दरवाजे पर एक पर्चा पड़ा था, जिसमें मुसलमानों को निशाना बनाते हुए चेतावनी दी गई थी कि अगर वे 24 घंटे के भीतर गांव नहीं छोड़ते, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा।

“सभी कठमुल्ले 24 घंटे के अंदर गांव खाली कर दो, वरना जिंदा जला दिए जाओगे”— एक पर्चे में यह लिखा था, जिसकी तस्वीरें कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद इलाके में मुसलमानों के घरों के बाहर इस तरह के धमकी भरे पर्चे फेंके गए हैं।
मकतूब की रिपोर्ट के अनुसार, इन तस्वीरों के अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या न्यूज रिपोर्ट्स में इस घटना को लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मकतूब ने मामले की पड़ताल की और सिकंदराबाद के भोंखेड़ा गांव के निवासियों से संपर्क किया।
मकतूब ने स्थानीय निवासियों, महिलाओं, वकीलों और पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर उस पर्चे के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश की, जो 2 जनवरी, 2026 को सोशल मीडिया पर सामने आया था।
एक सुबह जिसने सब कुछ बदल दिया
1 जनवरी, 2026 की सुबह सिकंदराबाद के भोंखेड़ा गांव के मुस्लिम निवासियों के लिए बिल्कुल भी सामान्य नहीं थी।
जब साजिद अली उस दिन उठे, तो फज्र की नमाज़ अदा करने के बाद चाय बनाने के लिए दूध खरीदने बाहर निकले। उनके घर के दरवाजे पर जो मिला, उसे देखकर वे सन्न रह गए।
दरवाजे पर एक पर्चा पड़ा था, जिसमें मुसलमानों को निशाना बनाते हुए चेतावनी दी गई थी कि अगर वे 24 घंटे के भीतर गांव नहीं छोड़ते, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा।
हिंदी में लिखे इस पर्चे को मकतूब ने देखा है, जिसमें साफ तौर पर लिखा है: “सभी कठमुल्ले 24 घंटे के अंदर गांव खाली कर दो, वरना जिंदा जला दिए जाओगे।”
पर्चे के नीचे ‘कट्टर सनातनी विक्रम’ नाम लिखा था, जबकि कागज के दो कोनों पर ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ लिखा हुआ था।
साजिद ने मकतूब को बताया, “मैं हैरान रह गया। कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। थोड़ी ही देर में आस-पास के घरों से लोग बाहर आने लगे। सब एक-दूसरे से यही पूछ रहे थे कि यह किसने किया होगा।”
उन्होंने कहा, “हमारे लिए एक आम सुबह डर में बदल गई। हममें से ज़्यादातर लोग उस दिन घरों के अंदर ही रहे, क्योंकि लग रहा था कि कुछ भी हो सकता है।”
साजिद ने आगे कहा, “हम यहां से नहीं जाएंगे, लेकिन आजकल की घटनाओं और पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए डर जरूर लगता है। हम कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, लेकिन हमें यह भरोसा चाहिए कि हमारे परिवार सुरक्षित रहेंगे।”
FIR दर्ज, लेकिन डर अब भी कायम
इस घटना के बाद एक निवासी ने नज़दीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई और मांग की कि पर्चे बांटने वालों की पहचान कर जल्द से जल्द सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मकतूब द्वारा प्राप्त FIR के अनुसार, 2 जनवरी, 2026 को सिकंदराबाद थाने में दर्ज शिकायत में बताया गया कि गांव में मुस्लिम घरों के बाहर जान से मारने की धमकियों वाले पर्चे पाए गए हैं।
FIR में कहा गया है कि पर्चों में मुसलमानों को चेतावनी दी गई थी कि अगर वे “24 घंटे” के भीतर गांव नहीं छोड़ते, तो उन्हें “जिंदा जला दिया जाएगा।” यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 353(1)(c) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया है।
भोंखेड़ा गांव में कम से कम 15 मुस्लिम परिवार रहते हैं, जो आपस में रिश्तेदार हैं, जबकि गांव में हिंदू आबादी बहुसंख्यक है। निवासियों का कहना है कि दोनों समुदाय छह पीढ़ियों से भी अधिक समय से शांति और सौहार्द के साथ रहते आए हैं।
फिर भी, पर्चे मिलने के कई दिन बाद तक गांव में डर का माहौल बना हुआ है। निवासियों का कहना है कि इस धमकी ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।
“यह सीधी आपराधिक धमकी है”
इस मामले में शिकायतकर्ता और पीड़ितों की मदद कर रहे स्थानीय वकील मोहम्मद हनीफ ने मकतूब को बताया, “पर्चे में लोगों को जिंदा जलाने की धमकी दी गई है। यह साफ तौर पर आपराधिक धमकी और सार्वजनिक शांति को भंग करने वाला अपराध है।”
