इंटरनेट यूज़र्स ने इस घटना को ‘सरासर आतंकवाद’ बताया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में अली नाम के एक मुस्लिम युवक को दिन-दहाड़े हिंदू पुरुषों के एक समूह ने कथित तौर पर सड़क पर रोककर डंडों से पीटा। इस हमले का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
क्लेरिओन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है कि अखिलेश, विकास गौतम और रोहित पासवान नाम के तीन लोगों ने साइकिल से जा रहे अली को रास्ते में रोका और डंडों से उस पर हमला किया।
बताया जा रहा है कि यह घटना पारसपुर पुलिस स्टेशन इलाके के अंतर्गत आने वाले छत्रपाल पुरवा, गौरीगंज में हुई।
वीडियो में अली पर सड़क पर हमला होते हुए दिख रहा है, जबकि आस-पास दो लोग मौजूद हैं। वीडियो के साथ चल रहे दावों के मुताबिक, हमलावरों ने खुद ही इस हमले को रिकॉर्ड किया और बाद में अपना दबदबा दिखाने के लिए इसे शेयर किया।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है और इस हमले की कड़ी आलोचना हो रही है।
एक यूज़र ने लिखा, “यह सरासर आतंकवाद है। इन लोगों को किसी को इस तरह पीटने का अधिकार किसने दिया?”
एक दूसरे यूज़र ने लिखा, “हमला इतना गंभीर था कि इसका वीडियो बनाना जरूरी समझा गया। अब सवाल यह है कि क्या कानून की नजर में इस वीडियो को सबूत माना जाएगा या सिर्फ सोशल मीडिया कंटेंट?”
संबंधित पुलिस अधिकारियों को टैग करते हुए एक और यूज़र ने लिखा, “इन गुंडों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने की वजह यह है कि ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। सर, गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और सख्त कार्रवाई करें।”
इस बीच, गोंडा पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस मामले में पारसपुर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने कहा कि अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
शामिल लोगों की पहचान और धार्मिक जुड़ाव, साथ ही कथित टकराव की परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि ‘क्लेरिओन इंडिया’ द्वारा नहीं की जा सकी। घटना से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
पश्चिम बंगाल में एक्टिविस्ट पर हमला
ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल में धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहने हुए एक युवक की भीड़ ने बुरी तरह पिटाई कर दी। 40 साल के एक थिएटर एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया है कि नॉर्थ 24 परगना जिले में ट्रेन में कुछ लोगों ने उनकी धार्मिक पहचान के बारे में पूछने के बाद उन पर हमला किया और उन्हें पीटा। यह घटना कथित तौर पर 28 जुलाई की सुबह श्यामनगर रेलवे स्टेशन के पास हुई। एक्टिविस्ट शुभंकर दासशर्मा ने यह भी दावा किया है कि ईमेल के जरिए पुलिस को घटना की जानकारी देने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
शुभंकर के हवाले से द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 28 जुलाई को रात करीब 12 बजे थिएटर परफॉर्मेंस में हिस्सा लेने के बाद वह ट्रेन से घर लौट रहे थे। तभी श्यामनगर स्टेशन के पास चार अनजान लोगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने बताया कि काले कुर्ते और पजामे में उन्हें देखकर उन लोगों ने उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा। शुभंकर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान बताने से इनकार किया, तो उन लोगों ने उन्हें खींचना और पीटना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने फेसबुक पोस्ट में घटना की जानकारी दी।
उन्होंने लिखा, “सबसे पहले उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं मुस्लिम हूं। मैंने जवाब दिया, ‘अगर मैं मुस्लिम हूं तो क्या हुआ?’ मेरा मानना है कि एक आजाद और संप्रभु देश में मैं अजनबियों को अपनी धार्मिक पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं हूं। फिर उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया और बार-बार पूछा कि क्या मैं मुस्लिम हूं। मैंने झुकने से इनकार कर दिया और उनसे कहा कि मैं मुस्लिम हूं। हमला और तेज हो गया।”
एक्टिविस्ट का गंभीर चोटों का दावा
उनके मुताबिक, हमलावरों ने बार-बार उनके सिर, आंखों, छाती और कानों पर घूंसे मारे, उनका कुर्ता फाड़ दिया, उन्हें जमीन पर पटक दिया और हमले के दौरान धार्मिक नारे भी लगाए। उन्होंने आगे दावा किया कि कुछ देर के लिए वे बेहोश हो गए थे, लेकिन बाद में उन्हें होश आया और वे किसी तरह घर लौटे। अगले तीन दिनों तक वे घर पर ही रहे और तुरंत कोई मेडिकल मदद नहीं ली, क्योंकि वे अकेले थे और उनकी मदद के लिए परिवार का कोई सदस्य नहीं था। हालांकि, जब उनकी हालत बिगड़ी तो उन्होंने 2 अगस्त को बैरकपुर के बीएन बोस सब-डिविजनल हॉस्पिटल में इलाज कराया।
शुभंकर के मुताबिक, अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी आंखों, कानों और पसलियों में चोटें पाईं और उन्हें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद 3 और 4 अगस्त को उन्होंने ऑप्थल्मोलॉजी (आंखों का विभाग), ऑर्थोपेडिक्स (हड्डियों का विभाग) और ईएनटी (कान-नाक-गले का विभाग) में इलाज करवाया। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल जांच में आंख में चोट और कान का पर्दा फटने की बात सामने आई।
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क्लेरिओन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है कि अखिलेश, विकास गौतम और रोहित पासवान नाम के तीन लोगों ने साइकिल से जा रहे अली को रास्ते में रोका और डंडों से उस पर हमला किया।
बताया जा रहा है कि यह घटना पारसपुर पुलिस स्टेशन इलाके के अंतर्गत आने वाले छत्रपाल पुरवा, गौरीगंज में हुई।
वीडियो में अली पर सड़क पर हमला होते हुए दिख रहा है, जबकि आस-पास दो लोग मौजूद हैं। वीडियो के साथ चल रहे दावों के मुताबिक, हमलावरों ने खुद ही इस हमले को रिकॉर्ड किया और बाद में अपना दबदबा दिखाने के लिए इसे शेयर किया।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है और इस हमले की कड़ी आलोचना हो रही है।
एक यूज़र ने लिखा, “यह सरासर आतंकवाद है। इन लोगों को किसी को इस तरह पीटने का अधिकार किसने दिया?”
