यह मामला लखीमपुर खीरी जिले का है, जहां जनवरी में दलित समुदाय की 14 वर्षीय किशोरी के साथ एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी की गई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई। परिजनों का कहना है कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी लगातार धमकियां दे रहा था और मानसिक दबाव बना रहा था, जिसके चलते किशोरी ने यह घातक कदम उठा लिया।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 14 वर्षीय एक दलित किशोरी ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि बदसलूकी के मामले में गिरफ्तार आरोपी के जमानत पर छूटने के बाद वह लगातार धमकियां दे रहा था और मानसिक दबाव बना रहा था। इससे परेशान होकर किशोरी ने यह कदम उठाया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार 18 फरवरी को दोपहर घटना के समय उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। पिता खेत में मजदूरी करने गए थे और मां जंगल से लकड़ी लेने गई थीं। जब वे काम से लौटे, तो उन्होंने घर की छत पर अपनी बेटी को फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया।
पीड़िता के पिता ने बताया कि 10 जनवरी को उनकी बेटी पास के खेत में पशुओं के लिए चारा लेने गई थी। इसी दौरान 25 वर्षीय लवलेश कुमार उसे कथित रूप से झाड़ियों में खींच ले गया और उसके साथ बदसलूकी की। शोर मचाने पर आरोपी ने जातिसूचक गालियां दीं और वहां से फरार हो गया। घर पहुंचकर किशोरी ने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, परिजनों का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने एक दिन पास की दुकान पर गई किशोरी को रोककर धमकाया। उसने कथित तौर पर कहा कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो वह उसे जान से मार देगा।
पीड़िता के पिता ने बताया, “मेरी बेटी काफी डरी हुई थी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी। उसने हमें अपने डर के बारे में बताया भी था, लेकिन हम कोई ठोस कदम उठा पाते, उससे पहले ही उसने आत्महत्या कर ली।”
परिवार की नई शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक और मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी को शुक्रवार को दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार 18 फरवरी को दोपहर घटना के समय उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। पिता खेत में मजदूरी करने गए थे और मां जंगल से लकड़ी लेने गई थीं। जब वे काम से लौटे, तो उन्होंने घर की छत पर अपनी बेटी को फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया।
पीड़िता के पिता ने बताया कि 10 जनवरी को उनकी बेटी पास के खेत में पशुओं के लिए चारा लेने गई थी। इसी दौरान 25 वर्षीय लवलेश कुमार उसे कथित रूप से झाड़ियों में खींच ले गया और उसके साथ बदसलूकी की। शोर मचाने पर आरोपी ने जातिसूचक गालियां दीं और वहां से फरार हो गया। घर पहुंचकर किशोरी ने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, परिजनों का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी ने एक दिन पास की दुकान पर गई किशोरी को रोककर धमकाया। उसने कथित तौर पर कहा कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो वह उसे जान से मार देगा।
पीड़िता के पिता ने बताया, “मेरी बेटी काफी डरी हुई थी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी। उसने हमें अपने डर के बारे में बताया भी था, लेकिन हम कोई ठोस कदम उठा पाते, उससे पहले ही उसने आत्महत्या कर ली।”
परिवार की नई शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक और मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी को शुक्रवार को दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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