'निजी अंगों में पेट्रोल डाला, जानवर की तरह पीटा': गुजरात के पत्रकार ने पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया

Written by sabrang india | Published on: March 30, 2026
पुलिस ने पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें 'ड्रामा' करार दिया है।



गुजरात के राजकोट में रहने वाले एक स्थानीय पत्रकार सुदेश वडेचा ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ काफी ज्यादती की गई। ‘खबर राजकोट की न्यूज’ नाम से एक ऑनलाइन मीडिया आउटलेट चलाने वाले वडेचा ने दावा किया कि राजकोट क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) जगदीश बांगड़वा और उनकी टीम ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और अमानवीय व्यवहार किया।

हालांकि, पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह से नकार दिया है और इन्हें "ड्रामा" बताया है।

‘द वायर’ से फोन पर बात करते हुए वडेचा ने बताया कि 22 मार्च को पुलिस ने उन्हें उनके घर से लगभग दो किलोमीटर दूर एक जगह से हिरासत में ले लिया था।

उन्होंने आरोप लगाया, "क्राइम ब्रांच के लोग मुझे बिना कुछ बताए अपने साथ ले गए। मेरे साथ कथित तौर पर रंगदारी मांगने के एक मामले को लेकर मारपीट की गई। उन्होंने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे गुप्तांगों में पेट्रोल डाल दिया। मुझे उल्टा लटकाकर जानवरों की तरह पीटा गया, जिससे मेरे कान का पर्दा फट गया, पैर टूट गया और पीठ व सिर पर गंभीर चोटें आईं।"

वडेचा के मुताबिक, उन्हें 23 मार्च को राजकोट सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया, "जब 24 घंटे बाद मुझे डिस्चार्ज किया गया, तो मेरी हालत और बिगड़ गई थी। मैं ‘108’ एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां भी पुलिस अधिकारी डॉक्टरों पर दबाव डाल रहे थे कि मुझे भर्ती न किया जाए। मुझे झूठे मामलों में फंसाने और मेरा घर गिरा देने की भी धमकी दी गई।"

पत्रकार ने कहा कि यह पूरा मामला असीम अगम नाम के एक बिल्डर से जुड़ा है, जिसकी अवैध निर्माण गतिविधियों के बारे में उन्होंने पहले रिपोर्ट की थी। उन्होंने दावा किया, "मेरे खिलाफ कोई ठोस शिकायत नहीं थी, फिर भी उसके कहने पर मुझे फंसाया गया और मुझ पर यह हमला किया गया।"

इस बीच, ‘द वायर’ से बात करते हुए राजकोट क्राइम ब्रांच के DCP बांगड़वा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

बांगड़वा ने ‘द वायर’ से कहा, "हमने उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट नहीं की है। वह एक अपराधी है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।"

DCP ने कुछ दस्तावेज भी साझा किए, जिनके अनुसार 2020 और 2025 के बीच वडेचा के खिलाफ आठ मामले दर्ज किए गए हैं; इनमें से ज्यादातर मामले शांति भंग करने और स्थानीय विवादों से जुड़े हैं। कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं ने बाद में सिफारिश की कि मामलों को खारिज कर दिया जाए। सबसे ताजा मामला 10 मार्च, 2026 का है, जिसमें ‘भाग्यलक्ष्मी स्क्रैप’ के मालिक भरतभाई विरजीभाई सागर ने वडेचा पर अपने “व्यावसायिक परिसर” का वीडियो बनाकर बड़ी रकम ऐंठने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

हालांकि, ‘द वायर’ से बात करते हुए सागर कथित वीडियो के कंटेंट के बारे में विस्तार से नहीं बता पाए। पुलिस की ही तरह उन्होंने भी हमले के आरोपों को “ड्रामा” बताया।

लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई आधिकारिक FIR नहीं है, बल्कि सागर द्वारा DCP के दफ्तर में दी गई महज एक अर्जी है।

‘द वायर हिंदी’ से बात करते हुए वडेचा ने रंगदारी के आरोपों को नकार दिया।

इस बीच, 27 मार्च को वडगाम से कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने राजकोट सिविल अस्पताल में वडेचा से मुलाकात की और अपनी मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।

PTI के अनुसार, मेवाणी ने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर DCP के खिलाफ FIR दर्ज करने, साथ ही उनकी गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग की है।



PTI से बात करते हुए DCP बांगड़वा ने कहा, “उनके खिलाफ एक आपराधिक शिकायत लंबित है और वह जांच से बचने के लिए यह सब कर रहे हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मेवाणी “निजी मकसदों” के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं।

गुजरात के पूर्व IPS अधिकारी रमेश सवानी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इन आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, “यहां तक कि कोई अदालत भी ऐसी सजा नहीं दे सकती।”

उन्होंने पूछा, “अगर आरोप सच में सही हैं, तो पुलिस ने कानूनी हदें पार करके इतनी क्रूरता क्यों की?”

सवानी ने आगे लिखा कि वडेचा के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामले लंबित नहीं थे; इसलिए अगर फिर भी उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, तो यह बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी क्रूरता अक्सर कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों के साथ की जाती है।

फिलहाल, इस मामले में दोनों पक्षों के दावे पूरी तरह से एक-दूसरे के विपरीत हैं। एक तरफ पत्रकार गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरी तरफ पुलिस इन आरोपों को गलत बता रही है।

हिरासत में क्रूरता: गुजरात शीर्ष पांच राज्यों में शामिल

पूरे देश में हिरासत में हुई मौतों और पुलिस की कथित क्रूरता से जुड़े हालिया सरकारी आंकड़े भी एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, इस साल 15 मार्च तक पूरे देश में हिरासत में हुई मौतों के 170 मामले सामने आए हैं— जो पिछले पूरे साल में दर्ज किए गए कुल 140 मामलों से कहीं ज्यादा हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि गुजरात उन राज्यों में से एक है, जहां ऐसे मामलों की लगातार मौजूदगी चिंता का विषय बनी हुई है। इस साल 15 मार्च तक गुजरात में हिरासत में हुई मौतों के 14 मामले दर्ज किए गए, जिससे यह ऐसे मामलों की सबसे अधिक दर वाले राज्यों में शामिल हो गया है।

MHA के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में 2021–22 में 24 मौतें हुईं, उसके बाद 2022–23 में 15, 2023–24 में 18 और 2024–25 में 14 मौतें हुईं; इस साल अब तक 14 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इसी दौरान महाराष्ट्र में भी 14 मामले सामने आए हैं, जबकि बिहार (19), राजस्थान (18) और उत्तर प्रदेश (15) इस सूची में गुजरात से ऊपर हैं।

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