एक दूसरे यूज़र ने लिखा, “हमला इतना गंभीर था कि इसका वीडियो बनाना जरूरी समझा गया। अब सवाल यह है कि क्या कानून की नजर में इस वीडियो को सबूत माना जाएगा या सिर्फ सोशल मीडिया कंटेंट?”
संबंधित पुलिस अधिकारियों को टैग करते हुए एक और यूज़र ने लिखा, “इन गुंडों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने की वजह यह है कि ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। सर, गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और सख्त कार्रवाई करें।”
इस बीच, गोंडा पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इस मामले में पारसपुर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने कहा कि अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
शामिल लोगों की पहचान और धार्मिक जुड़ाव, साथ ही कथित टकराव की परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि ‘क्लेरिओन इंडिया’ द्वारा नहीं की जा सकी। घटना से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
पश्चिम बंगाल में एक्टिविस्ट पर हमला
ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल में धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहने हुए एक युवक की भीड़ ने बुरी तरह पिटाई कर दी। 40 साल के एक थिएटर एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया है कि नॉर्थ 24 परगना जिले में ट्रेन में कुछ लोगों ने उनकी धार्मिक पहचान के बारे में पूछने के बाद उन पर हमला किया और उन्हें पीटा। यह घटना कथित तौर पर 28 जुलाई की सुबह श्यामनगर रेलवे स्टेशन के पास हुई। एक्टिविस्ट शुभंकर दासशर्मा ने यह भी दावा किया है कि ईमेल के जरिए पुलिस को घटना की जानकारी देने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
शुभंकर के हवाले से द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 28 जुलाई को रात करीब 12 बजे थिएटर परफॉर्मेंस में हिस्सा लेने के बाद वह ट्रेन से घर लौट रहे थे। तभी श्यामनगर स्टेशन के पास चार अनजान लोगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने बताया कि काले कुर्ते और पजामे में उन्हें देखकर उन लोगों ने उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा। शुभंकर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान बताने से इनकार किया, तो उन लोगों ने उन्हें खींचना और पीटना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने फेसबुक पोस्ट में घटना की जानकारी दी।
उन्होंने लिखा, “सबसे पहले उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं मुस्लिम हूं। मैंने जवाब दिया, ‘अगर मैं मुस्लिम हूं तो क्या हुआ?’ मेरा मानना है कि एक आजाद और संप्रभु देश में मैं अजनबियों को अपनी धार्मिक पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं हूं। फिर उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया और बार-बार पूछा कि क्या मैं मुस्लिम हूं। मैंने झुकने से इनकार कर दिया और उनसे कहा कि मैं मुस्लिम हूं। हमला और तेज हो गया।”
एक्टिविस्ट का गंभीर चोटों का दावा
उनके मुताबिक, हमलावरों ने बार-बार उनके सिर, आंखों, छाती और कानों पर घूंसे मारे, उनका कुर्ता फाड़ दिया, उन्हें जमीन पर पटक दिया और हमले के दौरान धार्मिक नारे भी लगाए। उन्होंने आगे दावा किया कि कुछ देर के लिए वे बेहोश हो गए थे, लेकिन बाद में उन्हें होश आया और वे किसी तरह घर लौटे। अगले तीन दिनों तक वे घर पर ही रहे और तुरंत कोई मेडिकल मदद नहीं ली, क्योंकि वे अकेले थे और उनकी मदद के लिए परिवार का कोई सदस्य नहीं था। हालांकि, जब उनकी हालत बिगड़ी तो उन्होंने 2 अगस्त को बैरकपुर के बीएन बोस सब-डिविजनल हॉस्पिटल में इलाज कराया।
शुभंकर के मुताबिक, अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी आंखों, कानों और पसलियों में चोटें पाईं और उन्हें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद 3 और 4 अगस्त को उन्होंने ऑप्थल्मोलॉजी (आंखों का विभाग), ऑर्थोपेडिक्स (हड्डियों का विभाग) और ईएनटी (कान-नाक-गले का विभाग) में इलाज करवाया। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल जांच में आंख में चोट और कान का पर्दा फटने की बात सामने आई।
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