कन्नन कहते हैं, "मैंने अपनी निजी समस्या को न उठाने का फैसला किया है, क्योंकि मुझे अच्छी तरह पता है कि आपके शासन में लाखों लोग किस तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।"

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए पूर्व IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने बुधवार को आरोप लगाया कि उनका इस्तीफा छह साल से भी अधिक समय से लंबित है।
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, गोपीनाथन ने दावा किया कि इस दौरान सैलरी न मिलने के बावजूद उन्हें न तो औपचारिक रूप से सेवा से मुक्त किया गया है और न ही उन्हें पेशेवर तौर पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इस देरी की वजह से वह केरल में चुनाव भी नहीं लड़ पाए हैं।
गोपीनाथन ने कहा, "मैंने अपना निजी मुद्दा न उठाने का फैसला किया है, क्योंकि मुझे अच्छी तरह पता है कि आपके शासन में लाखों लोग किस तरह की मुश्किलों से गुजर रहे हैं। लेकिन इस्तीफा देने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने के मेरे अधिकार को रोकना बहुत ही दुखद और छोटी सोच वाली बात है, चाहे मेरी राजनीतिक स्थिति कुछ भी हो।"

AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने अक्टूबर 2025 में गोपीनाथन को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।
तब से 40 वर्षीय पूर्व नौकरशाह अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और लोकतंत्र, बहुसंख्यक वर्ग के बीच "पीड़ित होने का डर" और जम्मू-कश्मीर में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं।
कोट्टायम के रहने वाले गोपीनाथन को लेकर उम्मीद थी कि वे 9 अप्रैल को केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरेंगे। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा उनके इस्तीफे को मंजूरी देने में हो रही देरी के चलते कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने के अपने रुख को बदल लिया है।
कन्नन गोपीनाथन कौन हैं?
गोपीनाथन ने 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में "बंद" के विरोध में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। वह पिछले साल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
उन्होंने पलक्कड़ में पढ़ाई की और बाद में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। उनकी शादी हिमानी पाठक से हुई है, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
पिछले साल DNA से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने 2019 में (एक अधिकारी के तौर पर) इस्तीफा दे दिया था। उस समय एक बात साफ थी कि सरकार जिस दिशा में देश को ले जाना चाहती है, वह सही नहीं है। यह साफ था कि मुझे गलत के खिलाफ लड़ना होगा... मैंने 80-90 जिलों का दौरा किया और लोगों से बात की, मैं कई नेताओं से मिला। तब यह साफ हो गया कि सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही देश को उस दिशा में ले जा सकती है, जिस दिशा में उसे जाना चाहिए।"
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मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, गोपीनाथन ने दावा किया कि इस दौरान सैलरी न मिलने के बावजूद उन्हें न तो औपचारिक रूप से सेवा से मुक्त किया गया है और न ही उन्हें पेशेवर तौर पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इस देरी की वजह से वह केरल में चुनाव भी नहीं लड़ पाए हैं।
गोपीनाथन ने कहा, "मैंने अपना निजी मुद्दा न उठाने का फैसला किया है, क्योंकि मुझे अच्छी तरह पता है कि आपके शासन में लाखों लोग किस तरह की मुश्किलों से गुजर रहे हैं। लेकिन इस्तीफा देने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने के मेरे अधिकार को रोकना बहुत ही दुखद और छोटी सोच वाली बात है, चाहे मेरी राजनीतिक स्थिति कुछ भी हो।"

AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने अक्टूबर 2025 में गोपीनाथन को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।
तब से 40 वर्षीय पूर्व नौकरशाह अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और लोकतंत्र, बहुसंख्यक वर्ग के बीच "पीड़ित होने का डर" और जम्मू-कश्मीर में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं।
कोट्टायम के रहने वाले गोपीनाथन को लेकर उम्मीद थी कि वे 9 अप्रैल को केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरेंगे। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा उनके इस्तीफे को मंजूरी देने में हो रही देरी के चलते कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने के अपने रुख को बदल लिया है।
कन्नन गोपीनाथन कौन हैं?
गोपीनाथन ने 2019 में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में "बंद" के विरोध में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। वह पिछले साल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
उन्होंने पलक्कड़ में पढ़ाई की और बाद में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। उनकी शादी हिमानी पाठक से हुई है, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
पिछले साल DNA से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने 2019 में (एक अधिकारी के तौर पर) इस्तीफा दे दिया था। उस समय एक बात साफ थी कि सरकार जिस दिशा में देश को ले जाना चाहती है, वह सही नहीं है। यह साफ था कि मुझे गलत के खिलाफ लड़ना होगा... मैंने 80-90 जिलों का दौरा किया और लोगों से बात की, मैं कई नेताओं से मिला। तब यह साफ हो गया कि सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही देश को उस दिशा में ले जा सकती है, जिस दिशा में उसे जाना चाहिए।"
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