2019 से अब तक सामने आए नाबालिग लड़कियों के लापता होने के आधे से अधिक मामले अभी भी अनसुलझे हैं। ट्रिब्यून अखबार ने आरटीआई (RTI) के जरिए लापता महिलाओं और लड़कियों से जुड़े आंकड़े हासिल किए थे।

प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: न्यूजलॉन्ड्री
2019 और 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में 16,000 से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां लापता हो गईं, जिनमें से 4,271 का अभी तक कोई पता नहीं चला है। ट्रिब्यून ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया। अखबार ने ये आंकड़े 'सूचना का अधिकार' (RTI) के जरिए हासिल किए हैं। इस रिपोर्ट में 2019 से पहले लापता हुए लोगों के आंकड़ों का जिक्र नहीं है।
आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 से जून 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में 14,593 वयस्क महिलाएं लापता हुईं। इनमें से 11,338 का पता लगा लिया गया, जबकि 3,255 अभी भी लापता हैं।
इनसे यह भी पता चलता है कि 2019 से अगस्त 2026 के बीच 1,804 नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 788 का पता चल गया, जबकि 1,016 अभी भी लापता हैं।
ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, "कुल मिलाकर, अधिकारियों ने लापता हुई 16,397 महिलाओं और लड़कियों में से 12,126 का पता लगा लिया है, लेकिन 26 प्रतिशत से ज्यादा मामले अभी भी अनसुलझे हैं।"
ट्रिब्यून ने यह RTI अर्जी जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग के पास दायर की थी। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलकर 'केंद्र शासित प्रदेश' कर दिया गया था। इस केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस व्यवस्था नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।
जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग
जम्मू-कश्मीर में रोज़मर्रा की पुलिसिंग का काम केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस बल द्वारा किया जाता है। 'द वायर' ने जुलाई 2024 में एक रिपोर्ट दी थी कि जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विपक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा पुलिस व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेने पर आपत्ति जताई है। यह कदम बजटीय फेरबदल के जरिए उठाया गया, जो अनुच्छेद 370 और 35A को हटाए जाने और संसद से 'जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम' पारित होने के बाद संभव हो पाया था:
पहली बार, जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट गृह मंत्रालय (MHA) के अनुदानों में शामिल किया गया। इसमें केंद्रीय सशस्त्र बलों, इंटेलिजेंस ब्यूरो, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG), नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड, दिल्ली पुलिस और मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले अन्य संगठनों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट भी रखा गया... विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली लंबे समय तक इस पूर्व राज्य की कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखना चाहती है, और निकट भविष्य में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की संभावना बहुत कम है।
'द वायर' ने यह भी बताया था कि 2019 में, 'पुनर्गठन अधिनियम' के जरिए नई दिल्ली ने जम्मू-कश्मीर (पुलिस बल सहित) के लिए कानून बनाने की शक्ति अपने हाथ में ले ली थी। इस अधिनियम की धारा 28 में कहा गया है:
“इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, विधान सभा पूरे जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश या उसके किसी हिस्से के लिए कानून बना सकती है। यह कानून 'राज्य सूची' (State List) में शामिल विषयों पर हो सकता है, लेकिन इसमें प्रविष्टि 1 और 2- यानी 'लोक व्यवस्था' (Public Order) और 'पुलिस'- शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, यह भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के उन विषयों पर भी कानून बना सकती है, जो केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होते हैं।”
इस फैसले के समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट अपने नियंत्रण में इसलिए लिया है, ताकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन के पास विकासात्मक कार्यों के लिए अधिक धन उपलब्ध हो सके।
नए नियमों के तहत (12 जुलाई 2024 को जारी एक कार्यकारी आदेश के जरिए, जिसकी जानकारी 'द वायर' ने दी थी), 'ऑल इंडिया सर्विस' कैडर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाहों के कामकाज के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) को दे दिया गया है। नए नियमों के तहत 'एंटी-करप्शन ब्यूरो', लोक अभियोजन निदेशालय (Directorate of Public Prosecutions), जेलों और J&K फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को भी उपराज्यपाल (LG) के नियंत्रण में ला दिया गया है।
RTI में लापता महिलाओं का डेटा
J&K गृह विभाग द्वारा 'ट्रिब्यून' के साथ साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए- महिलाओं के मामले में 2,595 और लड़कियों के मामले में भी 2,595। इनमें से 493 महिलाओं का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है, जबकि उसी वर्ष लापता हुई 166 लड़कियां भी अभी तक नहीं मिल पाई हैं।
अगस्त 2019 से जून 2026 के बीच लड़कियों के लापता होने के रुझान का जिक्र करते हुए 'ट्रिब्यून' ने कहा, "ये आंकड़े विशेष रूप से चिंताजनक हैं, क्योंकि 2019 से अब तक लापता हुई नाबालिग लड़कियों के आधे से अधिक मामले अभी भी अनसुलझे हैं।"
