वाराणसी में 400 किमी तक सीवर और पानी की लाइन साथ-साथ, 28 वार्डों के 1.50 लाख लोग प्रभावित

Written by sabrang india | Published on: January 2, 2026
वाराणसी शहर के 28 वार्डों में रहने वाले करीब डेढ़ लाख लोग दूषित जलापूर्ति की समस्या से परेशान हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 400 किलोमीटर तक सीवर लाइन और पेयजल पाइपलाइन एक साथ बिछी हुई हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।



जीने के लिए सबसे आवश्यक पीने के पानी की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के 28 वार्डों में लगभग डेढ़ लाख लोग दूषित जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में करीब 400 किलोमीटर तक सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन साथ-साथ बिछी हुई हैं। हर महीने औसतन 250 शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, दूषित जलापूर्ति का सबसे बड़ा कारण पाइपलाइनों में लीकेज है, जिसके चलते पेयजल में सीवर का पानी मिलकर आपूर्ति की जा रही है। इसका सीधा उदाहरण बेनियाबाग क्षेत्र में जलकल कार्यालय के पास देखा जा सकता है, जहां बीते 15 दिनों से लीकेज बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक इसे दुरुस्त नहीं किया गया है।

शहर की 18 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जलकल विभाग की है। प्रति व्यक्ति 132 लीटर प्रतिदिन की खपत का मानक निर्धारित है। इस हिसाब से शहर को रोजाना लगभग 290 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, जबकि बमुश्किल 170 एमएलडी पानी ही घरों तक पहुंच पा रहा है। जर्जर पाइपलाइनों और लोगों की लापरवाही के कारण इसमें से भी बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है।

संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। करीब सौ साल से भी अधिक पुरानी पानी की पाइपलाइनें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिनसे लगातार लीकेज होकर पानी बर्बाद हो रहा है। इन पाइपलाइनों की केवल कभी-कभार ही मरम्मत की जाती है। पहले काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भू-भौतिकी विभाग की जांच रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया था कि शहर की क्षतिग्रस्त सीवर लाइनें पीने के पानी को प्रदूषित कर रही हैं।

शहर के अधिकांश इलाकों से पानी लीकेज की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन पक्का महाल क्षेत्र में संकट सबसे गंभीर है। विशेष रूप से ईश्वरगंगी, दारानगर, औसानगंज, नाटीइमली, चौकाघाट, गायघाट, रामघाट, दशाश्वमेध, शिवाला, भदैनी, मदनपुरा और भेलूपुर जैसे इलाके इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं।

372 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना
शहर के 18 वार्डों में फैली 372 किलोमीटर लंबी जर्जर सीवर और पेयजल पाइपलाइनों को बदलने के लिए 823 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसके लागू होने से सीवर ओवरफ्लो और पानी की बर्बादी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। इस योजना से गंगा घाटों के आसपास स्थित करीब 100 मोहल्लों के लगभग चार लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

क्या कहते हैं अधिकारी

जलकल के सचिव विश्वनाथ गुप्ता ने कहा कि बेनियाबाग की समस्या जल्द दूर कर दी जाएगी। भीड़-भाड़ के कारण फिलहाल खुदाई संभव नहीं है। दूषित जल से जुड़ी जो भी शिकायतें आती हैं, उन्हें दूर कराया जाता है। 18 वार्डों में नई पाइपलाइन डालने की योजना बनाई गई है और जल्द ही काम शुरू होगा।

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