22 वर्षीय छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि फैकल्टी सदस्यों ने उसकी जातिगत पहचान, रंग-रूप और आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसका मानसिक उत्पीड़न किया।

साभार : द लीफलेट
केरल पुलिस ने कन्नूर डेंटल कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया, जब शुक्रवार को संस्थान के एक दलित छात्र की कथित आत्महत्या के बाद उसकी मौत हो गई। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे जातिगत गालियों, धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया था।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान नितिन राज आरएल के रूप में हुई है। वह तिरुवनंतपुरम के पुथुकुलंगारा, उझामलक्कल का निवासी था और कन्नूर के अंजरकंडी स्थित कॉलेज में BDS प्रथम वर्ष का छात्र था।
पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल की दोपहर राज मेडिकल कॉलेज ब्लॉक के पास एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की और शनिवार को डेंटल एनाटॉमी विभाग के प्रमुख एम.के. राम और एसोसिएट प्रोफेसर के.टी. संगीता नांबियार को निलंबित कर दिया।
राज के परिवार का दावा है कि 22 वर्षीय छात्र को उसकी जातिगत पहचान, रंग-रूप और आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, राज की बहन निकिता ने बताया कि एक बार क्लास में एक फैकल्टी सदस्य ने अन्य छात्रों के सामने उसे “सड़ा हुआ कुत्ता” कहकर अपमानित किया था।
उन्होंने कहा, “वह हमें नियमित रूप से इस तरह के भेदभाव और उत्पीड़न के बारे में बताता था। एक बार उसे स्टाफ रूम में बुलाकर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।”
निकिता के अनुसार, राज ने कॉलेज के प्रिंसिपल से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आगे कहा, “जब उत्पीड़न असहनीय हो गया, तो उसने विरोध किया, जिसके बाद उसे और अधिक गालियां दी जाने लगीं।”
राज के पिता राजन ने पत्रकारों को बताया कि फैकल्टी सदस्यों ने कथित तौर पर उनके बेटे के शैक्षणिक भविष्य को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।
उन्होंने कहा, “उसने बिना किसी सहारे के कड़ी मेहनत करके मेरिट के आधार पर डेंटल कॉलेज में दाखिला पाया था। लेकिन फैकल्टी सदस्यों ने उसकी जाति और रंग-रूप को लेकर उसे प्रताड़ित किया और शैक्षणिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।”
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मामला चक्कराक्कल पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।
नितिन की मौत के बाद एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसे कथित तौर पर उसी का बताया जा रहा है। इसमें वह फैकल्टी सदस्यों द्वारा किए गए उत्पीड़न और अपमान का जिक्र करता हुआ सुनाई देता है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप में वह कहता है, “मैंने जितनी हो सकी, उतनी बेइज्ज़ती सहन की। उन्होंने मेरी मां और उनकी सर्जरी का भी मजाक उड़ाया। मेरी आंसर शीट छात्रों के बीच घुमाई गई और मेरी गलतियों को सबके सामने दिखाया गया।”
पुलिस ने पुष्टि की है कि राज ने अपने दोस्तों को एक ऑडियो मैसेज भेजा था, जिसमें उसने फैकल्टी पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। जल्द ही सहपाठियों, कॉलेज प्रशासन और परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
राज का शव रविवार को तिरुवनंतपुरम स्थित उसके घर लाया गया और परिवार की जमीन पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
कई राजनीतिक नेताओं ने इस घटना पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने उच्च-स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को परिवार के आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ दो शिक्षकों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है और मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने भी परिवार से मुलाकात कर कहा कि इस मामले की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने कहा, “शिक्षकों से छात्रों का मार्गदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे लोग शिक्षक कैसे बन गए? यह बेहद गंभीर मामला है।”
CPI(M) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने भी परिवार से मुलाकात कर इस घटना को दुखद बताया और कहा कि न्याय मिलने तक उनकी पार्टी परिवार के साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने इस घटना की तुलना हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुई रोहित वेमुला की मौत से करते हुए कहा कि यह मामला भी गंभीर जातिगत भेदभाव की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
इस बीच, केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग के न्यायिक सदस्य के. बैजूनाथ ने कन्नूर शहर के पुलिस आयुक्त को मामले की जांच कर निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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साभार : द लीफलेट