इस रिपोर्ट में 2024 के लिए 'नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' (NCRB) के डेटा का भी हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, केवल उसी वर्ष BNS की धारा 87 के तहत महिलाओं के अपहरण, उन्हें अगवा करने या शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से फुसलाने के 1,202 मामले दर्ज किए गए।
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आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 से जून 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में 14,593 वयस्क महिलाएं लापता हुईं। इनमें से 11,338 का पता लगा लिया गया, जबकि 3,255 अभी भी लापता हैं।
इनसे यह भी पता चलता है कि 2019 से अगस्त 2026 के बीच 1,804 नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 788 का पता चल गया, जबकि 1,016 अभी भी लापता हैं।
ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, "कुल मिलाकर, अधिकारियों ने लापता हुई 16,397 महिलाओं और लड़कियों में से 12,126 का पता लगा लिया है, लेकिन 26 प्रतिशत से ज्यादा मामले अभी भी अनसुलझे हैं।"
ट्रिब्यून ने यह RTI अर्जी जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग के पास दायर की थी। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलकर 'केंद्र शासित प्रदेश' कर दिया गया था। इस केंद्र शासित प्रदेश में पुलिस व्यवस्था नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।
जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग
जम्मू-कश्मीर में रोज़मर्रा की पुलिसिंग का काम केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस बल द्वारा किया जाता है। 'द वायर' ने जुलाई 2024 में एक रिपोर्ट दी थी कि जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विपक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा पुलिस व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेने पर आपत्ति जताई है। यह कदम बजटीय फेरबदल के जरिए उठाया गया, जो अनुच्छेद 370 और 35A को हटाए जाने और संसद से 'जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम' पारित होने के बाद संभव हो पाया था:
पहली बार, जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट गृह मंत्रालय (MHA) के अनुदानों में शामिल किया गया। इसमें केंद्रीय सशस्त्र बलों, इंटेलिजेंस ब्यूरो, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG), नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड, दिल्ली पुलिस और मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले अन्य संगठनों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट भी रखा गया... विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली लंबे समय तक इस पूर्व राज्य की कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखना चाहती है, और निकट भविष्य में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की संभावना बहुत कम है।
'द वायर' ने यह भी बताया था कि 2019 में, 'पुनर्गठन अधिनियम' के जरिए नई दिल्ली ने जम्मू-कश्मीर (पुलिस बल सहित) के लिए कानून बनाने की शक्ति अपने हाथ में ले ली थी। इस अधिनियम की धारा 28 में कहा गया है:
“इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, विधान सभा पूरे जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश या उसके किसी हिस्से के लिए कानून बना सकती है। यह कानून 'राज्य सूची' (State List) में शामिल विषयों पर हो सकता है, लेकिन इसमें प्रविष्टि 1 और 2- यानी 'लोक व्यवस्था' (Public Order) और 'पुलिस'- शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, यह भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के उन विषयों पर भी कानून बना सकती है, जो केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होते हैं।”
इस फैसले के समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस का बजट अपने नियंत्रण में इसलिए लिया है, ताकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन के पास विकासात्मक कार्यों के लिए अधिक धन उपलब्ध हो सके।
नए नियमों के तहत (12 जुलाई 2024 को जारी एक कार्यकारी आदेश के जरिए, जिसकी जानकारी 'द वायर' ने दी थी), 'ऑल इंडिया सर्विस' कैडर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाहों के कामकाज के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) को दे दिया गया है। नए नियमों के तहत 'एंटी-करप्शन ब्यूरो', लोक अभियोजन निदेशालय (Directorate of Public Prosecutions), जेलों और J&K फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को भी उपराज्यपाल (LG) के नियंत्रण में ला दिया गया है।
RTI में लापता महिलाओं का डेटा
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अगस्त 2019 से जून 2026 के बीच लड़कियों के लापता होने के रुझान का जिक्र करते हुए 'ट्रिब्यून' ने कहा, "ये आंकड़े विशेष रूप से चिंताजनक हैं, क्योंकि 2019 से अब तक लापता हुई नाबालिग लड़कियों के आधे से अधिक मामले अभी भी अनसुलझे हैं।"
इस रिपोर्ट में 2024 के लिए 'नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' (NCRB) के डेटा का भी हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, केवल उसी वर्ष BNS की धारा 87 के तहत महिलाओं के अपहरण, उन्हें अगवा करने या शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से फुसलाने के 1,202 मामले दर्ज किए गए।
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