मध्य प्रदेश में मंदिर के नाम पर गेहूं मांगने से भड़का विवाद: दलित परिवार पर हमला, महिलाएं समेत कई लोग घायल

Written by sabrang india | Published on: May 5, 2026
अहिरवार समाज के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी क्षमता एक क्विंटल गेहूं देने की नहीं है और वे केवल 50 किलो ही दे सकते हैं।


साभार : टीओआई

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के महाराजगंज सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां मंदिर के नाम पर गेहूं मांगने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद बढ़कर हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि पटेल समाज के कुछ लोगों ने दलित अहिरवार समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से जबरन एक क्विंटल गेहूं देने की मांग की। जब प्रभावित परिवारों ने अपनी स्थिति का हवाला देते हुए केवल 50 किलो गेहूं देने की बात कही, तो विवाद गहराता गया और अंततः मारपीट तक पहुंच गया।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, अहिरवार समाज के लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी क्षमता एक क्विंटल गेहूं देने की नहीं है और वे केवल 50 किलो ही दे सकते हैं। इसके बावजूद आरोपियों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और एक क्विंटल गेहूं देने का दबाव बनाते रहे। जब पीड़ित परिवार अपनी बात पर अड़े रहे, तो आरोप है कि पटेल समाज के लोगों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उन पर डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में महिलाएं और पुरुष दोनों गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। घटना में जिन लोगों पर हमला करने का आरोप है, उनमें श्याम पटेल, रामस्वरूप पटेल, भगवतदयाल पटेल और राजा भैया पटेल के नाम सामने आए हैं।

पीड़ित पक्ष में कूरा अहिरवार, छिद्दी अहिरवार, सोहन अहिरवार, वीरू अहिरवार, गिरिजा अहिरवार और कविता अहिरवार शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पीड़ितों के अनुसार, मंदिर के नाम पर गेहूं की मांग को लेकर जब उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति बताते हुए केवल 50 किलो देने की बात कही, तो आरोपी पक्ष अभद्र व्यवहार पर उतर आया। उनका आरोप है कि एक क्विंटल गेहूं देने के लिए दबाव बनाया गया और इंकार करने पर गाली-गलौज शुरू कर दी गई। इससे माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया और विवाद बढ़ने लगा।

पीड़ितों ने बताया कि जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी पक्ष ने मारपीट शुरू कर दी। डंडों और ईंट-पत्थरों से किए गए हमले में परिवार के कई सदस्य घायल हो गए।

पीड़ितों के अनुसार, हमले के दौरान महिलाओं को भी निशाना बनाया गया, जिससे उन्हें भी चोटें आईं। घटना के बाद से पूरा परिवार भय के माहौल में है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

आजाद समाज पार्टी के नेता सुनील अस्तेय ने इस मामले पर एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर आस्था का केंद्र होता है, लेकिन उसके नाम पर गरीब दलित किसान परिवार से जबरन अनाज मांगना और मना करने पर पूरे परिवार, विशेषकर महिलाओं पर हमला करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह केवल साधारण मारपीट की घटना नहीं, बल्कि कमजोर वर्गों को डराने और दबाने की मानसिकता को दर्शाता है।

द मूकनायक से बातचीत में एएसपी नेता सुनील अस्तेय ने कहा कि धर्म के नाम पर इस तरह की अवैध वसूली और दबंगई किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवार को तुरंत सुरक्षा दी जाए, घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जाए और सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि गांवों में आस्था के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कानून को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की बात कही जा रही है।

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