उन्होंने कहा, “FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वे आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।”
हनीफ ने यह भी कहा कि यह धमकी दशकों से शांतिपूर्ण रहे गांव के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिश लगती है। “यहां कभी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। गांव में ‘विक्रम’ नाम का कोई व्यक्ति भी नहीं रहता। यह जानबूझकर डर और नफरत फैलाने की साज़िश हो सकती है।”
रोजमर्रा की ज़िंदगी पर डर की छाया
निवासियों के लिए पर्चे पर लिखे शब्द अब रोजमर्रा के डर में बदल चुके हैं। आवाजाही सीमित हो गई है और रातों की नींद उड़ गई है।
सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील बनाने वाली 65 वर्षीय हाजरा ने कहा, “मैं रोज़ स्कूल जाती हूं, लेकिन अब काम खत्म करते ही डर के मारे जल्दी घर लौट आती हूं।”
उन्होंने सवाल किया, “अगर यह धमकी सच हो गई तो क्या होगा?”एक अन्य महिला शमशीदा ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है। “पर्चे में ‘24 घंटे’ लिखा है, लेकिन डर एक दिन में खत्म नहीं होता। हमारे बच्चे स्कूल-कॉलेज जाते हैं। हम उन्हें अकेले बाहर नहीं भेज पा रहे।”
धमकियों और डर के बावजूद मुस्लिम निवासियों का कहना है कि वे गांव नहीं छोड़ेंगे। शमशीदा ने कहा, “हम यहीं पैदा हुए, यहीं जिएंगे और यहीं दफन होंगे। हमें बस सुरक्षा चाहिए।”
काम के लिए रोज गांव से बाहर जाने वाले मोहम्मद अखलाक ने कहा, “अगर काम पर न जाऊं तो घर नहीं चलेगा। लेकिन बाहर रहते हुए यही डर रहता है कि पीछे कुछ न हो जाए।”
पुलिस की प्रतिक्रिया और बड़ा पैटर्न
हालांकि FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही।
सिकंदराबाद थाने के इंस्पेक्टर ने मकतूब से कहा, “यह किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। हम जांच कर रहे हैं और इलाके में नियमित गश्त बढ़ा दी गई है।”
यह घटना उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में मुसलमानों को निशाना बनाने वाले गुमनाम पर्चों, बहिष्कार की अपीलों और जनसांख्यिकीय धमकियों के बढ़ते पैटर्न से जुड़ती है।
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मकतूब की रिपोर्ट के अनुसार, इन तस्वीरों के अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या न्यूज रिपोर्ट्स में इस घटना को लेकर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मकतूब ने मामले की पड़ताल की और सिकंदराबाद के भोंखेड़ा गांव के निवासियों से संपर्क किया।
मकतूब ने स्थानीय निवासियों, महिलाओं, वकीलों और पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर उस पर्चे के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश की, जो 2 जनवरी, 2026 को सोशल मीडिया पर सामने आया था।
एक सुबह जिसने सब कुछ बदल दिया
1 जनवरी, 2026 की सुबह सिकंदराबाद के भोंखेड़ा गांव के मुस्लिम निवासियों के लिए बिल्कुल भी सामान्य नहीं थी।
जब साजिद अली उस दिन उठे, तो फज्र की नमाज़ अदा करने के बाद चाय बनाने के लिए दूध खरीदने बाहर निकले। उनके घर के दरवाजे पर जो मिला, उसे देखकर वे सन्न रह गए।
दरवाजे पर एक पर्चा पड़ा था, जिसमें मुसलमानों को निशाना बनाते हुए चेतावनी दी गई थी कि अगर वे 24 घंटे के भीतर गांव नहीं छोड़ते, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा।
हिंदी में लिखे इस पर्चे को मकतूब ने देखा है, जिसमें साफ तौर पर लिखा है: “सभी कठमुल्ले 24 घंटे के अंदर गांव खाली कर दो, वरना जिंदा जला दिए जाओगे।”
पर्चे के नीचे ‘कट्टर सनातनी विक्रम’ नाम लिखा था, जबकि कागज के दो कोनों पर ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ लिखा हुआ था।
साजिद ने मकतूब को बताया, “मैं हैरान रह गया। कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। थोड़ी ही देर में आस-पास के घरों से लोग बाहर आने लगे। सब एक-दूसरे से यही पूछ रहे थे कि यह किसने किया होगा।”
उन्होंने कहा, “हमारे लिए एक आम सुबह डर में बदल गई। हममें से ज़्यादातर लोग उस दिन घरों के अंदर ही रहे, क्योंकि लग रहा था कि कुछ भी हो सकता है।”
