एनएसयूआई की ओर से पहले ही ऐलान किया गया था कि बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय से प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक ‘मनरेगा बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में रविवार को कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान पुलिस ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन के समय पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनज़र पुलिस ने 30 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जबकि 54 कार्यकर्ताओं को एहतियातन नज़रबंद कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज़ जताया।
देशबंधु की रिपोर्ट के अनुसार, एनएसयूआई की ओर से पहले ही ऐलान किया गया था कि बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय से प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक ‘मनरेगा बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। संगठन का कहना था कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर कर रही है, जिससे करोड़ों मज़दूरों का रोज़गार खतरे में पड़ गया है। इसी के विरोध में छात्र संगठन ने वाराणसी में प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया था।
बीएचयू गेट पर दोपहर से तैनात पुलिस
प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने दोपहर से ही बीएचयू के मुख्य द्वार और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था। पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई थी और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसी कारण मार्च को आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं दी गई।
बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बीएचयू परिसर से बाहर निकलने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर लगाए गए बैरिकेड गिराकर आगे बढ़ने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमति नहीं बन पाई और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वहीं, वरुण चौधरी सहित कुछ प्रमुख नेताओं को मौके से गिरफ्तार कर पुलिस वाहनों तक ले जाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं को घसीटकर ले जाने के दृश्य भी सामने आए, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया।
54 एक्टिविस्ट हाउस अरेस्ट
पुलिस प्रशासन ने संभावित हालात को भांपते हुए रात के समय 54 अन्य कार्यकर्ताओं को उनके आवासों पर नज़रबंद कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को और उग्र होने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया। शहर में देर शाम तक सुरक्षा व्यवस्था सख्त बनी रही और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई।
कांग्रेस नेताओं का हमला
घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि मनरेगा को समाप्त कर करोड़ों मज़दूरों से रोज़गार का अधिकार छीना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर बल प्रयोग और गिरफ्तारियां बेहद निंदनीय हैं। प्रियंका गांधी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन बताया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने भी अपने एक्स अकाउंट के माध्यम से छात्रों पर की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि मनरेगा समाप्त किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और दमन भाजपा सरकार की घबराहट को दर्शाता है। जयराम रमेश ने कहा कि यह तथाकथित डबल इंजन सरकार की कमजोरी को उजागर करता है, जो असहमति की आवाज़ से भयभीत है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के पास मार्च निकालने की पूर्व अनुमति नहीं थी और रोके जाने पर उन्होंने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई। इसी कारण एहतियातन हिरासत और हाउस अरेस्ट जैसे कदम उठाए गए।
राजनीतिक गलियारों में मामला गर्माया
बीएचयू में हुई इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल काफ़ी गर्मा गया है। कांग्रेस इसे छात्र आंदोलन और मज़दूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बता रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता थी। मनरेगा जैसे अहम मुद्दे को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को तेज कर दिया है। फिलहाल हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठाते रहेंगे।
कांग्रेस ने जी-राम-जी बिल के विरोध में बड़े आंदोलन का ऐलान किया था, जिसमें प्रदेशभर से एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के वाराणसी पहुंचने की सूचना थी। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। अब तक 12 से अधिक कांग्रेस व एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा चुका है।
कमिश्नर ने खुद संभाली कमान
पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि यदि कोई जबरदस्ती करे या कानून-व्यवस्था बिगाड़े, तो उसके खिलाफ बल प्रयोग किया जाए। पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और करीब 1000 पुलिसकर्मियों को सड़कों पर तैनात किया गया है।
45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत मार्च निकालने वाले थे। सुबह उनके आवास के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। इसके बावजूद वे करीब 50 कार्यकर्ताओं के साथ निकले, लेकिन टाउनहॉल चौराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद अजय राय गांधी प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए और उपवास शुरू कर दिया।
प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय का घेराव
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था। कार्यकर्ताओं को बीएचयू के सिंह द्वार पर जुटने का निर्देश दिया गया था। यहां से लगभग तीन किलोमीटर लंबा मार्च प्रस्तावित था। हालात को देखते हुए बीएचयू सिंह द्वार और प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास करीब 500-500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। तीन-स्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और आगे बढ़ने से रोकने के लिए रस्सियों व बैरिकेड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस 10 गाड़ियों में 100 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भरकर ले गई। 30 प्रदर्शनकारियों को BNS की धारा 170/126/135 के तहत गिरफ्तार किया गया। देर शाम लंका थाने में 30 लोगों का चालान किया गया।
हालात को देखते हुए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल खुद सड़क पर उतरे। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आदेश दिए कि यदि कोई जबरदस्ती करे तो उसके खिलाफ बल प्रयोग करें। इसके साथ ही पुलिस ने सड़क पर फ्लैग मार्च भी किया। जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई और ड्रोन से निगरानी की गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बड़ागांव (स्थानीय पुलिस स्टेशन से लगभग 30 किलोमीटर दूर) में संदीप पाल, शशांक शेखर, शांतनु, आदित्य, अखिलेश यादव और मोहम्मद गाजी को हिरासत में लिया गया।
लंका थाने में एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी, अभिषेक शुक्ल, राजीव नयन, अमित आज़ाद, रौशन पांडेय, मिहिर और अनुराग राज को रखा गया है।
रामनगर थाने में नीरज रेहान, गौरव पुरोहित, प्रियांशु, आयुष, लक्की, करण चौरसिया, निलय, ऋषभ, शिवम, राहुल पावरा और तुषार को बंद किया गया है।
