गणतंत्र दिवस 2026: गिरीश महाजन के भाषण में अंबेडकर का नाम न होने पर भड़का गुस्सा

Written by sabrang india | Published on: January 27, 2026
वन विभाग की अधिकारी माधवी जाधव ने भारत को सामाजिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित संविधान दिलाने में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की ऐतिहासिक भूमिका को मिटाने की इस कोशिश के खिलाफ भावुक होकर अपनी बात रखी।



गिरीश महाजन कौन हैं? जलगांव जिले की जामनेर सीट से सात बार चुने गए विधायक और नासिक के गार्जियन मिनिस्टर हैं। महाजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पुराने सदस्य और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी सहयोगी भी हैं। सोमवार, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर दिए गए अपने भाषण में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का उल्लेख न करने पर उन्हें तीखी आलोचना और विवादों का सामना करना पड़ा।

वन विभाग की एक महिला अधिकारी ने वर्दी में रहते हुए खुलकर और भावुक होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। ABP मराठी और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “मैं डॉ. बाबासाहेब की विरासत और योगदान को मिटने नहीं दूंगी।” सोशल मीडिया पर भी महाजन की आलोचना करते हुए और माधवी जाधव के समर्थन में संदेश तेजी से वायरल हो गए। मंत्री ने कथित तौर पर अपने गणतंत्र दिवस भाषण में कई हस्तियों का उल्लेख किया, जिनमें धार्मिक हस्तियां भी शामिल थीं। हालांकि, संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर—जिन्हें उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है—का नाम भाषण से नदारद रहा। हिंदू दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग लंबे समय से उस परंपरा से असहज रहे हैं, जिसने जाति व्यवस्था को चुनौती दी—चाहे वह ज्योतिबा फुले हों, सावित्रीबाई फुले हों या डॉ. अंबेडकर हों।

जब पूरे देश में 77वां गणतंत्र दिवस उत्साह के साथ मनाया जा रहा था, उसी दौरान नासिक में हुई एक घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन पर अपने गणतंत्र दिवस भाषण में डॉ. बी.आर. अंबेडकर का नाम न लेने का आरोप लगा। यह विवाद नासिक में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सामने आया, जब वन विभाग की महिला कर्मचारी माधवी जाधव ने मंच से महाजन से उनके भाषण में अंबेडकर का उल्लेख न होने पर खुलेआम सवाल किया। इस टकराव के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने व्यवस्था बहाल करने के लिए जाधव को हिरासत में लिया।

गिरीश महाजन को माफी मांगनी पड़ी

मामला सामने आने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गिरीश महाजन ने कहा कि यह चूक अनजाने में हुई और उन्होंने इस पर खेद व्यक्त किया। महाजन ने कहा, “यह अनजाने में हुआ होगा। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैंने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ जैसे नारे लगाए। मेरा जानबूझकर किसी का नाम छोड़ने का कोई इरादा नहीं था।” उन्होंने कहा कि उनके भाषणों में आमतौर पर ऐसी चूक नहीं होती और उन्होंने पूरे विवाद पर दुख जताया।

“मुझे सस्पेंड कर दीजिए, लेकिन मैं माफी नहीं मांगूंगी”

अपना रुख स्पष्ट करते हुए माधवी जाधव ने कहा कि वह मंत्री से सवाल पूछने के लिए माफी नहीं मांगेंगी। उन्होंने कहा कि संविधान के निर्माता के रूप में डॉ. अंबेडकर को गणतंत्र दिवस पर याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मंत्री ने गलती की है। मैं माफी नहीं मांगूंगी। मंत्री को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। अगर आप मुझे सस्पेंड करना चाहते हैं, तो कर दीजिए। मैं बाबासाहेब की पहचान को मिटने नहीं दूंगी।”

जाधव ने आगे कहा कि वह भाषण के दौरान बार-बार अंबेडकर का नाम लिए जाने की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन अन्य नेताओं का उल्लेख होने के बावजूद उनका नाम नहीं लिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया, “जिन लोगों का लोकतंत्र और संविधान से कोई लेना-देना नहीं था, उनके नाम बार-बार लिए गए। तो फिर संविधान के वास्तविक निर्माता का नाम क्यों गायब था?” उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वह 15 अगस्त या 26 जनवरी की तारीखों में आस्था न रखती हों, लेकिन लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों में उनका पूरा विश्वास है।

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