MP: दलित दूल्हे के मंदिर में प्रवेश करने पर सामाजिक बहिष्कार, 11 हजार रुपये का जुर्माना

Written by sabrang india | Published on: April 28, 2026
पंचायत में फरमान सुनाया गया कि गांव का कोई किसान या मजदूर इस दलित परिवार के किसी सदस्य को काम पर रखेगा, तो उस व्यक्ति पर 11,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।



मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के पाडल्या गवली गांव में एक दलित युवक के मंदिर में प्रवेश करने के बाद गांव की पंचायत ने उसके परिवार के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया। इसके परिणामस्वरूप उनसे सभी सामाजिक संबंध तोड़ दिए गए और गांव की दुकानों, डेयरी तथा राशन की दुकानों से भी उन्हें सामान देने पर रोक लगा दी गई।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के निवासी निर्मल कनाडे (जाति बलाई) की शादी 20 अप्रैल को हुई थी। दूल्हे ने बताया कि शादी के बाद जब नवविवाहित जोड़ा हनुमान मंदिर में पूजा करने गया, तो उन्हें दरवाजा बंद कर प्रवेश से रोका गया। आरोप है कि दलित होने के कारण दूल्हे को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। यहां तक कि मंदिर के दरवाजे पर ताला लगा दिया गया, जिससे नवविवाहित जोड़े को अपमानित होना पड़ा। उन्हें कहा गया कि वे बाहर से ही पूजा कर लें। हालांकि, बाद में पुलिस की मौजूदगी में दूल्हे को मंदिर में प्रवेश दिलाया गया।

इसके बाद मामला और भी गंभीर हो गया। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने पंचायत बुलाकर दलित परिवार को सबक सिखाने की योजना बनाई। 24 अप्रैल को आयोजित इस पंचायत में यह फैसला लिया गया:

1. दलित परिवार का 'हुक्का-पानी' बंद करने का फैसला लिया गया, यानी कोई भी उनसे पानी नहीं छुएगा और न ही कोई सामाजिक संबंध रखेगा।
2. गांव में ढिंढोरा पिटवाकर यह एलान किया गया कि कोई भी दुकानदार इस परिवार को राशन, दूध या कोई अन्य वस्तु नहीं देगा। जो ऐसा करेगा, उसका भी बहिष्कार किया जाएगा।
3. यदि कोई गांव का किसान या मजदूर इस दलित परिवार के सदस्यों को काम (मजदूरी) पर रखेगा, तो उस व्यक्ति पर 11,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

इस पूरे मामले पर खरगौन प्रशासन और पुलिस की खामोशी सवाल खड़े कर रही है। सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट्स और भीम आर्मी के समर्थकों ने इस जातिगत फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि वे जल्द ही गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों के साथ बैठक करेंगे और इस फैसले का विरोध करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवाज उठाएंगे।

भीम आर्मी के नेता सुनील अस्तेय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या उनके शासन में दलितों को मंदिर में प्रवेश, पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित करना ही “कानून व्यवस्था” माना जाएगा? या फिर सरकार मनुवादी सोच के दबाव में आकर भारतीय संविधान की मर्यादा को इसी तरह नजरअंदाज करती रहेगी?

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में दलित दूल्हों के साथ जातिगत भेदभाव और अपमान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई मामलों में युवकों को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे परंपरा के अनुसार घोड़ी पर बैठकर बारात निकालना चाहते हैं। सुनील अस्तेय का आरोप है कि कई बार प्रशासन की कार्रवाई ढीली रहती है, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़ते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई, खासकर एससी-एसटी एक्ट और एनएसए के तहत, नहीं की गई, तो आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगी।

ज्ञात हो कि पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जब दलितों के मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद हुआ था।

इसी साल फरवरी में कर्नाटक के तुमकुरु जिले के एक गांव में नवविवाहित दलित जोड़े को मंदिर से जबरन बाहर निकालने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मीडिया को इसकी जानकारी दी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर के गृह जिले तुरुवेकेरे तालुक के गोनी तुमकुरु गांव स्थित अरसम्मा मंदिर में हुई। पंकजा और पुनीत नामक इस जोड़े ने शादी के बाद आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर का रुख किया था, तभी नारायणप्पा नाम के एक व्यक्ति ने उनका सामना किया।

पुलिस के मुताबिक, नारायणप्पा ने कथित तौर पर भगवान के साये में होने का नाटक किया और जोड़े पर चिल्लाना शुरू कर दिया, जिससे वे मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सके। घटना के एक वीडियो में वह कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है, “दलित मंदिर में नहीं जा सकते। तुम कहीं और जाकर पूजा करो। तुरंत यहां से चले जाओ।”

अधिकारियों ने बताया कि बाद में नवविवाहित जोड़ा स्वयं पुलिस स्टेशन पहुंचा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “पंकजा के छोटे भाई जगदीश ने तुरुवेकेरे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर नारायणप्पा को गिरफ्तार कर लिया।”

वहीं, आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के ओरवाकल मंडल स्थित सोमायजुलपल्ली गांव में सुनकुलम्मा मंदिर में एक दलित महिला को कथित तौर पर प्रवेश से रोके जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

शिकायत के अनुसार, माला समुदाय से संबंध रखने वाली एक सरकारी कर्मचारी मालती दर्शन के लिए मंदिर गई थीं। आरोप है कि जनार्दन नामक पुजारी ने उन्हें मंदिर के भीतर जाने से रोक दिया। महिला का कहना था कि पुजारी ने उनसे कहा कि उनकी “हदें” हैं और उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस दौरान पुजारी के बेटे वामसी ने भी कथित तौर पर उसका समर्थन किया।

मालती ने बताया कि जब उन्होंने कारण पूछा, तो पुजारी ने कहा कि वे किसी से भी शिकायत कर सकती हैं, लेकिन उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस घटना को लेकर मंदिर परिसर में बहस हुई, जिससे गांव में तनाव का माहौल बन गया।

अंततः मालती ने ओरवाकल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और एससी/एसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज भी जातिगत भेदभाव का सामना करना बेहद पीड़ादायक है।

उन्होंने कहा, “भगवान के सामने सभी समान हैं। जाति के आधार पर मंदिर में प्रवेश से रोकना पूरी तरह गलत है।”

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