डॉ कफील खान ने दी बर्खास्तगी को चुनौती, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

Written by Sabrangindia Staff | Published on: February 3, 2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा संचालित बीआरडी मेडिकल कॉलेज से उनकी सेवाओं को समाप्त करने को चुनौती देने वाली डॉ कफील खान की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को आज नोटिस जारी किया।


 
जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने 4 हफ्ते में काउंटर मांगा है। खान, जिनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबन आदेश जारी किया था, को 2017 में बीआरडी अस्पताल मामले में उनकी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, जहां अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण 63 बच्चों की मौत हो गई थी। इसकी जानकारी खुद डॉ खान ने ट्वीट कर दी है।
 
यह आरोप लगाया गया था कि जब त्रासदी हुई थी तब वह इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी थे। उक्त बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया है।
 
बता दें कि पिछले साल नवंबर में योगी सरकार द्वारा उनको नौकरी से निकाले जाने की जानकारी सामने आई थी। गोरखपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत और ऑक्सीजन की कमी का मामला सामने आने पर डॉ कफील ख़ान पर कई आरोप लगाए गए थे। 

सरकार ने आरोप लगाया था कि यह जानते हुए कि स्थिति काफ़ी ख़राब है कफ़ील ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी थी और तत्काल क़दम उठाने में विफल रहे थे। उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी और जेल की सज़ा हुई थी।  डॉ कफ़ील खान को निलंबित कर दिया गया था। जेल जाने के क़रीब आठ महीने बाद अप्रैल 2018 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज़मानत दी थी। तब कोर्ट ने कहा था कि मेडिकल कॉलेज में लापरवाही का ख़ान के ख़िलाफ़ कोई सीधा सबूत नहीं है।

इसके बाद आई हर जाँच रिपोर्ट में डॉ कफील ख़ान निर्दोष साबित होते रहे। सरकार ने इस मामले में 15 अप्रैल 2019 को जाँच अधिकारी की ओर से दायर उस जाँच रिपोर्ट को मान लिया था जिसमें में डॉ. कफ़ील ख़ान को निर्दोष पाया गया था। इसके बाद 6 अगस्त, 2021 में राज्य सरकार ने 24 फरवरी, 2020 को दिए दोबारा विभागीय जाँच के आदेश को भी वापस ले लिया था। 
 
डॉक्टर खान की तरफ से दायर मामले ( Filling No- WRIA/1571/2022 ) में न्यायालय को यह बताया गया कि...

1- न्यायालय के आदेश के बाद जाँच अधिकारी ने अपनी जाँच रिपोर्ट 15-04-2019 को पूरी कर दी थी जिसमें डॉ कफील खान को चिकित्सीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

2- उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनः जाँच के आदेश 06/08/2021 को इलाहबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वापस के लिए थे।

3- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 09/09/2021 को दोबारा निलंबन पर रोक लगा दी थी।

4- डॉ कफील खान के साथ 7 और लोग ( डॉक्टर्स, चीफ फार्मसिस्ट, लिपिक एवं सहायक लिपिक ) जो निलंबित हुए थे उनकी बहाली हो चुकी है।

5- प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने बर्खास्त आदेश के दौरान निम्नलिखित तथ्यों को स्वीकार भी किया है –

* डॉ कफील खान बाल रोग विभाग में सबसे जूनियर डॉक्टर थे। उनकी नियुक्ति दिनाँक-08-08-2016 को प्रवक्ता के पद पर 2 वर्ष की परिवीक्षा के तौर पर हुई थी।

* 10-08-2017 को छुट्टी पर होने के बावजूद, उस रात को वो बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर पहुंचे थे और हर मासूम जान को बचाने का हर सम्भव प्रयास किया था। डॉ कफील खान और उनकी पूरी टीम ने उन 54 घण्टों में 500 जम्बो सिलेण्डर लाने की व्यवस्था की थी।

*उस भयानक रात में डॉ कफील खान ने 26 लोगों को फोन करके सूचना दी और मेडिकल कॉलेज आने को बोला, जिसमें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं जिला मजिस्ट्रेट गोरखपुर भी शामिल थे।

* डॉ कफील खान के खिलाफ भ्रष्टाचार मे संलिप्तता का कोई सबूत नही मिला।

* डॉ कफील खान आक्सीजन आपूर्ति के भुगतान / आदेश / टेण्डर एवं रख-रखाव के लिए जिम्मेदार नही थे।
* डॉ कफील खान के खिलाफ दिनाँक 08-08-2016 के बाद प्राइवेट प्रेक्टिस करने का कोई सबूत नही मिला।
* डॉ कफील खान के खिलाफ लगाए गए चिकित्सीय लापरवाही के आरोप निराधार पाये गए।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में दिनाँक- 10 अगस्त से 12 अगस्त 2017 तक 54 घण्टे ऑक्सीजन की कमी थी और डॉक्टर कफ़ील ने वास्तव में कई मासूम बच्चों को मरने से बचाने के लिए जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी की थी।

• पुष्पा सेल्स ने अपने 68 लाख की बकाया राशि के भुगतान के लिए संबंधित अधिकारियों को 14 पत्र लिखे थे, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के पत्र भी शामिल हैं।

• सीमा सुरक्षा बल ने भी स्वीकार किया है कि डॉक्टर कफ़ील 10-08-2017 को उनसे मदद मांगने गए थे और उन्होंने अपने ट्रक और जवानों के द्वारा सहायता की थी, जिन्होंने दो दिनों तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम किया था।

•जम्बो सिलेन्डर का भुगतान डॉक्टर कफ़ील ने किया था।
 
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 25-04-2018 के फैसले में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं और कहा व्यक्तिगत रूप से डॉक्टर कफ़ील खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही /भ्रष्टाचार के कोई भी सबूत नही मिलते हैं।

डॉक्टर कफ़ील को यह कहते हुये बर्खास्त कर दिया गया कि वह 2014 में प्राइवेट प्रेक्टिस करते थे जबकि डॉक्टर कफ़ील की नियुक्ति दिनाँक-08-08-2016 को प्रवक्ता के पद पर 2 वर्ष की परिवीक्षा के तौर पर हुई थी।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 500 डॉक्टर और लगभग 5000 कर्मचारी हैं परन्तु उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉक्टर कफ़ील को ही बलि का बकरा बनाया गया।

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