रैगिंग और जातिगत भेदभाव के आरोप, दलित छात्रा की मौत से हिमाचल में गुस्सा, “मेरी बेटी को नफरत ने मारा”

Written by sabrang india | Published on: January 5, 2026
पीड़ित परिवार ने रैगिंग, जातिगत भेदभाव और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। लुधियाना में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हुई। वहीं यूजीसी ने फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की।



हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 19 वर्षीय एक कॉलेज छात्रा की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। रैगिंग और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से जुड़ा यह मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (तथ्य अन्वेषण समिति) का गठन किया है और स्पष्ट किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यूजीसी ने दोहराया कि छात्रों की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है और इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज के द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाली छात्रा कथित रूप से लगातार रैगिंग और यौन उत्पीड़न की शिकार रही। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं ने उसे गहरे मानसिक सदमे में डाल दिया था, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, छात्रा के साथ दुर्व्यवहार की मुख्य घटना 18 सितंबर 2025 को हुई थी। पिता विक्रम कुमार ने आरोप लगाया कि उस दिन उनकी बेटी के साथ तीन अन्य छात्राओं ने मारपीट की और उसे धमकाया। इसके अलावा, उन्होंने कॉलेज के एक प्रोफेसर पर भी बेटी के साथ अभद्र व्यवहार और अश्लील हरकतें करने का गंभीर आरोप लगाया है।

शिकायत में कहा गया है कि इन घटनाओं ने छात्रा को भयभीत कर दिया और वह अवसाद (डिप्रेशन) में चली गई। कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी सेहत में सुधार नहीं हुआ और अंततः 26 दिसंबर 2025 को लुधियाना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

इंसाफ की गुहार लगाते माता-पिता

अपनी बेटी की मौत के बाद पिता विक्रम कुमार और मां रितु गहरे सदमे में हैं। विक्रम कुमार ने कहा, “मेरी बेटी अब हमारे बीच नहीं है, मुझे सिर्फ न्याय चाहिए। जो आरोपी छात्राएं और प्रोफेसर इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। मेरी बच्ची के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए।”

मां रितु ने नम आंखों से कहा, “मैं नहीं चाहती कि कोई निर्दोष फंसे, लेकिन मैं निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करती हूं। हमारे पास उसकी सभी मेडिकल रिपोर्ट्स मौजूद हैं। मुझे मेरी बेटी के लिए न्याय चाहिए।”

सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी शिकायत

मृतका के पिता ने बताया कि बेटी की बीमारी और अचानक मौत के सदमे के कारण परिवार तुरंत पुलिस के पास नहीं जा सका। हालांकि, रैगिंग और उत्पीड़न से जुड़े मामले में 20 दिसंबर को ‘सीएम हेल्पलाइन’ के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। अब परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। तीन छात्राओं और एक प्रोफेसर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थानों (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

जातिगत भेदभाव का आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले ने अब सामाजिक और राजनीतिक रूप भी ले लिया है। चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से थी, इसलिए इसमें जातिगत भेदभाव की आशंका भी जताई जा रही है। सीपीआई (एम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिमला में पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने पुलिस कार्रवाई में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डीजीपी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में की जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

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