केरल पुलिस ने कन्नूर डेंटल कॉलेज के फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। यह कदम तब उठाया गया, जब शुक्रवार को संस्थान के एक दलित छात्र की कथित आत्महत्या के बाद उसकी मौत हो गई। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे जातिगत गालियों, धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया था।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान नितिन राज आरएल के रूप में हुई है। वह तिरुवनंतपुरम के पुथुकुलंगारा, उझामलक्कल का निवासी था और कन्नूर के अंजरकंडी स्थित कॉलेज में BDS प्रथम वर्ष का छात्र था।
पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल की दोपहर राज मेडिकल कॉलेज ब्लॉक के पास एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की और शनिवार को डेंटल एनाटॉमी विभाग के प्रमुख एम.के. राम और एसोसिएट प्रोफेसर के.टी. संगीता नांबियार को निलंबित कर दिया।
राज के परिवार का दावा है कि 22 वर्षीय छात्र को उसकी जातिगत पहचान, रंग-रूप और आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, राज की बहन निकिता ने बताया कि एक बार क्लास में एक फैकल्टी सदस्य ने अन्य छात्रों के सामने उसे “सड़ा हुआ कुत्ता” कहकर अपमानित किया था।
उन्होंने कहा, “वह हमें नियमित रूप से इस तरह के भेदभाव और उत्पीड़न के बारे में बताता था। एक बार उसे स्टाफ रूम में बुलाकर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।”
निकिता के अनुसार, राज ने कॉलेज के प्रिंसिपल से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आगे कहा, “जब उत्पीड़न असहनीय हो गया, तो उसने विरोध किया, जिसके बाद उसे और अधिक गालियां दी जाने लगीं।”
राज के पिता राजन ने पत्रकारों को बताया कि फैकल्टी सदस्यों ने कथित तौर पर उनके बेटे के शैक्षणिक भविष्य को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।
उन्होंने कहा, “उसने बिना किसी सहारे के कड़ी मेहनत करके मेरिट के आधार पर डेंटल कॉलेज में दाखिला पाया था। लेकिन फैकल्टी सदस्यों ने उसकी जाति और रंग-रूप को लेकर उसे प्रताड़ित किया और शैक्षणिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।”
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मामला चक्कराक्कल पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।
नितिन की मौत के बाद एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसे कथित तौर पर उसी का बताया जा रहा है। इसमें वह फैकल्टी सदस्यों द्वारा किए गए उत्पीड़न और अपमान का जिक्र करता हुआ सुनाई देता है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप में वह कहता है, “मैंने जितनी हो सकी, उतनी बेइज्ज़ती सहन की। उन्होंने मेरी मां और उनकी सर्जरी का भी मजाक उड़ाया। मेरी आंसर शीट छात्रों के बीच घुमाई गई और मेरी गलतियों को सबके सामने दिखाया गया।”
पुलिस ने पुष्टि की है कि राज ने अपने दोस्तों को एक ऑडियो मैसेज भेजा था, जिसमें उसने फैकल्टी पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। जल्द ही सहपाठियों, कॉलेज प्रशासन और परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
राज का शव रविवार को तिरुवनंतपुरम स्थित उसके घर लाया गया और परिवार की जमीन पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
कई राजनीतिक नेताओं ने इस घटना पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने उच्च-स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को परिवार के आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ दो शिक्षकों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है और मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने भी परिवार से मुलाकात कर कहा कि इस मामले की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने कहा, “शिक्षकों से छात्रों का मार्गदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे लोग शिक्षक कैसे बन गए? यह बेहद गंभीर मामला है।”
CPI(M) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने भी परिवार से मुलाकात कर इस घटना को दुखद बताया और कहा कि न्याय मिलने तक उनकी पार्टी परिवार के साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने इस घटना की तुलना हैदराबाद विश्वविद्यालय में हुई रोहित वेमुला की मौत से करते हुए कहा कि यह मामला भी गंभीर जातिगत भेदभाव की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
इस बीच, केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग के न्यायिक सदस्य के. बैजूनाथ ने कन्नूर शहर के पुलिस आयुक्त को मामले की जांच कर निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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