संयुक्त किसान मोर्चा का विभिन्न मांगों को लेकर 16 जनवरी को विरोध प्रदर्शन का आह्वान

Written by sabrang india | Published on: January 13, 2026
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि 2026 के नए वर्ष में संकल्प लिया जाए कि मज़दूर, किसान समेत सभी मेहनतकश लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जीत तक निरंतर, संयुक्त और अखिल भारतीय संघर्ष का निर्माण करेंगे।


फाइल फोटो

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 16 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करने और 26 जनवरी को विशाल ट्रैक्टर–वाहन–मोटरसाइकिल रैली निकालने का आह्वान किया है। संगठन का आरोप है कि बिहार चुनाव परिणामों के बाद एनडीए-नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने कॉरपोरेट कंपनियों के पक्ष में आम मेहनतकश जनता पर हमले तेज कर दिए हैं। उसका कहना है कि सरकार की नीतियां जनता के हितों के खिलाफ और निजी कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए बनाई जा रही हैं।

जनता के पैसों से बने बिजली संयंत्र अब निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि बिहार चुनाव परिणामों के बाद से एनडीए-नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने कॉरपोरेट कंपनियों के हित में आम मेहनतकश जनता पर हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों को समझने और इनके खिलाफ संयुक्त प्रतिरोध संगठित करने की आवश्यकता है।

संगठन ने कहा कि बिजली विधेयक 2025 के तहत देश के अधिकांश बिजली उत्पादन संयंत्र, जो जनता के पैसों से बने हैं—किसानों की ज़मीन पर, नदियों के मुफ्त पानी से, बांधों के निर्माण और लोगों के विस्थापन के ज़रिए, जंगलों की कटाई कर कोयला निकालने तथा खेतों में जबरन ट्रांसमिशन टावर लगाकर—अब निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

क्रॉस-सब्सिडी खत्म, एक समान दर से बढ़ेगा बोझ

संगठन ने कहा, “पहले कहा गया था कि घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं व उद्योगों से अधिक शुल्क लेकर क्रॉस-सब्सिडी दी जाएगी। लेकिन नया बिजली विधेयक 2025 कहता है कि उत्पादन और आपूर्ति का निजीकरण होगा, क्रॉस-सब्सिडी समाप्त की जाएगी और रियायती बिजली खत्म कर एक समान दर लागू की जाएगी, ताकि निजी बिजली कंपनियों का मुनाफा बढ़े और उद्योगों में निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके।”

दरें होंगी और अधिक महंगी

विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए कानून के तहत सुबह और शाम, जब बिजली की मांग अधिक होगी, तब दरें भी अधिक और महंगी होंगी। इसके लिए डिजिटल मीटर लगाए जा रहे हैं, जिन्हें स्मार्ट मीटर में बदला जाएगा। इनमें पहले भुगतान करना होगा, तभी बिजली मिलेगी; रिचार्ज खत्म होते ही पूरा घर अंधेरे में डूब जाएगा।

गरीबों पर वर्षों का बकाया जोड़कर वसूली का आरोप

संगठन ने कहा कि एक और बड़ा हमला यह है कि गरीबों पर वर्षों का बकाया बिजली बिल जोड़ दिया गया है। जिनका मासिक बिल पहले 300–400 रुपये होता था (यानी सालाना 3–5 हजार रुपये), उनके दो से पांच वर्षों के बकाया अब लाखों रुपये दिखाए जा रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत कागजों पर जो कनेक्शन जोड़े गए थे, उनके बिल भी अब भेजे जा रहे हैं।

कनेक्शन काटने की धमकी और ऐप के ज़रिए अतिरिक्त वसूली

कनेक्शन काटने की धमकी देकर वसूली की जा रही है। वसूली के लिए एक ऐप बनाया गया है, जिसके ज़रिए 2,000 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। संगठन ने कहा कि बिजली उत्पादन और वितरण की पूरी संरचना जनता की संपत्ति है, जिसे सरकार निजी कंपनियों को बेच रही है।

