मणिपुर में बढ़ते तनाव के बीच, लापता छह नागा पुरुषों के शव मिलने के बाद JNIMS अस्पताल के बाहर हिंसक झड़पें हुईं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

फोटो साभार : न्यूजग्राम
मणिपुर की राजधानी इंफाल में गुरुवार, 11 जून 2026 की सुबह जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। यह विरोध तब शुरू हुआ जब पोस्टमार्टम के लिए छह मृत नागा पुरुषों के शव इस चिकित्सा संस्थान में लाए गए। ये छह नागा पुरुष 13 मई 2026 से लापता थे। आरोप है कि उनका लेइलोन वाइफेई गांव से अपहरण कर लिया गया था।
नागा पुरुषों के शव लेने के लिए अस्पताल परिसर के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए। भीड़ की संख्या और बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।
छह लापता नागा पुरुषों के शव मिलने के बाद विरोध
न्यूजग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शवों के अस्पताल पहुंचने की प्रतीक्षा की जा रही थी, तभी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच टकराव हो गया। स्थिति तब हिंसक हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और जवाब में अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
झड़प के दौरान इंफाल पूर्व के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शिवानंद सर्वे के घायल होने की भी खबर है। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षा कर्मी भी घायल हुए। बाद में भीड़ धीरे-धीरे छंट गई और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।
हालात सामान्य होने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए JNIMS के शवगृह में ले जाया गया।
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, खोजी कुत्तों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और असम राइफल्स के अधिकारियों की सहायता से 24 घंटे से अधिक समय तक चले व्यापक तलाशी अभियान के बाद शव बरामद किए गए। शव कांगपोकपी जिले के सैतु-गामफाजोल उपखंड में स्थित खराम वाइफेई गांव के निकट एक जंगली क्षेत्र से मिले, जो मुख्य रूप से कुकी-जो समुदाय की बस्ती है।
सूत्रों के अनुसार, शव बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शवों की स्थिति से प्रताड़ना के संकेत भी मिले हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मणिपुर पुलिस ने कहा है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी विज़ुनामेई ने कहा कि शव मिलने के बाद समुदाय "पूरी तरह सदमे" में है। अस्पताल परिसर में मौजूद विज़ुनामेई ने पत्रकारों से कहा, "हमें उन छह लोगों के शव मिले हैं जिनका 13 मई को अपहरण कर लिया गया था। यह हमारे लिए बहुत बड़ा सदमा है और पूरा समुदाय दुख में डूबा हुआ है।"
हालांकि उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और समुदाय के नेताओं ने अभी तक शवों की औपचारिक पहचान नहीं की है।
उन्होंने कहा, "हम अभी चेहरों की पहचान और अन्य प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि ये शव वास्तव में हमारे लापता छह लोगों के ही हैं।"
विज़ुनामेई ने कहा कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन और समुदाय के नेता आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे।
मणिपुर बंधक संकट: घटनाक्रम
कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच तनाव तब बढ़ गया जब 13 मई 2026 को कुकी-जो समुदाय के तीन चर्च नेताओं की कथित तौर पर सशस्त्र नागा उग्रवादियों द्वारा हत्या कर दी गई। इसके बाद दोनों समुदायों के 38 से अधिक लोगों के अपहरण की घटनाएं सामने आईं।
अधिकारियों और समुदाय के नेताओं के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई 2026 को दोनों समुदायों के लगभग 28 बंधकों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद सेल्सियन पादरियों सहित कुछ अन्य बंधकों को भी मुक्त कराया गया।
9 जून 2026 को कुकी-जो समुदाय के 14 बंधकों को नागा सशस्त्र समूहों द्वारा रिहा किया गया था।
'उखरुल टाइम्स' के अनुसार, जिन छह नागा पुरुषों के शव मिलने की बात कही जा रही है, उनका अपहरण 13 मई 2026 को उस समय किया गया था जब वे लेइलोन वाइफेई गांव से होकर अपने घर लौट रहे थे। उस घटना में पुरुषों और बच्चों सहित कुल 18 लोगों का अपहरण किया गया था, लेकिन इन छह नागा पुरुषों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया था।
समाचार पोर्टल के अनुसार, अपहृत छह नागा व्यक्तियों की पहचान केनपिबोउ (पादरी), फेनरोंगवी थियुमाई, रेवरेंड डॉ. मनु थियुमाई, दिलीप थियुमाई, कालीवांगबोउ अबोनमाई और सीएच. फेनरिलुंग के रूप में की गई है। हालांकि अभी यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद शव इन्हीं लोगों के हैं।
नागालैंड के मुख्यमंत्री ने जताया शोक
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने छह नागा पुरुषों के शव मिलने पर गहरा दुख व्यक्त किया और इस घटना की कड़ी निंदा की।
'एक्स' पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, "मैं उन छह नागा पुरुषों की दुखद मौत से बेहद दुखी हूं, जिनके शव आज मिले हैं। मैं इस जघन्य कृत्य की कड़ी निंदा करता हूं और उनके परिवारों, मित्रों तथा प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। किसी भी परिवार को ऐसा दर्द नहीं सहना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "यह हृदयविदारक त्रासदी हमें याद दिलाती है कि हिंसा अपने पीछे कितना गहरा दर्द और पीड़ा छोड़ जाती है। दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और उनके परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्राप्त हो।"
