यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसने अन्य दलित छात्रों से हस्ताक्षरित बयान लिए हैं, जिनमें कहा गया है कि 26 जनवरी की रात उन्हें जाति के आधार पर कोई गाली-गलौज नहीं झेलनी पड़ी। वहीं शिकायत करने वाले छात्र ने जातिगत हिंसा और धमकियों का आरोप लगाया है। CUG का यह भी कहना है कि उसे तय प्रक्रिया के तहत आरोपियों के खिलाफ पहले कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, जिसे शिकायतकर्ता ने गलत बताया है।

साभार : जीसीयू
26-27 जनवरी की रात सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात (CUG) के साबरमती हॉस्टल में करीब तीस लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर छात्रों पर हमला किया। जिन छात्रों पर हमला हुआ, उनमें से एक दलित छात्र राजकरण सिंह ने आरोप लगाया है कि भीड़ ने उनके साथ मारपीट की, जाति-आधारित गालियां दीं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और यौन उत्पीड़न जैसी धमकियां दीं। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि हमलावर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई ABVP से जुड़े हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास दायर की गई औपचारिक शिकायत में भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सिंह सोशल मैनेजमेंट स्टडीज़ विभाग के प्रथम वर्ष के स्नातक छात्र हैं और साबरमती हॉस्टल में रहते हैं। 28 जनवरी को उन्होंने CUG के प्रोवोस्ट, रजिस्ट्रार और डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) को ईमेल भेजा, जिसमें कहा गया कि प्रवेश के पहले दिन से ही उन्हें लगातार उत्पीड़न और जातिगत अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, 26-27 जनवरी की दरमियानी रात की घटनाएं लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न का परिणाम थीं।
भीड़ हॉस्टल में घुस गई
सिंह के अनुसार, 26 जनवरी की रात करीब 11:30 बजे, कर्फ्यू के बावजूद कुछ डे-स्कॉलर छात्रों समेत भीड़ अवैध रूप से साबरमती हॉस्टल में घुस गई। भीड़ ने कथित तौर पर छात्रों पर हमला करना शुरू कर दिया और यह सुबह 3 बजे तक चलता रहा।
द वायर हिंदी ने अन्य छात्रों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सिंह का कहना है कि उन्होंने और अन्य छात्रों ने हालात को शांत करने की कोशिश की, लेकिन कुछ लोग झगड़े को भड़काते रहे। शिकायत में कई छात्रों और शोधार्थियों के नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं।
PhD स्कॉलर मुन्ना कुमार पर अत्यंत अपमानजनक और जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर कहा, “हम तुम्हारे मुंह में पेशाब करेंगे।”
शिकायत के मुताबिक, कुमार ने सिंह को निकालने और “उसका करियर बर्बाद करने” की धमकी दी।
जर्मन स्टडीज़ के तृतीय वर्ष के एक छात्र पर मारपीट और गंदी गालियां देने का आरोप है। चाइनीज़ स्टडीज़ विभाग के दो छात्रों पर गाली-गलौज, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने और धमकाने का आरोप है।
शिकायत में कहा गया है कि चाइनीज़ स्टडीज़ कार्यक्रम के प्रथम वर्ष के एक छात्र ने मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। उसने कथित तौर पर सिंह से कहा, “तुम लोग हॉस्टल में फ्री में रहते हो; हम तुम्हें पैसे देते हैं और खाना खिलाते हैं।” उसने शिकायतकर्ता को “छोटा” और “नीची जाति” का भी कहा।
डॉक्टरेट छात्र टप्पू महाराणा पर आरोप है कि वह छात्रों को उकसा रहा था, झगड़े को बढ़ा रहा था और जातिसूचक गालियां दे रहा था।
पीड़ित का कहना है कि आरोपियों में से एक मुन्ना कुमार यूनिवर्सिटी में ABVP का पूर्व अध्यक्ष था और कई अन्य RSS से जुड़े थे।
‘दूसरी पार्टी आजाद घूम रही है’
27 जनवरी को पीड़ित छात्रों ने अपने-अपने विभागाध्यक्षों (HOD) को इसकी जानकारी दी और औपचारिक शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद एक आंतरिक समिति गठित की गई। बताया जाता है कि सभी पक्षों ने समिति के सामने अपने बयान दर्ज कराए हैं।
हालांकि, तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ितों का कहना है कि जिनके खिलाफ शिकायत की गई है, वे खुलेआम घूम रहे हैं।
द वायर हिंदी से बातचीत में सिंह ने कहा कि प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण उन्होंने मीडिया का सहारा लिया। 5 फरवरी को कांग्रेस नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि प्रशासन जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार करने को कह रहा है।
उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पढ़ना मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी पार्टी खुलेआम घूम रही है और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कुमार और महाराणा को बचा रहा है और ABVP से उनके संबंधों के कारण कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने UGC के जातिगत भेदभाव और यौन उत्पीड़न से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया। न ही SC/ST छात्रों के लिए गठित शिकायत निवारण समिति या समान अवसर प्रकोष्ठ को सक्रिय किया गया।
सिंह के अनुसार, 29 जनवरी को उनका बयान दर्ज किया गया और समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने समिति के सदस्य और SC/ST सेल के संपर्क अधिकारी राजेश कुमार मकवाना पर भी भेदभाव का आरोप लगाया।
मकवाना ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कुमार और महाराणा का नाम किसी शिकायत में आया है। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं SC/ST समुदाय से हूं और निष्पक्ष जांच कर रहा हूं।” उनके अनुसार, यह दो समूहों के बीच झगड़ा था, न कि जाति-आधारित हिंसा।
एट्रोसिटीज एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई, आरोपियों के निलंबन, FIR दर्ज करने, CCTV फुटेज की फोरेंसिक जांच और किसी भी शैक्षणिक या प्रशासनिक उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि हिंसा से एक घंटे पहले CCTV कैमरे बंद कर दिए गए थे। प्रशासन ने इस आरोप को खारिज किया है।
CUG का रुख
CUG के कार्यवाहक कुलपति अतनु भट्टाचार्य के हवाले से विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि 26 जनवरी की रात छात्रों के बीच अनुशासनहीन झगड़ा हुआ था। मामला प्रॉक्टोरियल बोर्ड और फिर अनुशासन समिति को भेजा गया।
बाद में जातिगत भेदभाव का आरोप लगने पर मामला SC/ST सेल को भेजा गया। जांच के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि यह दो समूहों के बीच विवाद था, न कि जाति-आधारित भेदभाव।
शर्मा ने कहा कि अन्य छात्रों ने लिखित में दिया है कि उनके साथ जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ। CCTV कैमरों के बंद होने के आरोपों को भी उन्होंने निराधार बताया और कहा कि कैमरे 24 घंटे चालू रहते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में समय लगता है और बिना निष्कर्ष की प्रतीक्षा किए मीडिया में जाना उचित नहीं था।
महाराणा और कुमार के खिलाफ पूर्व आरोपों पर उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को पहले कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, और शिकायत दर्ज होने पर ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।
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साभार : जीसीयू
26-27 जनवरी की रात सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात (CUG) के साबरमती हॉस्टल में करीब तीस लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर छात्रों पर हमला किया। जिन छात्रों पर हमला हुआ, उनमें से एक दलित छात्र राजकरण सिंह ने आरोप लगाया है कि भीड़ ने उनके साथ मारपीट की, जाति-आधारित गालियां दीं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और यौन उत्पीड़न जैसी धमकियां दीं। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि हमलावर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई ABVP से जुड़े हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास दायर की गई औपचारिक शिकायत में भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सिंह सोशल मैनेजमेंट स्टडीज़ विभाग के प्रथम वर्ष के स्नातक छात्र हैं और साबरमती हॉस्टल में रहते हैं। 28 जनवरी को उन्होंने CUG के प्रोवोस्ट, रजिस्ट्रार और डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) को ईमेल भेजा, जिसमें कहा गया कि प्रवेश के पहले दिन से ही उन्हें लगातार उत्पीड़न और जातिगत अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, 26-27 जनवरी की दरमियानी रात की घटनाएं लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न का परिणाम थीं।
भीड़ हॉस्टल में घुस गई
सिंह के अनुसार, 26 जनवरी की रात करीब 11:30 बजे, कर्फ्यू के बावजूद कुछ डे-स्कॉलर छात्रों समेत भीड़ अवैध रूप से साबरमती हॉस्टल में घुस गई। भीड़ ने कथित तौर पर छात्रों पर हमला करना शुरू कर दिया और यह सुबह 3 बजे तक चलता रहा।
द वायर हिंदी ने अन्य छात्रों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सिंह का कहना है कि उन्होंने और अन्य छात्रों ने हालात को शांत करने की कोशिश की, लेकिन कुछ लोग झगड़े को भड़काते रहे। शिकायत में कई छात्रों और शोधार्थियों के नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं।
PhD स्कॉलर मुन्ना कुमार पर अत्यंत अपमानजनक और जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर कहा, “हम तुम्हारे मुंह में पेशाब करेंगे।”