मुफ्त बिजली के वादे पर धोखे का आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि चुनावों में भाजपा ने खुद मुफ्त बिजली का वादा किया था, लेकिन अब जनता को धोखा देकर वसूली की जा रही है। उर्वरक, बीज और बिजली की बढ़ती कीमतें, फसल कीमतों की अनिश्चितता, एमएसपी पर खरीद का अभाव, गहरा कृषि संकट, सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विनाश, सरकारी नौकरियों का अभाव, न्यूनतम मज़दूरी का अभाव, कल्याणकारी योजनाओं में बढ़ता भ्रष्टाचार और पुलिस की वसूली—इन सबके बीच जनता को बदहाली में धकेलकर वसूली बढ़ाई जा रही है।

कृषि संकट और महंगाई के बीच बढ़ता आर्थिक दबाव

संगठन ने कहा कि कुछ दिन पहले मोबाइल रिचार्ज महंगे किए गए और अब बिजली की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। कुल मिलाकर सरकार निजी कंपनियों के हित में काम कर रही है और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

संयुक्त किसान मोर्चा की मांगें हैं—मनमाने ढंग से बढ़ाए गए बिजली बिल वापस लिए जाएं; कनेक्शन काटना बंद हो; स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया रोकी जाए; हर घर और ग्रामीण दुकानों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए; गरीबों पर नीति-स्तरीय हमले बंद हों; और बिजली विधेयक 2025 वापस लिया जाए।

‘विकसित भारत’ के नाम पर रोज़गार का अधिकार छीने जाने का आरोप

संगठन ने कहा कि दूसरा बड़ा हमला मनरेगा को “विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)” यानी VB-GRAMG अधिनियम से बदलना है।

मनरेगा में खामियां थीं, लेकिन कानून जनहित में था

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार, भुगतान में देरी और कमीशनखोरी जैसी समस्याएं थीं, लेकिन यह कानून में नहीं लिखा था; यह आरएसएस-भाजपा सरकारों की नीतियों का परिणाम था। कानून में कई सकारात्मक प्रावधान थे—काम ग्राम सभा तय करती थी, गांवों में तालाब, जल संरक्षण, सड़क और गरीबों के लिए आवास पर खर्च होना था, और 90 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाना था।

VB-GRAMG अधिनियम से रोज़गार का अधिकार खत्म होने का आरोप

संगठन का कहना है कि जी-राम-जी अधिनियम से अब रोज़गार नागरिक का अधिकार नहीं रहा, बल्कि बजट आवंटन से जुड़ी “राज्य की कृपा” बन गया है।

बीज विधेयक और कॉरपोरेट नियंत्रण का खतरा

संयुक्त किसान मोर्चा ने नए बीज विधेयक पर भी कड़ी आपत्ति जताई। संगठन ने कहा कि इस कानून के तहत बिना सरकारी पंजीकरण कोई भी बीज या पौधा बेचना अपराध होगा और छोटे बीज विक्रेताओं, नर्सरियों व किसानों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। विदेशी बीजों के आयात को छूट दी जाएगी, गुणवत्ता जांच समाप्त होगी और बीज कीमतों पर सरकारी नियंत्रण खत्म कर दिया जाएगा।
संगठन ने चेतावनी दी कि इससे आत्मनिर्भर खेती, पारंपरिक बीज किस्में और देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

श्रम संहिताएं: मज़दूर अधिकारों पर बड़ा हमला

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के ज़रिए 29 श्रम कानून खत्म कर दिए गए हैं। इससे यूनियन बनाना कठिन होगा, कार्यदिवस 8 घंटे से बढ़कर 12 घंटे या उससे अधिक हो जाएगा, न्यूनतम मज़दूरी और नौकरी की सुरक्षा समाप्त हो जाएगी, तथा कार्यस्थल और महिला श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर पड़ेगी।

2026 में अखिल भारतीय संयुक्त संघर्ष का संकल्प

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 2026 में संकल्प लिया जाए कि मज़दूर, किसान और सभी मेहनतकश लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जीत तक निरंतर, संयुक्त और अखिल भारतीय संघर्ष का निर्माण करेंगे।

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