CIC ने नोटबंदी से जुड़ी जानकारियों को साझा करने का दिया आदेश

Published on: May 29, 2017
केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि नोटबंदी से जुड़े हर सरकारी विभाग का कर्तव्य है कि वह इस बड़े कदम के पीछे के सभी प्रासंगिक तथ्यों एवं कारणों की जानकारी दें। सूचना आयुक्त श्रीधर आचायरुलु ने नोटबंदी के निर्णय को लेकर सूचना के अभाव पर पारदर्शिता पैनल की ओर से संभवत।

नोटबंदी

पीटीआई की ख़बर के मुताबिक, पहली बार टिप्पणी करते हुए कहा कि सूचना को रोके रखने से अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा होंगी। उन्होंने ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली का जिक्र करते हुए कहा, “कानून के शासन में और एक लोकतांत्रिक देश में नोटबंदी जैसे सार्वजनिक मामले के चारों ओर लोहे के ऐसे किले बनाने के नजरिए को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है, जिन्हें ‘बाहुबली’ भी नहीं तोड़ पाये।”
 
यह बयान ऐसे समय में महत्व रखता है जब प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने नोटबंदी के पीछे के कारणों संबंधी जानकारी मांगने वाली आरटीआई याचिकाओं को खारिज किया है। गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 1000 एवं 500 रपए के पुराने नोट चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की थी।
 
आचायरुलु ने आरटीआई प्रार्थी रामस्वरूप के मामले पर निर्णय सुनाते हुए यह बात कही।रामस्वरूप ने कुल बदली गई मुद्रा, इसे बदलने वाले लोगों और मुद्रा बदलने के लिए अपने पहचान पत्र मुहैया कराने वाले उपभोक्ताओं की संख्या के बारे में पिंटो पार्क वायु सेना इलाके के डाकघर से सूचना मांगी थी। डाक विभाग ने दावा किया कि उसके पास समेकित रूप में सूचना नहीं है।
 
आचायरुलु ने सूचना मुहैया कराने का विभाग को आदेश दिया और कहा, “सभी सरकारी प्राधिकारियों की यह नैतिक, संवैधानिक, आरटीआई आधारित लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है कि वह नोटबंदी से प्रभावित हुए हर नागरिक को इस संबंधी सूचना, इसके कारण, प्रभाव और यदि कोई नकारात्मक असर पड़ा है तो उसके लिए उठाए गए उपचारात्मक कदमों की जानकारी दे।”

Courtesy: Janta Ka Reporter

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