शिक्षा के नाम पर करोड़ों की ‘लूट’: फर्जी डिग्री, पेपर लीक और छात्रवृत्ति घोटालों पर ईडी का बड़ा एक्शन

Written by sabrang india | Published on: May 12, 2026
पेपर लीक, फर्जी दाखिले और छात्रवृत्ति घोटालों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशभर में बड़ा अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसी अब तक करीब 1,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है, जबकि कई हाई-प्रोफाइल आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।



शिक्षा क्षेत्र में सामने आए करीब 4,000 करोड़ रुपये के कथित घोटालों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा व्यापक जांच की जा रही है। इन मामलों में पेपर लीक, फर्जी दाखिले, छात्रवृत्ति घोटाले, जाली डिग्री रैकेट और भर्ती अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच के दौरान ईडी ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर अब तक लगभग 1,500 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं और कई चर्चित आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इसी क्रम में अल-फलाह ग्रुप से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। ईडी ने हाल ही में ग्रुप प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली में फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से जमीन कब्जाने के आरोप में दोबारा गिरफ्तार किया है।

इससे पहले जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों में फंड के दुरुपयोग तथा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मामला दर्ज किया जा चुका है। ईडी ने जांच के दौरान 139.97 करोड़ रुपये मूल्य की 54 एकड़ जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था, जिसके बाद एजेंसी ने इस मामले में अपनी अभियोजन शिकायत भी दाखिल की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अपराध से अर्जित कुल आय करीब 493.24 करोड़ रुपये आंकी गई है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थानों ने छात्रों को प्रवेश के लिए लुभाने के वास्ते समाप्त हो चुकी नैक (NAAC) मान्यता को भी वैध बताकर पेश किया। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी को फर्जी तरीके से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम की धारा 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त भी दिखाया गया था। इसके अलावा, मंजूरी और प्रमाणन प्राप्त करने में भी कई कथित अनियमितताएं पाई गई हैं।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी तब भी जांच के घेरे में आई थी, जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए विस्फोट से जुड़े मॉड्यूल के सिलसिले में संस्थान के तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था।

पश्चिम बंगाल के कथित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 151.26 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। इस मामले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, विधायक चंद्रनाथ सिन्हा से जुड़ी लगभग 3.65 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति भी एजेंसी द्वारा कुर्क की गई है।

पश्चिम बंगाल से जुड़ा एक अन्य चर्चित मामला नौवीं से बारहवीं कक्षा के सहायक शिक्षकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं का है। इस मामले में जांच एजेंसी ने 238.8 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज की हैं। मामले में शांति प्रसाद सिन्हा, प्रसन्न कुमार रॉय और विधायक जीवन कृष्ण साहा समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 3 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें करीब 25,000 नियुक्तियों को रद्द किया गया था। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के ‘ग्रुप सी और डी स्टाफ’ भर्ती घोटाले में भी ईडी की कार्रवाई जारी है, जहां अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग 247 करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुए कथित निर्माण घोटाले की जांच भी पिछले वर्ष शुरू की गई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 2015 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के कार्यकाल में सरकारी स्कूलों के लिए 12,000 से अधिक कक्षाओं और अर्ध-स्थायी ढांचों के निर्माण में कथित 2,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। इस मामले में पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन भी जांच एजेंसी के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर्नाटक के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की कथित फर्जी ब्लॉकिंग से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है। वहीं, नीट-यूजी 2024 (NEET-UG 2024) पेपर लीक मामले में एजेंसी ने रांची, पटना और नालंदा समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर जांच तेज कर दी है।

नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले की जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया और उसके सहयोगियों ने गोपनीय परीक्षा सामग्री से जुड़े प्रिंटिंग प्रेस, गोदामों और परिवहन वाहनों की विस्तृत जानकारी पहले ही हासिल कर ली थी। आरोप है कि गिरोह ने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के दौरान सीलबंद बक्सों के साथ छेड़छाड़ कर प्रश्न पत्र छात्रों तक पहुंचने से पहले ही चुरा लिए। बाद में इन प्रश्न पत्रों को एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया चैनलों के जरिए बेचा गया।

इसके अलावा, ईडी ने राजस्थान में हुई 2022 की वरिष्ठ शिक्षक द्वितीय श्रेणी प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक मामले की भी जांच की है और कई गिरफ्तारियां की हैं।

जांच एजेंसी ने कथित छात्रवृत्ति धोखाधड़ी से जुड़े कई मामलों की जांच भी अपने हाथ में ली है। हिमाचल प्रदेश में आरोप है कि कुछ निजी संस्थानों ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए निर्धारित सरकारी छात्रवृत्ति राशि का दुरुपयोग किया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत फर्जी छात्रों का रिकॉर्ड तैयार कर और दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी धन का दावा किया। इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं।

उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह का एक कथित छात्रवृत्ति घोटाला सामने आया, जिसमें हाइजिया ग्रुप पर छात्रों के डेटा में हेरफेर कर केंद्र और राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत फर्जी दावे करने के आरोप लगे। जांच एजेंसियों के अनुसार, संस्थान ने कथित तौर पर फर्जी रिकॉर्ड और गलत जानकारी के आधार पर छात्रवृत्ति राशि हासिल की।

ऐसा ही एक छात्रवृत्ति घोटाला उत्तर प्रदेश में सामने आया, जहां हाइजिया ग्रुप ने कथित तौर पर छात्रों के डेटा में फर्जीवाड़ा करके केंद्रीय और राज्य छात्रवृत्ति का दावा किया।

कर्नाटक के महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों के लिए निर्धारित वजीफा फंड में से करीब 33.34 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। इस मामले में कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5.87 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां कुर्क की हैं, जबकि 85 लाख रुपये की अन्य संपत्तियां भी जब्त की गई हैं।

अगस्त 2025 में कई निजी कॉलेजों में मेडिकल दाखिले से जुड़े कथित फर्जी एनआरआई कोटा रैकेट की जांच भी शुरू की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, अयोग्य उम्मीदवारों को प्रवेश दिलाने के लिए कुछ निजी कॉलेजों ने एजेंटों के साथ मिलकर दूतावास से जारी बताए गए जाली एनआरआई प्रमाण पत्र और फर्जी फैमिली ट्री तैयार किए। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में इस तरह के 23 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों की पहचान की गई है। इनमें से करीब 19 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को ईडी ने अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

अन्य प्रमुख मामलों में हिमाचल प्रदेश की मानव भारती यूनिवर्सिटी से जुड़ा कथित फर्जी डिग्री रैकेट भी शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित कुल आय का अनुमान करीब 387 करोड़ रुपये लगाया गया है।

इसके अलावा, पिछले वर्ष अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फोरम फॉर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (FIITJEE) कोचिंग संस्थानों के प्रमोटरों और मालिकों से जुड़े एक मामले में दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई उन कोचिंग केंद्रों के कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना के अचानक बंद होने के कुछ महीनों बाद की गई।

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