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मणिपुर की राजधानी इंफाल में गुरुवार, 11 जून 2026 की सुबह जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। यह विरोध तब शुरू हुआ जब पोस्टमार्टम के लिए छह मृत नागा पुरुषों के शव इस चिकित्सा संस्थान में लाए गए। ये छह नागा पुरुष 13 मई 2026 से लापता थे। आरोप है कि उनका लेइलोन वाइफेई गांव से अपहरण कर लिया गया था।
नागा पुरुषों के शव लेने के लिए अस्पताल परिसर के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए। भीड़ की संख्या और बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।
छह लापता नागा पुरुषों के शव मिलने के बाद विरोध
न्यूजग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शवों के अस्पताल पहुंचने की प्रतीक्षा की जा रही थी, तभी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच टकराव हो गया। स्थिति तब हिंसक हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और जवाब में अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
झड़प के दौरान इंफाल पूर्व के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शिवानंद सर्वे के घायल होने की भी खबर है। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारी और सुरक्षा कर्मी भी घायल हुए। बाद में भीड़ धीरे-धीरे छंट गई और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।
हालात सामान्य होने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए JNIMS के शवगृह में ले जाया गया।
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, खोजी कुत्तों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और असम राइफल्स के अधिकारियों की सहायता से 24 घंटे से अधिक समय तक चले व्यापक तलाशी अभियान के बाद शव बरामद किए गए। शव कांगपोकपी जिले के सैतु-गामफाजोल उपखंड में स्थित खराम वाइफेई गांव के निकट एक जंगली क्षेत्र से मिले, जो मुख्य रूप से कुकी-जो समुदाय की बस्ती है।
सूत्रों के अनुसार, शव बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शवों की स्थिति से प्रताड़ना के संकेत भी मिले हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मणिपुर पुलिस ने कहा है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी विज़ुनामेई ने कहा कि शव मिलने के बाद समुदाय "पूरी तरह सदमे" में है। अस्पताल परिसर में मौजूद विज़ुनामेई ने पत्रकारों से कहा, "हमें उन छह लोगों के शव मिले हैं जिनका 13 मई को अपहरण कर लिया गया था। यह हमारे लिए बहुत बड़ा सदमा है और पूरा समुदाय दुख में डूबा हुआ है।"
हालांकि उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और समुदाय के नेताओं ने अभी तक शवों की औपचारिक पहचान नहीं की है।
उन्होंने कहा, "हम अभी चेहरों की पहचान और अन्य प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि ये शव वास्तव में हमारे लापता छह लोगों के ही हैं।"
विज़ुनामेई ने कहा कि पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन और समुदाय के नेता आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे।
मणिपुर बंधक संकट: घटनाक्रम
कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच तनाव तब बढ़ गया जब 13 मई 2026 को कुकी-जो समुदाय के तीन चर्च नेताओं की कथित तौर पर सशस्त्र नागा उग्रवादियों द्वारा हत्या कर दी गई। इसके बाद दोनों समुदायों के 38 से अधिक लोगों के अपहरण की घटनाएं सामने आईं।
अधिकारियों और समुदाय के नेताओं के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई 2026 को दोनों समुदायों के लगभग 28 बंधकों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद सेल्सियन पादरियों सहित कुछ अन्य बंधकों को भी मुक्त कराया गया।
9 जून 2026 को कुकी-जो समुदाय के 14 बंधकों को नागा सशस्त्र समूहों द्वारा रिहा किया गया था।
'उखरुल टाइम्स' के अनुसार, जिन छह नागा पुरुषों के शव मिलने की बात कही जा रही है, उनका अपहरण 13 मई 2026 को उस समय किया गया था जब वे लेइलोन वाइफेई गांव से होकर अपने घर लौट रहे थे। उस घटना में पुरुषों और बच्चों सहित कुल 18 लोगों का अपहरण किया गया था, लेकिन इन छह नागा पुरुषों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया था।
समाचार पोर्टल के अनुसार, अपहृत छह नागा व्यक्तियों की पहचान केनपिबोउ (पादरी), फेनरोंगवी थियुमाई, रेवरेंड डॉ. मनु थियुमाई, दिलीप थियुमाई, कालीवांगबोउ अबोनमाई और सीएच. फेनरिलुंग के रूप में की गई है। हालांकि अभी यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद शव इन्हीं लोगों के हैं।
नागालैंड के मुख्यमंत्री ने जताया शोक
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने छह नागा पुरुषों के शव मिलने पर गहरा दुख व्यक्त किया और इस घटना की कड़ी निंदा की।
'एक्स' पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, "मैं उन छह नागा पुरुषों की दुखद मौत से बेहद दुखी हूं, जिनके शव आज मिले हैं। मैं इस जघन्य कृत्य की कड़ी निंदा करता हूं और उनके परिवारों, मित्रों तथा प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। किसी भी परिवार को ऐसा दर्द नहीं सहना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "यह हृदयविदारक त्रासदी हमें याद दिलाती है कि हिंसा अपने पीछे कितना गहरा दर्द और पीड़ा छोड़ जाती है। दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और उनके परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्राप्त हो।"
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