MP हाईकोर्ट में OBC आरक्षण मामलों की सुनवाई 2 अप्रैल से फिर होगी शुरू

Written by sabrang india | Published on: March 30, 2026
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने समय-सीमा तय की; 15 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होगी। दो महीने में मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।


साभार : लाइव लॉ

मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में अब फिर तेजी आने वाली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन मामलों को हाईकोर्ट को वापस भेजे जाने के बाद 23 मार्च को सुनवाई हुई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि सभी प्रकरणों की अगली सुनवाई अगले महीने होगी।

अदालत ने निर्देश दिया है कि 2 अप्रैल 2026 से इन मामलों की संयुक्त सुनवाई शुरू की जाए। साथ ही यह भी तय किया गया है कि 15 अप्रैल से नियमित सुनवाई होगी और प्रयास रहेगा कि सभी मामलों का निपटारा दो महीने के भीतर कर लिया जाए।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर किए गए सभी ओबीसी आरक्षण मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि इन मामलों की सुनवाई एक विशेष पीठ द्वारा की जाए और तीन माह के भीतर गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाए। इसी आदेश के पालन में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई की थी और आगे की प्रक्रिया तय की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि याचिका क्रमांक 5901/2019 इस मामले की मुख्य याचिका है, जिस पर पहले कई बार सुनवाई हो चुकी है और 19 मार्च 2019 को अंतरिम आदेश भी दिया गया था।

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक शाह और हस्तक्षेपकर्ताओं के वकील वरुण ठाकुर ने इस दावे का विरोध किया। उनका कहना था कि यह याचिका अब प्रासंगिक नहीं रही, क्योंकि इसमें 8 मार्च 2019 के अध्यादेश को चुनौती दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुका है और 14 जुलाई 2019 को विधिवत कानून बन चुका है, जिस पर कोई स्थगन आदेश नहीं है।

सरकार की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि याचिका के सभी याचिकाकर्ता अब मेडिकल क्षेत्र में स्थापित हो चुके हैं और अपने-अपने अस्पताल चला रहे हैं, इसलिए इस याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए ऐतिहासिक अभिलेख अभी हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न नहीं हैं।

इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि उपलब्ध दस्तावेजों को डिजिटल रूप में पेश किया जाए, ताकि सुनवाई के दौरान उन पर प्रभावी ढंग से विचार किया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को स्पष्ट निर्देश दिए कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को 2 अप्रैल 2026 को एक साथ सूचीबद्ध किया जाए।

इसके साथ ही सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने दस्तावेज और आवश्यक अभिलेख 15 अप्रैल से पहले प्रस्तुत कर दें, ताकि नियमित सुनवाई के दौरान किसी तरह की देरी न हो।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल से इन मामलों की नियमित और निरंतर सुनवाई शुरू होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दो महीने के भीतर अंतिम फैसला देने का प्रयास किया जाएगा।

इस प्रकार लंबे समय से लंबित ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में अब निर्णायक चरण शुरू होने जा रहा है, जिस पर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों और संबंधित पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने ‘द मूकनायक’ से बातचीत में कहा कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में राज्य सरकार का पक्ष पूरी तरह मजबूत और ठोस तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में लाया गया अध्यादेश बाद में विधिवत कानून में परिवर्तित हो चुका है और वर्तमान में वही लागू है, जिस पर किसी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं है।

ऐसी स्थिति में पुरानी याचिकाओं को मुख्य याचिका मानना न्यायसंगत नहीं होगा।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और तथ्यात्मक अभिलेख सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए हैं, जिन्हें अब हाईकोर्ट के समक्ष भी रखा जाएगा। उनका मानना है कि जब इन सभी दस्तावेजों पर समग्र रूप से विचार किया जाएगा, तब राज्य सरकार का पक्ष और अधिक स्पष्ट होकर सामने आएगा।

रामेश्वर ठाकुर ने आगे कहा कि हाईकोर्ट द्वारा 2 अप्रैल से सभी मामलों को एक साथ सूचीबद्ध करना और 15 अप्रैल से नियमित सुनवाई तय करना एक सकारात्मक पहल है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का मार्ग प्रशस्त होगा और उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तय समय-सीमा के भीतर अंतिम निर्णय आ जाएगा।

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