गुजरात: साबरकांठा के दलित परिवार कथित सामाजिक भेदभाव के चलते सामूहिक पलायन पर विचार कर रहे हैं

Written by sabrang india | Published on: May 19, 2026
एट्रोसिटी एक्ट के तहत कई बार शिकायतें और आवेदन देने के बावजूद गांव वालों का दावा है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे कई प्रभावित परिवार गांव से सामूहिक पलायन की चेतावनी देने को मजबूर हो गए हैं।



गुजरात के साबरकांठा जिले की तलोद तालुका के रूपल गांव से अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कथित सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है।

गुजरात समाचार के अनुसार, एट्रोसिटी एक्ट के तहत कई बार शिकायतें और आवेदन देने के बावजूद गांव वालों का दावा है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे कई प्रभावित परिवारों को गांव से सामूहिक पलायन की चेतावनी देने पर मजबूर होना पड़ा है।

समुदाय के सदस्यों के अनुसार, गांव के कुछ असामाजिक तत्व कथित तौर पर उन्हें उनके मूल संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रहे हैं और उनके साथ लगातार सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और प्रशासनिक भेदभाव कर रहे हैं।

समुदाय के नेताओं ने दावा किया कि इस मामले के संबंध में एट्रोसिटी एक्ट के तहत कम से कम छह शिकायतें और कई लिखित आवेदन अधिकारियों को पहले ही सौंपे जा चुके हैं।

गांव वालों ने बताया कि पहले आपसी समझौते के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कथित तौर पर आश्वासनों पर अमल नहीं होने के कारण स्थिति फिर बिगड़ गई, जिससे गांव में दोबारा तनाव पैदा हो गया।

रविवार को प्रभावित समुदाय के सदस्यों ने हिम्मतनगर स्थित जिला कार्यालय में रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षा की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न तो न्याय मिला और न ही सुरक्षा। वहीं, कई परिवार अब गांव के भीतर एक तरह के “सामाजिक बहिष्कार” का सामना कर रहे हैं।

समुदाय के प्रतिनिधियों ने आगे आरोप लगाया कि लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे उनके पास अपना पुश्तैनी गांव छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ज्ञापन में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले सात दिनों के भीतर कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो अनुसूचित जाति समुदाय के परिवारों को रूपल गांव से सामूहिक रूप से पलायन करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर जाति-आधारित भेदभाव और जमीनी स्तर पर कानूनी सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इन आरोपों ने इस बात पर भी बहस छेड़ दी है कि कड़े सामाजिक न्याय कानूनों के तहत बार-बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद क्या अधिकारियों ने पर्याप्त कार्रवाई की है।

फिलहाल, जिला अधिकारियों की ओर से इन आरोपों या हस्तक्षेप की मांग पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

Related

यूपी : सहारनपुर में जमीन को लेकर ठाकुर और दलित गुटों के बीच झड़प, कई लोग घायल

जोधपुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी नेता ने लगाया जातिसूचक अपमान का आरोप

बाकी ख़बरें