारत देश के आदिवासी नहीं आते ?' - लिंगाराम कोडोपि

Written by लिंगाराम कोडोपि | Published on: August 10, 2018
यह वास्तविक जानकारी हैं।मैं परिजनों से मिला और लिख रहा हूं।

Adivasi

अभी 2018/9/ अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पुरे विश्व में मनाने वाले हैं। वाह रे मेरे विश्व के आदिवासी तुम मनाने चले हो अपना दिवस, पूरे विश्व में मूलनिवासी खतरे में हैं। पूरे विश्व भर में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक भारत देश को कहाँ जाता हैं, भारत में एक राज्य हैं जिसे छत्तीसगढ़ राज्य कहते हैं, इस राज्य में बस्तर संभाग हैं जहाँ मुलनिवासी यानी आदिवासी, माड़िया, मुरिया, गोंड, जंगलो में रहकर जीवन यापन करते है। इन मूलनिवासियों को भारत सरकार पुलिस प्रशासन के द्वारा नक्सली कहती हैं और आये दिन मारती है। कल सुबह 15 आदिवसियों को जिला सुकमा के मेहता पंचायत के चार गांव में मारा है .

1) नुलकातोग से सात आदिवासी नाबालिक बच्चे थे। 1. हिड़मा मुचाकी/ लखमा 2.देवा मुचाकी/हुर्रा 3.मुका मुचाकी/ मुका 4. मड़कम हुंगा / हुंगा 5. मड़कम टींकू / लखमा 6. सोढ़ी प्रभू / भीमा 7. मड़कम आयता / सुक्का। इन सभी नाबालिकों की उम्र लगभग 14,15,16,17, परिजनों के बताए अनुसार वर्ष हैं।
2)ग्राम गोमपाड़ से 1. मड़कम हुंगा / हुंगा 2.कड़ती हड़मा / देवा 3.सोयम सीता /रामा 4.मड़कम हुंगा / सुक्का 5. वंजाम गंगा / हुंगा 6. कवासी बामी / हड़मा।
3) ग्राम किनद्रमपाड़ से 1. माड़वी हुंगा / हिंगा।
4) ग्राम वेलपोच्चा से 1.वंजाम हुंगा / नंदा।  ग्राम नुलकातोग से मड़कम बुधरी / रामा इस महिला को पैर में गोली मारे हैं। व ग्राम वेलपोच्चा से वंजाम हुंगा / नंदा को पुलिस ने पकड़ा हैं और इनामी नक्सली कह रही हैं।
इनके अलावा और तीन युवकों को पकड़ा हैं। कई गांव वालों को पुलिस कर्मियों ने दौड़ा-दौड़ा कर मारा हैं, जिनमे प्रेग्नेंट महिलाएं भी हैं। यह बात हमे तब पता चली जब मैं और सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी, रामदेव बघेल परिजनों से मिले, परिजनों ने अपनी पूरी व्यथा सोनी सोरी को सुनाई। चारों गाँव के ग्रामीणों का कहना हैं कि यह सारे ग्रामीण हैं कोई मुठभेड़ नहीं हुआँ हैं। गाँव मे कोई नक्सली था ही नहीं .

आप सब से मेरा अपील हैं कि आपको और सच्चाई जाननी हैं तो आप मेहता पंचायत के गोमपाड़ गांव में जा सकते हैं, और चारो गांव के ग्रामीणों से मिल सकते हैं।

यह वही ग्राम पंचायत मेहता हैं जहाँ ग्राम गोमपाड़ हैं। 14/6/2016 जहाँ मड़कम हिड़मे/ कोसा की पुत्री का बलात्कार कर नक्सल के नाम पर मार दिया गया। इस घटना के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी द्वारा 9अगस्त  क्रान्ती के नाम पर 15 अगस्त तक गोमपाड़ ग्राम तक देश के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर पदयात्र किया गया और गोमपाड़ ग्राम में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस गाँव के ग्रामीण आज भी मड़कम हिड़मे के न्याय के इंतजार में हैं, प्रकरण हाई कोर्ट बिलासपुर में हैं, पता नहीं क्यों जज फैसला सुना नहीं रहे हैं। दुबारा इस गाँव में सात ग्रामीणों को पुलिस ने मार दिया। हम गाँव के ग्रामीणों को कैसे विश्वास दिलाये की भारत देश में आदिवासियों के लिए लोकतंत्र, सविधान, कानून, और मूलनिवासियों के रक्षक हैं।