छात्रों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल छात्रों के न्यायपूर्ण विरोध के अधिकार का हनन है, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है। बिना सूचना गिरफ्तारी, अलग-अलग थानों में भेजना और संपर्क के सभी माध्यमों को बाधित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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देशबंधु की रिपोर्ट के अनुसार, एनएसयूआई की ओर से पहले ही ऐलान किया गया था कि बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय से प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक ‘मनरेगा बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। संगठन का कहना था कि केंद्र सरकार मनरेगा को कमजोर कर रही है, जिससे करोड़ों मज़दूरों का रोज़गार खतरे में पड़ गया है। इसी के विरोध में छात्र संगठन ने वाराणसी में प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया था।
बीएचयू गेट पर दोपहर से तैनात पुलिस
प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने दोपहर से ही बीएचयू के मुख्य द्वार और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था। पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई थी और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसी कारण मार्च को आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं दी गई।
बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बीएचयू परिसर से बाहर निकलने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर लगाए गए बैरिकेड गिराकर आगे बढ़ने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमति नहीं बन पाई और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वहीं, वरुण चौधरी सहित कुछ प्रमुख नेताओं को मौके से गिरफ्तार कर पुलिस वाहनों तक ले जाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं को घसीटकर ले जाने के दृश्य भी सामने आए, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया।
54 एक्टिविस्ट हाउस अरेस्ट
पुलिस प्रशासन ने संभावित हालात को भांपते हुए रात के समय 54 अन्य कार्यकर्ताओं को उनके आवासों पर नज़रबंद कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को और उग्र होने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया। शहर में देर शाम तक सुरक्षा व्यवस्था सख्त बनी रही और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई।
कांग्रेस नेताओं का हमला
घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि मनरेगा को समाप्त कर करोड़ों मज़दूरों से रोज़गार का अधिकार छीना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर बल प्रयोग और गिरफ्तारियां बेहद निंदनीय हैं। प्रियंका गांधी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन बताया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने भी अपने एक्स अकाउंट के माध्यम से छात्रों पर की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि मनरेगा समाप्त किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और दमन भाजपा सरकार की घबराहट को दर्शाता है। जयराम रमेश ने कहा कि यह तथाकथित डबल इंजन सरकार की कमजोरी को उजागर करता है, जो असहमति की आवाज़ से भयभीत है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के पास मार्च निकालने की पूर्व अनुमति नहीं थी और रोके जाने पर उन्होंने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई। इसी कारण एहतियातन हिरासत और हाउस अरेस्ट जैसे कदम उठाए गए।
राजनीतिक गलियारों में मामला गर्माया
बीएचयू में हुई इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल काफ़ी गर्मा गया है। कांग्रेस इसे छात्र आंदोलन और मज़दूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बता रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता थी। मनरेगा जैसे अहम मुद्दे को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को तेज कर दिया है। फिलहाल हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठाते रहेंगे।
कांग्रेस ने जी-राम-जी बिल के विरोध में बड़े आंदोलन का ऐलान किया था, जिसमें प्रदेशभर से एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के वाराणसी पहुंचने की सूचना थी। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। अब तक 12 से अधिक कांग्रेस व एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा चुका है।
कमिश्नर ने खुद संभाली कमान
पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि यदि कोई जबरदस्ती करे या कानून-व्यवस्था बिगाड़े, तो उसके खिलाफ बल प्रयोग किया जाए। पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और करीब 1000 पुलिसकर्मियों को सड़कों पर तैनात किया गया है।
45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत मार्च निकालने वाले थे। सुबह उनके आवास के बाहर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। इसके बावजूद वे करीब 50 कार्यकर्ताओं के साथ निकले, लेकिन टाउनहॉल चौराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद अजय राय गांधी प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए और उपवास शुरू कर दिया।
प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय का घेराव
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था। कार्यकर्ताओं को बीएचयू के सिंह द्वार पर जुटने का निर्देश दिया गया था। यहां से लगभग तीन किलोमीटर लंबा मार्च प्रस्तावित था। हालात को देखते हुए बीएचयू सिंह द्वार और प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास करीब 500-500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। तीन-स्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और आगे बढ़ने से रोकने के लिए रस्सियों व बैरिकेड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस 10 गाड़ियों में 100 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भरकर ले गई। 30 प्रदर्शनकारियों को BNS की धारा 170/126/135 के तहत गिरफ्तार किया गया। देर शाम लंका थाने में 30 लोगों का चालान किया गया।
हालात को देखते हुए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल खुद सड़क पर उतरे। उन्होंने पुलिसकर्मियों को आदेश दिए कि यदि कोई जबरदस्ती करे तो उसके खिलाफ बल प्रयोग करें। इसके साथ ही पुलिस ने सड़क पर फ्लैग मार्च भी किया। जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई और ड्रोन से निगरानी की गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बड़ागांव (स्थानीय पुलिस स्टेशन से लगभग 30 किलोमीटर दूर) में संदीप पाल, शशांक शेखर, शांतनु, आदित्य, अखिलेश यादव और मोहम्मद गाजी को हिरासत में लिया गया।
लंका थाने में एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी, अभिषेक शुक्ल, राजीव नयन, अमित आज़ाद, रौशन पांडेय, मिहिर और अनुराग राज को रखा गया है।
रामनगर थाने में नीरज रेहान, गौरव पुरोहित, प्रियांशु, आयुष, लक्की, करण चौरसिया, निलय, ऋषभ, शिवम, राहुल पावरा और तुषार को बंद किया गया है।
छात्रों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल छात्रों के न्यायपूर्ण विरोध के अधिकार का हनन है, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है। बिना सूचना गिरफ्तारी, अलग-अलग थानों में भेजना और संपर्क के सभी माध्यमों को बाधित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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