साजिद ने आगे कहा, “हम यहां से नहीं जाएंगे, लेकिन आजकल की घटनाओं और पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए डर जरूर लगता है। हम कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, लेकिन हमें यह भरोसा चाहिए कि हमारे परिवार सुरक्षित रहेंगे।”
FIR दर्ज, लेकिन डर अब भी कायम
इस घटना के बाद एक निवासी ने नज़दीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई और मांग की कि पर्चे बांटने वालों की पहचान कर जल्द से जल्द सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मकतूब द्वारा प्राप्त FIR के अनुसार, 2 जनवरी, 2026 को सिकंदराबाद थाने में दर्ज शिकायत में बताया गया कि गांव में मुस्लिम घरों के बाहर जान से मारने की धमकियों वाले पर्चे पाए गए हैं।
FIR में कहा गया है कि पर्चों में मुसलमानों को चेतावनी दी गई थी कि अगर वे “24 घंटे” के भीतर गांव नहीं छोड़ते, तो उन्हें “जिंदा जला दिया जाएगा।” यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 353(1)(c) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया है।
भोंखेड़ा गांव में कम से कम 15 मुस्लिम परिवार रहते हैं, जो आपस में रिश्तेदार हैं, जबकि गांव में हिंदू आबादी बहुसंख्यक है। निवासियों का कहना है कि दोनों समुदाय छह पीढ़ियों से भी अधिक समय से शांति और सौहार्द के साथ रहते आए हैं।
फिर भी, पर्चे मिलने के कई दिन बाद तक गांव में डर का माहौल बना हुआ है। निवासियों का कहना है कि इस धमकी ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।
“यह सीधी आपराधिक धमकी है”
इस मामले में शिकायतकर्ता और पीड़ितों की मदद कर रहे स्थानीय वकील मोहम्मद हनीफ ने मकतूब को बताया, “पर्चे में लोगों को जिंदा जलाने की धमकी दी गई है। यह साफ तौर पर आपराधिक धमकी और सार्वजनिक शांति को भंग करने वाला अपराध है।”
उन्होंने कहा, “FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वे आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।”
हनीफ ने यह भी कहा कि यह धमकी दशकों से शांतिपूर्ण रहे गांव के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिश लगती है। “यहां कभी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। गांव में ‘विक्रम’ नाम का कोई व्यक्ति भी नहीं रहता। यह जानबूझकर डर और नफरत फैलाने की साज़िश हो सकती है।”
रोजमर्रा की ज़िंदगी पर डर की छाया
निवासियों के लिए पर्चे पर लिखे शब्द अब रोजमर्रा के डर में बदल चुके हैं। आवाजाही सीमित हो गई है और रातों की नींद उड़ गई है।
सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील बनाने वाली 65 वर्षीय हाजरा ने कहा, “मैं रोज़ स्कूल जाती हूं, लेकिन अब काम खत्म करते ही डर के मारे जल्दी घर लौट आती हूं।”
उन्होंने सवाल किया, “अगर यह धमकी सच हो गई तो क्या होगा?”एक अन्य महिला शमशीदा ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है। “पर्चे में ‘24 घंटे’ लिखा है, लेकिन डर एक दिन में खत्म नहीं होता। हमारे बच्चे स्कूल-कॉलेज जाते हैं। हम उन्हें अकेले बाहर नहीं भेज पा रहे।”
धमकियों और डर के बावजूद मुस्लिम निवासियों का कहना है कि वे गांव नहीं छोड़ेंगे। शमशीदा ने कहा, “हम यहीं पैदा हुए, यहीं जिएंगे और यहीं दफन होंगे। हमें बस सुरक्षा चाहिए।”
काम के लिए रोज गांव से बाहर जाने वाले मोहम्मद अखलाक ने कहा, “अगर काम पर न जाऊं तो घर नहीं चलेगा। लेकिन बाहर रहते हुए यही डर रहता है कि पीछे कुछ न हो जाए।”
पुलिस की प्रतिक्रिया और बड़ा पैटर्न
हालांकि FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही।
सिकंदराबाद थाने के इंस्पेक्टर ने मकतूब से कहा, “यह किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। हम जांच कर रहे हैं और इलाके में नियमित गश्त बढ़ा दी गई है।”
यह घटना उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में मुसलमानों को निशाना बनाने वाले गुमनाम पर्चों, बहिष्कार की अपीलों और जनसांख्यिकीय धमकियों के बढ़ते पैटर्न से जुड़ती है।
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