गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तालुका के आलदंडी टोला की रहने वाली 24 वर्षीय आशा संतोष किरंगा नौ महीने की गर्भवती थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस जिले के “गार्डियन मिनिस्टर” हैं।

खराब सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण छह किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर एक गर्भवती महिला की दुखद मौत हो गई। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। गढ़चिरौली में महिला का गांव मुख्य सड़क से कटा हुआ है और प्रसव के लिए कोई चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि गढ़चिरौली में दो हफ्ते पहले तीन नगरपालिकाओं के लिए स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे और इस अभियान का प्रबंधन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था, जो इस जिले के “गार्डियन मिनिस्टर” भी हैं।
मीडिया से बात करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया और NDTV को अधिकारी ने बताया कि गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तालुका के आलदंडी टोला की रहने वाली आशा संतोष किरंगा (24) नौ महीने की गर्भवती थी।
उन्होंने कहा, “उसका पैतृक गांव आलदंडी टोला मुख्य सड़क से कटा हुआ है और वहां प्रसव की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। समय पर मदद मिलने की उम्मीद में वह 1 जनवरी को अपने पति के साथ जंगल के रास्तों से छह किलोमीटर पैदल चलकर अपनी बहन के घर पेठा के लिए निकली। हालांकि, गर्भावस्था के उन्नत चरण में इस कठिन यात्रा का उसके शरीर पर बुरा असर पड़ा।”
उन्होंने आगे बताया, “2 जनवरी की सुबह उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसे एंबुलेंस से हेदरी के काली अम्माल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चा पहले ही गर्भ में मृत पाया गया। बढ़ते रक्तचाप के कारण महिला की भी कुछ देर बाद मौत हो गई।” मीडिया द्वारा जानकारी के लिए संपर्क किए जाने पर गढ़चिरौली के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने बताया कि महिला का पंजीकरण आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया गया था।
उन्होंने कहा, “अचानक प्रसव पीड़ा और जटिलताएं संभवतः पैदल चलने के कारण हुईं। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। तालुका स्वास्थ्य अधिकारी से एक विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई गई है और मामले की जांच की जाएगी।”
(यह खबर सिंडिकेटेड फीड से प्रकाशित हुई है)
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मीडिया से बात करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया और NDTV को अधिकारी ने बताया कि गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तालुका के आलदंडी टोला की रहने वाली आशा संतोष किरंगा (24) नौ महीने की गर्भवती थी।
उन्होंने कहा, “उसका पैतृक गांव आलदंडी टोला मुख्य सड़क से कटा हुआ है और वहां प्रसव की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। समय पर मदद मिलने की उम्मीद में वह 1 जनवरी को अपने पति के साथ जंगल के रास्तों से छह किलोमीटर पैदल चलकर अपनी बहन के घर पेठा के लिए निकली। हालांकि, गर्भावस्था के उन्नत चरण में इस कठिन यात्रा का उसके शरीर पर बुरा असर पड़ा।”
उन्होंने आगे बताया, “2 जनवरी की सुबह उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसे एंबुलेंस से हेदरी के काली अम्माल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चा पहले ही गर्भ में मृत पाया गया। बढ़ते रक्तचाप के कारण महिला की भी कुछ देर बाद मौत हो गई।” मीडिया द्वारा जानकारी के लिए संपर्क किए जाने पर गढ़चिरौली के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने बताया कि महिला का पंजीकरण आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया गया था।
उन्होंने कहा, “अचानक प्रसव पीड़ा और जटिलताएं संभवतः पैदल चलने के कारण हुईं। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। तालुका स्वास्थ्य अधिकारी से एक विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई गई है और मामले की जांच की जाएगी।”
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