शिकायत के मुताबिक, कुमार ने सिंह को निकालने और “उसका करियर बर्बाद करने” की धमकी दी।
जर्मन स्टडीज़ के तृतीय वर्ष के एक छात्र पर मारपीट और गंदी गालियां देने का आरोप है। चाइनीज़ स्टडीज़ विभाग के दो छात्रों पर गाली-गलौज, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने और धमकाने का आरोप है।
शिकायत में कहा गया है कि चाइनीज़ स्टडीज़ कार्यक्रम के प्रथम वर्ष के एक छात्र ने मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। उसने कथित तौर पर सिंह से कहा, “तुम लोग हॉस्टल में फ्री में रहते हो; हम तुम्हें पैसे देते हैं और खाना खिलाते हैं।” उसने शिकायतकर्ता को “छोटा” और “नीची जाति” का भी कहा।
डॉक्टरेट छात्र टप्पू महाराणा पर आरोप है कि वह छात्रों को उकसा रहा था, झगड़े को बढ़ा रहा था और जातिसूचक गालियां दे रहा था।
पीड़ित का कहना है कि आरोपियों में से एक मुन्ना कुमार यूनिवर्सिटी में ABVP का पूर्व अध्यक्ष था और कई अन्य RSS से जुड़े थे।
‘दूसरी पार्टी आजाद घूम रही है’
27 जनवरी को पीड़ित छात्रों ने अपने-अपने विभागाध्यक्षों (HOD) को इसकी जानकारी दी और औपचारिक शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद एक आंतरिक समिति गठित की गई। बताया जाता है कि सभी पक्षों ने समिति के सामने अपने बयान दर्ज कराए हैं।
हालांकि, तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ितों का कहना है कि जिनके खिलाफ शिकायत की गई है, वे खुलेआम घूम रहे हैं।
द वायर हिंदी से बातचीत में सिंह ने कहा कि प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण उन्होंने मीडिया का सहारा लिया। 5 फरवरी को कांग्रेस नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि प्रशासन जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार करने को कह रहा है।
उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पढ़ना मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी पार्टी खुलेआम घूम रही है और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कुमार और महाराणा को बचा रहा है और ABVP से उनके संबंधों के कारण कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने UGC के जातिगत भेदभाव और यौन उत्पीड़न से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया। न ही SC/ST छात्रों के लिए गठित शिकायत निवारण समिति या समान अवसर प्रकोष्ठ को सक्रिय किया गया।
सिंह के अनुसार, 29 जनवरी को उनका बयान दर्ज किया गया और समिति की तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने समिति के सदस्य और SC/ST सेल के संपर्क अधिकारी राजेश कुमार मकवाना पर भी भेदभाव का आरोप लगाया।
मकवाना ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कुमार और महाराणा का नाम किसी शिकायत में आया है। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं SC/ST समुदाय से हूं और निष्पक्ष जांच कर रहा हूं।” उनके अनुसार, यह दो समूहों के बीच झगड़ा था, न कि जाति-आधारित हिंसा।
एट्रोसिटीज एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई, आरोपियों के निलंबन, FIR दर्ज करने, CCTV फुटेज की फोरेंसिक जांच और किसी भी शैक्षणिक या प्रशासनिक उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि हिंसा से एक घंटे पहले CCTV कैमरे बंद कर दिए गए थे। प्रशासन ने इस आरोप को खारिज किया है।
CUG का रुख
CUG के कार्यवाहक कुलपति अतनु भट्टाचार्य के हवाले से विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि 26 जनवरी की रात छात्रों के बीच अनुशासनहीन झगड़ा हुआ था। मामला प्रॉक्टोरियल बोर्ड और फिर अनुशासन समिति को भेजा गया।
बाद में जातिगत भेदभाव का आरोप लगने पर मामला SC/ST सेल को भेजा गया। जांच के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि यह दो समूहों के बीच विवाद था, न कि जाति-आधारित भेदभाव।
शर्मा ने कहा कि अन्य छात्रों ने लिखित में दिया है कि उनके साथ जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ। CCTV कैमरों के बंद होने के आरोपों को भी उन्होंने निराधार बताया और कहा कि कैमरे 24 घंटे चालू रहते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में समय लगता है और बिना निष्कर्ष की प्रतीक्षा किए मीडिया में जाना उचित नहीं था।
महाराणा और कुमार के खिलाफ पूर्व आरोपों पर उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को पहले कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, और शिकायत दर्ज होने पर ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।
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