मंगलवार दोपहर मस्जिद के मुख्य द्वार पर एक नई नोटिस लगाई गई, जिसमें रेलवे प्रशासन द्वारा 13 जून को जारी नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने की बात कही गई थी।

फोटो साभार : बीबीसी
वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर नई नोटिस लगाए जाने के मामले में मंगलवार को नया मोड़ सामने आया। मस्जिद परिसर में एक नई नोटिस चस्पा की गई, जिसमें रेलवे द्वारा पूर्व में जारी नोटिस को निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद रेलवे अधिकारी वहां पहुंचे और उक्त नोटिस को हटवा दिया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार दोपहर मस्जिद के मुख्य द्वार पर एक नई नोटिस लगाई गई, जिसमें रेलवे प्रशासन द्वारा 13 जून को जारी नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने की बात कही गई थी।
नोटिस लगाए जाने की खबर फैलते ही मस्जिद कमेटी के सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंचने लगे। हालांकि, शाम होते-होते मामला और पेचीदा हो गया। रेलवे अधिकारी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और मस्जिद पर लगी नई नोटिस को हटवा दिया।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
ज्ञात हो कि वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और पुनर्विकास परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया था।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने गुरुवार को बताया था कि उन्होंने काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित गंज शहीदा मस्जिद की दीवार पर एक नोटिस चस्पा किया है।
नोटिस में स्टेशन विस्तार परियोजना और प्रस्तावित निर्माण कार्यों के मद्देनज़र 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा गया था।
पीटीआई के अनुसार, कैंट रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता ने कहा था कि स्टेशन के विस्तार और प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए काशी रेलवे स्टेशन के आसपास की रेलवे भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना आवश्यक है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद की प्रबंधन समिति ‘इंतज़ामिया मस्जिद कमेटी’ ने इस नोटिस को गैर-कानूनी बताते हुए कहा है कि वह इसे अदालत में चुनौती देगी।
बीबीसी से बातचीत में अंजुमन इंतज़ामिया मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने कहा, “यह मस्जिद लगभग एक हजार वर्ष पुरानी है। इसका निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था। इसका नाम गंज शहीदा इसलिए पड़ा क्योंकि यहां दफ्न कई लोग स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे थे। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।”
उन्होंने आगे कहा, “रेलवे यहां 1887 में आया था। हम रेलवे के नोटिस का विधिक जवाब दे रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट से भी हमें आश्वासन मिला है। तीन दिन पहले हमारी उनसे मुलाकात हुई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मस्जिद को जबरन नहीं तोड़ा जाएगा।”
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वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर नई नोटिस लगाए जाने के मामले में मंगलवार को नया मोड़ सामने आया। मस्जिद परिसर में एक नई नोटिस चस्पा की गई, जिसमें रेलवे द्वारा पूर्व में जारी नोटिस को निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद रेलवे अधिकारी वहां पहुंचे और उक्त नोटिस को हटवा दिया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार दोपहर मस्जिद के मुख्य द्वार पर एक नई नोटिस लगाई गई, जिसमें रेलवे प्रशासन द्वारा 13 जून को जारी नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने की बात कही गई थी।
नोटिस लगाए जाने की खबर फैलते ही मस्जिद कमेटी के सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंचने लगे। हालांकि, शाम होते-होते मामला और पेचीदा हो गया। रेलवे अधिकारी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और मस्जिद पर लगी नई नोटिस को हटवा दिया।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
ज्ञात हो कि वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और पुनर्विकास परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया था।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने गुरुवार को बताया था कि उन्होंने काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित गंज शहीदा मस्जिद की दीवार पर एक नोटिस चस्पा किया है।
नोटिस में स्टेशन विस्तार परियोजना और प्रस्तावित निर्माण कार्यों के मद्देनज़र 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा गया था।
पीटीआई के अनुसार, कैंट रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता ने कहा था कि स्टेशन के विस्तार और प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए काशी रेलवे स्टेशन के आसपास की रेलवे भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना आवश्यक है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद की प्रबंधन समिति ‘इंतज़ामिया मस्जिद कमेटी’ ने इस नोटिस को गैर-कानूनी बताते हुए कहा है कि वह इसे अदालत में चुनौती देगी।
बीबीसी से बातचीत में अंजुमन इंतज़ामिया मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने कहा, “यह मस्जिद लगभग एक हजार वर्ष पुरानी है। इसका निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था। इसका नाम गंज शहीदा इसलिए पड़ा क्योंकि यहां दफ्न कई लोग स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे थे। इस कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।”
उन्होंने आगे कहा, “रेलवे यहां 1887 में आया था। हम रेलवे के नोटिस का विधिक जवाब दे रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट से भी हमें आश्वासन मिला है। तीन दिन पहले हमारी उनसे मुलाकात हुई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मस्जिद को जबरन नहीं तोड़ा जाएगा।”
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