आज उन आदिवासियों के लाशो की डॉक्टरों द्वारा शव परीक्षण के नाम पर चिकन, मटन की तरह काटेंगे और पालीथिन में बाद कर गाँव वालों को दे देंगे। गांव वाले कल से आये हुए हैं कोन्टा के सड़को में सोए हैं, आज भी शव लेने के लिए परिजन भटक रहे हैं, कब तक शव दिया जयेगा पता नहीं।

कल 15 आदिवासियों को मार कर पालीथिन में लाया गया है। आज छोटे - बड़े अखबारों में बड़े- बड़े अक्षरों में सुकमा पुलिस प्रशासन को शाबाशी मिल रही हैं कि जिला सुकमा की पुलिस ने 15 नक्सलियों को मारकर बहुत ही गौरवपूर्ण कार्य किया हैं।  जिला सुकमा S.P. अभिषेक मीणा, डी. एम. अवस्थी ए.डी.जे. नक्सल ऑपरेशन, इन सभी पुलिस अधिकारियों को माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह शाबाशी दे रहे हैं। कुछ दिन बाद इन पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जायेगा। शायद मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को यह नहीं पता कि मरने वाले नक्सली नहीं बल्की मासूम आदिवासी युवा, युवती हैं।

पूरे भारत मे राष्ट्रवाद खतरे में हैं। राष्ट्रवाद का क्या अर्थ हैं? क्या राष्ट्रवाद में भारत देश के आदिवासी नहीं आते ?  B.J.P. की सरकार पूरे भारत में राष्ट्रवाद को समाप्त करना चाहती हैं और R.S.S. का गुंडाई साम्राज्य स्थापित करना चाहती हैं। क्या पुरे भारत के बुद्धिजीवी वर्ग देश मे धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रवाद, को समाप्त करने में B.J.P. का मदद करेंगे या बदलाव के लिए सरकार बदलेंगे ?

9 अगस्त को आदिवासी दिवस भारत देश और विश्व मे मनाया जाएगा और सुकमा जिले के चार गाँव गोमपाड़, किन्द्रेमपाड़, नुलकातोग, वेलपोच्चा, के आदिवासी 15 आदिवासी युवा युवतियों के मरने का मातम में रहेंगे। क्या ये गाँव और नक्सल के नाम पर मारे गए आदिवासी आपके समुदाय के नहीं है? क्या ये गाँव आपके नहीं हैं? आप सब आदिवासी दिवस किसके साथ मना रहे हैं? आप उस सरकार के साथ मना रहे हैं जो आपके समाज, समुदाय, और लोगों को नक्सल के बहाने से मार रही हैं। आज भारत देश में आठ करोड़ से नौ करोड़ आदिवासी,मूलनिवासी जीवन यापन कर रहे हैं। देश के छत्तीसगढ़ राज्य में मूलनिवासी दिवस राज्य सरकार के प्रतिनिधित्व में रायपुर में मनाया जा रहा हैं। जिसका प्रतिनिधित्व केबिनेट मंत्री मा. केदार कश्यप, मा. विकास मरकाम, उपाध्यक्ष अनु.जनजाति आयोग, मा. नंदकुमार साय, अध्यक्ष राष्ट्रीय जनजाति आयोग, इनके अलावा कई आदिवासी नेता हैं जो कि इस दिवस का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। कुछ नेता तो B.J.P.  के हैं जो आदिवासियों की दलाली करते हैं। इन सभी नेताओं को पता है कि आदिवासियों के साथ क्या हो रहा हैं लेकिन करेंगे कुछ नहीं। इन नेताओं का काम ही है सरकार के तलवे चाटना। B.J.P. और R.S.S. के गुलाम बन चुके हैं कुछ आदिवासी नेता। आठ करोड़ आदिवासियों में कुछ तो शिक्षित आदिवासी युवा हैं। समुदाय और मूलनिवासी समाज की रक्षा के लिए सामने आए जिससे समाज में हो रहे अन्याय को रोका जा सके।

या मैं ये मान लू की भारत देश के आठ करोड़ मूलनिवासियों के पास खून नहीं बल्की B.J.P. सरकार और R.S.S. द्वारा खून को पानी बना दिया गया हैं। देखते हैं भारत के आदिवासियों में अत्याचार से लड़ने की कितनी औकात हैं। "मनुष्य जीवन अत्याचारों के खिलाफ लड़ने के लिए ही हुआँ हैं"
 
छत्तीसगढ़ के पत्रकार लिंगाराम कोडोपि के फेसबुक वॉल से